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झांसी में मां-बेटे की मौत: अपनों की चार मौतों से टूट गई थी हेमलता, 20 साल से नहीं निकली थी घर से बाहर
Mon, 23 Oct 2023 03:08 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: श्याम जी.
Updated Mon, 23 Oct 2023 03:08 PM IST
सार
पति, बेटा, बेटी और दामाद की मौत ने हेमलता को तोड़कर रख दिया था। हेमलता अपनों को खोने के बाद डिप्रेशन में चली गई थी। पड़ोसियों ने बताया कि बड़े बेटे रवि की मानसिक स्थिति भी कुछ दिनों से ठीक नहीं थी।
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घटनास्थल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झांसी में रविवार को घर के अंदर कमरे में मां और बेटे की लाश मिली थी। मामले की जांच हुई तो खुलासा हुआ कि पति, बेटा, बेटी और दामाद की मौत ने हेमलता को तोड़कर रख दिया था। कभी हर रिश्तेदारी और शादी-विवाह में जाने वाली हेमलता अपनों को खोने के बाद डिप्रेशन में चली गई थी। हालात ऐसे बने कि घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। कभी कभार ही वह अपने आंगन या गेट पर दिखती थी। मोहल्ले के किसी भी शख्स से मां-बेटे का कोई संबंध नहीं था। स्थिति यह थी कि जब मां-बेटे की मौत के बाद पुलिस पहुंची तो कोई इन दोनों का नाम तक नहीं बता सका।
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पुरानी तहसील के पीछे एक मोहल्ले में तीन छोटे-छोटे कमरों के एक मकान में हेमलता (70) अपने बेटे रवि (45) के साथ रहती थी। रवि अविवाहित था। पड़ोस में रहने वाले हरिओम, मालती देवी, शशि किरण से जब बात की गई तो उनका कहना था कि हेमलता के पति कृपाराम भी मोहल्ले में कम ही निकलते थे। उनको लोग सिर्फ बाबूजी के नाम से जानते थे। शादी के बाद से ही हेमलता यहां रहती थी। परिवार खुशहाल था, लेकिन एक के बाद एक परिवार के चार लोगों की मौत ने इस परिवार की सारी खुशियां छीन लीं।
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तकरीबन बीस साल पहले हेमलता के पति कृपाराम की हार्ट अटैक से मौत हुई। पति की मौत के कुछ महीने बाद छोटे बेटे भानू ने जहर खाकर जान दे दी। उसके तीन महीने बाद ही इंदौर में रहने वाली बेटी मीरा और दामाद की भी मौत हो गई। परिवार के लोगों की मौत से मिले दर्द की वजह से हेमलता ने खुद को घर के भीतर कैद कर लिया। दो दशकों से उन्होंने मोहल्ले के लोगों और रिश्तेदारों से रिश्ते-नाते खत्म कर रखे थे। मोहल्ले में चाहें कोई शादी हो या गमी यह दोनों शरीक नहीं होते थे।
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पड़ोसियों ने बताया कि बड़े बेटे रवि की मानसिक स्थिति भी कुछ दिनों से ठीक नहीं थी। अक्सर घर के अंदर से रवि की चीखने-चिल्लाने की आवाज आती थी। पति कृपाराम रेलवे में थे। लिहाजा उनकी पेंशन के सहारे दोनों का जीवन यापन होता था। मोहल्ले वालों ने बताया कि रवि को 19 अक्तूबर की दोपहर को देखा गया था। उसने एक बैग थाम रखा था। माना जा रहा है कि घर का सामान परचून की दुकान से लाया था। इसके बाद से वह भी कभी नजर नहीं आया। पुलिस का कहना है कि कानपुर में रहने वाली हेमलता की बहन से पुलिस ने संपर्क किया, लेकिन वह भी आने को राजी नहीं हुई। कहा कि उनके पास आने का कोई साधन नहीं है। लिहाजा वह कल ही आ सकेंगी।