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हिंदी ने दिलाया सम्मान, बनाई एक अलग पहचान
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झांसी। शुरुआत से लेकर अंत तक की शिक्षा अंग्रेजी माध्यम में हुई। लिहाजा, अंग्रेजी पर पकड़ भी मजबूत रही। अंग्रेजी में लिखना-पढ़ना दोनों ही बेहद आसान होता था, यही वजह थी कि इसी भाषा को तरजीह भी दी जाती थी, लेकिन पहचान और सम्मान हिंदी ने दिलाया। हम यहां बात कर रहे हैं सूरज प्रसाद राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रवक्ता असमा खान की, जिनके वीडियो कोरोना काल में माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा बेहद सराहे गए, जिनमें वो हिंदी में धारा प्रवाह बोलती हुईं नजर आती हैं। इतना ही नहीं, हिंदी अच्छी होने की वजह से उन्हें शासन-प्रशासन के कार्यक्रमों की जिम्मेदारी भी दी जाती है।
असमा की इंटरमीडिएट और बाद में स्नातक की शिक्षा हिंदी माध्यम से हुई। बीएससी उन्होंने गणित, रसायन और भौतिक शास्त्र से की थी। इसके बाद उन्होंने एमए (इतिहास) में दाखिला लिया, लेकिन ये पढ़ाई भी उन्होंने अंग्रेजी माध्यम से ही की। 2006 में यूजीसी नेट में चयन हुआ, परंतु इसके अगले ही साल उनकी नियुक्ति कस्टम विभाग में हो गई। ये पूरा सफर उनका अंग्रेजी माध्यम में ही गुजरा। हिंदी से उनका सीधा वास्ता वर्ष 2010 में राजकीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता के पद पर चयन होने पर हुआ। शुरुआत में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, क्योंकि यहां सभी काम उन्हें हिंदी में करने पड़ते थे, जो कभी भी उनके लिए आसान नहीं रही थी। लेकिन, उन्होंने बेहिचक और बेझिझक हिंदी को अपना लिया। बच्चों को इतिहास पढ़ाती थीं और खुद हिंदी पढ़ती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने हिंदी पर मजबूत पकड़ बना ली। अब उनके लिए हिंदी अंग्रेजी की तरह बेहद आसान हो गई है।
कोरोना काल में उनके 14 वीडियो एनसीईआरटी के माध्यम से ई-गंगा और दूरदर्शन पर प्रसारित हुए। खास बात ये है कि मंडल से उनका ही पहला वीडियो चयनित हुआ था। उनकी इस उपलब्धि पर उन्हें माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा कई बार सम्मानित किया गया। इसके अलावा हिंदी अच्छी होने की वजह से शासन व प्रशासन के स्थानीय स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों के संचालन का दायित्व भी उन्हें ही मिलता है, जिसका वे बखूबी निर्वहन करती हैं। हिंदी की वजह से असमा खान आज झांसी का एक जाना-पहचाना नाम बन चुका है।
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सभी को अपना लेती है हिंदी
झांसी। असमा खान ने बताया कि पहले हिंदी बहुत कठिन लगती थी। यहां तक कि हिंदी के अंक तक समझ में नहीं आते थे। लेकिन, शिक्षा विभाग में आने के बाद हिंदी पढ़ना और लिखना शुरू किया। लगा कि ये तो बेहद आसान है। हिंदी शब्दों को शुद्ध उच्चारण करने में बहुत अच्छा लगता है। सच में हिंदी एक ऐसी भाषा है, जो हर किसी को आसानी से अपना लेती है। मेरी दोनों बेटियां अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ रही हैं, लेकिन मैं अपने अनुभाव के आधार पर उन्हें हिंदी का भी बेहतर ज्ञान दे रही हूं।
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असमा की इंटरमीडिएट और बाद में स्नातक की शिक्षा हिंदी माध्यम से हुई। बीएससी उन्होंने गणित, रसायन और भौतिक शास्त्र से की थी। इसके बाद उन्होंने एमए (इतिहास) में दाखिला लिया, लेकिन ये पढ़ाई भी उन्होंने अंग्रेजी माध्यम से ही की। 2006 में यूजीसी नेट में चयन हुआ, परंतु इसके अगले ही साल उनकी नियुक्ति कस्टम विभाग में हो गई। ये पूरा सफर उनका अंग्रेजी माध्यम में ही गुजरा। हिंदी से उनका सीधा वास्ता वर्ष 2010 में राजकीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता के पद पर चयन होने पर हुआ। शुरुआत में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, क्योंकि यहां सभी काम उन्हें हिंदी में करने पड़ते थे, जो कभी भी उनके लिए आसान नहीं रही थी। लेकिन, उन्होंने बेहिचक और बेझिझक हिंदी को अपना लिया। बच्चों को इतिहास पढ़ाती थीं और खुद हिंदी पढ़ती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने हिंदी पर मजबूत पकड़ बना ली। अब उनके लिए हिंदी अंग्रेजी की तरह बेहद आसान हो गई है।
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कोरोना काल में उनके 14 वीडियो एनसीईआरटी के माध्यम से ई-गंगा और दूरदर्शन पर प्रसारित हुए। खास बात ये है कि मंडल से उनका ही पहला वीडियो चयनित हुआ था। उनकी इस उपलब्धि पर उन्हें माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा कई बार सम्मानित किया गया। इसके अलावा हिंदी अच्छी होने की वजह से शासन व प्रशासन के स्थानीय स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों के संचालन का दायित्व भी उन्हें ही मिलता है, जिसका वे बखूबी निर्वहन करती हैं। हिंदी की वजह से असमा खान आज झांसी का एक जाना-पहचाना नाम बन चुका है।
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सभी को अपना लेती है हिंदी
झांसी। असमा खान ने बताया कि पहले हिंदी बहुत कठिन लगती थी। यहां तक कि हिंदी के अंक तक समझ में नहीं आते थे। लेकिन, शिक्षा विभाग में आने के बाद हिंदी पढ़ना और लिखना शुरू किया। लगा कि ये तो बेहद आसान है। हिंदी शब्दों को शुद्ध उच्चारण करने में बहुत अच्छा लगता है। सच में हिंदी एक ऐसी भाषा है, जो हर किसी को आसानी से अपना लेती है। मेरी दोनों बेटियां अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ रही हैं, लेकिन मैं अपने अनुभाव के आधार पर उन्हें हिंदी का भी बेहतर ज्ञान दे रही हूं।