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Jhansi News: दाल से लेकर हल्दी, लाल मिर्च तक में हानिकारक रंगों की मिलावट
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मिलावटखोर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। दाल से लेकर हल्दी और लाल मिर्च तक में हानिकारक रंग की मिलावट पाई गई है। 14 महीने में खाद्य पदार्थों के 64 फीसदी नमूने फेल हो गए हैं। इन पर 68.66 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
खाद्य विभाग की तीन टीमें रोजाना शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में जाकर खाद्य पदार्थों के नमूने लेती हैं। इन्हें जांच के लिए अलग-अलग जिलों की प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है। विभागीय आंकड़े देखें तो एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक झांसी के अलग-अलग इलाकों से खाद्य विभाग की टीम ने 626 नमूने लिए, इसमें 419 फेल हुए हैं। जबकि, एक अप्रैल 2025 से बीती 31 मई तक खाद्य विभाग ने 124 नमूने लिए, इनमें से 62 फेल हो गए हैं।
मौजूदा वित्तीय वर्ष की पिछले महीने आई रिपोर्ट में मसाले के 30 में 13, दूध के 24 में 11, पनीर के 12 में पांच नमूने फेल हो गए हैं। खास बात ये है कि मसूर की दाल में रंग की मिलावट पाई गई है, जो कि हानिकारक होती है। वहीं, लाल मिर्च और हल्दी में भी प्रतिबंधित रंग मिला है।
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लिवर और किडनी हो सकते डैमेज : डॉ. गुप्ता
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता के अनुसार लंबे समय तक हानिकारक रंग मिला खाद्य पदार्थ का सेवन करने से लिवर और किडनी पर सबसे ज्यादा असर हो सकता है। ये डैमेज भी हो सकते हैं। इसके अलावा अपच, गैस बनना, जी-मिचलाना आदि खतरा हो सकता है।
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केस-1
ब्रांडेड कंपनी के दूध में भी वसा की मिली कमी
ब्रांडेड कंपनी के दूध में भी वसा की कमी पाई गई है। बताया गया कि टोंड मिल्क में वसा 1.5 फीसदी होना चाहिए, जो मानक से कम मिला है। इस पर 80 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, कंपनी की ओर से अपील की गई है।
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केस-2
आइस्क्रीम में क्रीम कम, एक-एक लाख जुर्माना
खाद्य विभाग द्वारा लिए गए आइस्क्रीम के दो नमूनों में क्रीम की कमी पाई गई है। इस पर एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। बताया गया कि आइस्क्रीम में 10-10 फीसदी वसा और चीनी की मात्रा होनी चाहिए।
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हर महीने 80 से 100 नमूने टीम द्वारा लिए जा रहे हैं। इसके लिए तीन टीमों की तैनाती की गई है। इसके अलावा विभागीय वैन के जरिये भी लोग खाद्य पदार्थों की जांच करवा रहे हैं। - चितरंजन कुमार, जिला अभिहित अधिकारी।
झांसी। मिलावटखोर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। दाल से लेकर हल्दी और लाल मिर्च तक में हानिकारक रंग की मिलावट पाई गई है। 14 महीने में खाद्य पदार्थों के 64 फीसदी नमूने फेल हो गए हैं। इन पर 68.66 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
खाद्य विभाग की तीन टीमें रोजाना शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में जाकर खाद्य पदार्थों के नमूने लेती हैं। इन्हें जांच के लिए अलग-अलग जिलों की प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है। विभागीय आंकड़े देखें तो एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक झांसी के अलग-अलग इलाकों से खाद्य विभाग की टीम ने 626 नमूने लिए, इसमें 419 फेल हुए हैं। जबकि, एक अप्रैल 2025 से बीती 31 मई तक खाद्य विभाग ने 124 नमूने लिए, इनमें से 62 फेल हो गए हैं।
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मौजूदा वित्तीय वर्ष की पिछले महीने आई रिपोर्ट में मसाले के 30 में 13, दूध के 24 में 11, पनीर के 12 में पांच नमूने फेल हो गए हैं। खास बात ये है कि मसूर की दाल में रंग की मिलावट पाई गई है, जो कि हानिकारक होती है। वहीं, लाल मिर्च और हल्दी में भी प्रतिबंधित रंग मिला है।
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लिवर और किडनी हो सकते डैमेज : डॉ. गुप्ता
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता के अनुसार लंबे समय तक हानिकारक रंग मिला खाद्य पदार्थ का सेवन करने से लिवर और किडनी पर सबसे ज्यादा असर हो सकता है। ये डैमेज भी हो सकते हैं। इसके अलावा अपच, गैस बनना, जी-मिचलाना आदि खतरा हो सकता है।
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केस-1
ब्रांडेड कंपनी के दूध में भी वसा की मिली कमी
ब्रांडेड कंपनी के दूध में भी वसा की कमी पाई गई है। बताया गया कि टोंड मिल्क में वसा 1.5 फीसदी होना चाहिए, जो मानक से कम मिला है। इस पर 80 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, कंपनी की ओर से अपील की गई है।
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केस-2
आइस्क्रीम में क्रीम कम, एक-एक लाख जुर्माना
खाद्य विभाग द्वारा लिए गए आइस्क्रीम के दो नमूनों में क्रीम की कमी पाई गई है। इस पर एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। बताया गया कि आइस्क्रीम में 10-10 फीसदी वसा और चीनी की मात्रा होनी चाहिए।
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हर महीने 80 से 100 नमूने टीम द्वारा लिए जा रहे हैं। इसके लिए तीन टीमों की तैनाती की गई है। इसके अलावा विभागीय वैन के जरिये भी लोग खाद्य पदार्थों की जांच करवा रहे हैं। - चितरंजन कुमार, जिला अभिहित अधिकारी।