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Jhansi: लू व हीट स्ट्रोक से रहें सावधान, थोड़ी सी चूक पहुंचा सकती है अस्पताल, प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी
Sat, 25 Apr 2026 09:08 AM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sat, 25 Apr 2026 09:08 AM IST
सार
सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर के निचली मंजिल पर रहें। गहरे रंग के भारी तथा तंग कपड़े न पहनें। अधिक प्रोटीन तथा बासी एवं संक्रमित खाद्य एवं पेय पदार्थों का प्रयोग न करें।
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लू का खतरा बढ़ा।
- फोटो : ANI
विस्तार
बेतहाशा गर्मी और दिन-ब-दिन तापमान में वृद्धि से लू का खतरा बढ़ गया है। जिला प्रशासन ने इसको लेकर दिशा-निर्देश जारी किया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व वरुण कुमार पांडेय ने बताया कि आने वाले दिनों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने का अनुमान है। लू शरीर की कार्य प्रणाली पर प्रभाव डालती है, जिससे मृत्यु भी हो सकती है। इसके प्रभाव को कम करने के लिए चेतावनी पर ध्यान दें।
कब लगती है लू
गर्मी में शरीर के द्रव्य सूखने लगते हैं। पानी, नमक की कमी होने पर लू का खतरा बढ़ जाता है। शराब की लत, हृदय रोग, पुरानी बीमारी, मोटापा, पार्किंसन रोग, अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह, मानसिक रोग की कुछ औषधियों का उपयोग करने पर लू लगने की आशंका अधिक रहती है।
ये हैं दिशा-निर्देश
जानवरों एवं बच्चों को कभी भी बंद व खड़ी गाड़ियों में अकेला न छोड़ें। दोपहर 12 से तीन बजे के मध्य सूर्य की रोशनी में जाने से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर के निचली मंजिल पर रहें। गहरे रंग के भारी तथा तंग कपड़े न पहनें। जब बाहर का तापमान अधिक हो तब श्रम न करें। अधिक प्रोटीन तथा बासी एवं संक्रमित खाद्य एवं पेय पदार्थों का प्रयोग न करें। अल्कोहल, चाय व काफी पीने से परहेज करें।
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हीट स्ट्रोक के लक्षण
गर्म लार, शुष्क त्वचा का होना।
पसीना आना व तेज नाड़ी चलना।
भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मितली, थकान और कमजोरी होना।
चक्कर आना, मूत्र न होना आदि।
बचने के उपाय
अधिक से अधिक पानी पियें।
हल्के रंग के सूती वस्त्र पहनें।
धूप के चश्मे, छाता, टोपी व चप्पल का प्रयोग करें।
खुले में कार्य करते हैं तो सिर, चेहरा, हाथ पैरों को कपड़े से ढंके रहें।
लू से प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर सूती गीले कपड़े से पोछें अथवा नहलाएं।
यात्रा करते समय पीने का पानी साथ ले जाएं।
ओआरएस, घर में बने हुए पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी (माठ), नीबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें।
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कब लगती है लू
गर्मी में शरीर के द्रव्य सूखने लगते हैं। पानी, नमक की कमी होने पर लू का खतरा बढ़ जाता है। शराब की लत, हृदय रोग, पुरानी बीमारी, मोटापा, पार्किंसन रोग, अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह, मानसिक रोग की कुछ औषधियों का उपयोग करने पर लू लगने की आशंका अधिक रहती है।
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ये हैं दिशा-निर्देश
जानवरों एवं बच्चों को कभी भी बंद व खड़ी गाड़ियों में अकेला न छोड़ें। दोपहर 12 से तीन बजे के मध्य सूर्य की रोशनी में जाने से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर के निचली मंजिल पर रहें। गहरे रंग के भारी तथा तंग कपड़े न पहनें। जब बाहर का तापमान अधिक हो तब श्रम न करें। अधिक प्रोटीन तथा बासी एवं संक्रमित खाद्य एवं पेय पदार्थों का प्रयोग न करें। अल्कोहल, चाय व काफी पीने से परहेज करें।
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हीट स्ट्रोक के लक्षण
गर्म लार, शुष्क त्वचा का होना।
पसीना आना व तेज नाड़ी चलना।
भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मितली, थकान और कमजोरी होना।
चक्कर आना, मूत्र न होना आदि।
बचने के उपाय
अधिक से अधिक पानी पियें।
हल्के रंग के सूती वस्त्र पहनें।
धूप के चश्मे, छाता, टोपी व चप्पल का प्रयोग करें।
खुले में कार्य करते हैं तो सिर, चेहरा, हाथ पैरों को कपड़े से ढंके रहें।
लू से प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर सूती गीले कपड़े से पोछें अथवा नहलाएं।
यात्रा करते समय पीने का पानी साथ ले जाएं।
ओआरएस, घर में बने हुए पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी (माठ), नीबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें।