फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   hhb coch in chambal express

चंबल एक्सप्रेस में लगेंगे एचएचबी कोच

Thu, 10 Jan 2019 01:17 AM IST
jhansi Published by: देवेंद्र कुमार Updated Thu, 10 Jan 2019 01:17 AM IST
विज्ञापन
hhb coch in chambal express
railwar ncr jhansi - फोटो : demo
रेल मंडल के ग्वालियर से हावड़ा के बीच चलने वाली चंबल एक्सप्रेस में 12 जनवरी से आईसीएफ (इंट्रीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई) की जगह एलएचबी (लिंक होफमेन बुसच) कोच लगेंगे। ये कोच लगने के बाद दुर्घटना होने पर एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने या अंदर घुसने की समस्या खत्म हो जाएगी।
विज्ञापन

मंडल से संचालित ट्रेनों में अभी आईसीएफ कोच लगे हैं, जो अधिक स्पीड में होने वाली दुर्घटनाओं को सहने की क्षमता नहीं रखते हैं। रेलमंत्री के आदेश पर अब ऐसे कोचों के नए निर्माण पर रोक लगा दी गई है। अब सभी फैक्ट्रियों में एलएचबी कोच बनाए जा रहे हैं। शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस की तरह आईसीएफ के पुराने कोचों को आधुनिक कर उनकी कपलिंग को बदला जा रहा है। आईसीएफ डिब्बों की कपलिंग के बीच एक लोहे की रॉड डाल दी जाती है। एलएचबी की कपलिंग में डिब्बों के एक-दूसरे पर चढ़ने की संभावना कम होती है। मंडल में इन कोचों को लगाने की शुरूआत चंबल एक्सप्रेस से हो रही है। 12 जनवरी से चंबल एक्सप्रेस में एचएचबी के कोच लगकर चलेंगे। ट्रेन 20 कोचों की चलाई जाएगी, जिसमें सेकेंड एसी का एक, थर्ड एसी के तीन, स्लीपर के दस, सामान्य के चार और दो एसएलआर दिव्यांग कोच लगेंगे।
विज्ञापन

 जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि चंबल एक्सप्रेस के लिए नया रैक (कोच) उपलब्ध हो गया है।

एलएचबी और आईसीएफ कोच में अंतर
---------------------------------
- एलएचबी कोच में एंटी टेलीस्कोपिक सिस्टम होता है, जिसके कारण इसके डिब्बे आसानी से पटरी से नहीं उतर पाते हैं। इसके डिब्बे स्टेलनेस स्टील और एल्यूमिनियम के बने होते हैं, जबकि आईसीएफ कोच माइल्ड स्टील के बने होते हैं जो इसके झटके सहने की क्षमता को कम करते है और दुर्घटना का कारण बनते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

- एलएचबी कोच में डिस्क ब्रेक सिस्टम होता है, जिससे ट्रेन को जल्दी रोका जा सकता है। जबकि, आईसीएफ कोच में एयरब्रेक और थ्रेड सिस्टम होता है, जिससे चलती ट्रेन को रोकने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है।

- एलएचबी कोच का व्हील बेस आईसीएफ कोच के मुकाबले छोटा होता है, जो हाई स्पीड होने पर भी रेल को सुरक्षित रखता है। इससे दुर्घटना के चांस कम होते हैं।
- एलएचबी को हर पांच लाख किलोमीटर पर मेंटेनेंस की आवश्यकता होती है। आईसीएफ कोच को हर दो लाख से चार लाख किलोमीटर के बीच मेंटेनेंस पर आवश्यकता होती है।
- एलएचबी कोच में अगर आप बैठेंगे तो ट्रेन के चलने की आवाज आपको ज्यादा परेशान नहीं करेगी। इसका साउंड लेवल 60 डेसीबल का होता है, जबकि आईसीएफ कोच का साउंड लेबल 100 डेसीबल होता है।
- एलएचबी कोच की एवरेज स्पीड 160 से 200 किलोमीटर होती है, जबकि आईसीएफ कोच की स्पीड 70 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा की होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed