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ग्वालियर रोड फोरलेन निर्माण को ‘सुप्रीम’ आदेश का इंतजार

Wed, 27 Jun 2018 01:28 AM IST
amarujala
amarujala Updated Wed, 27 Jun 2018 01:28 AM IST
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gwaliyar road
court, jhansi news - फोटो : demo
ग्यारह साल पहले शुरू हुआ ग्वालियर रोड फोरलेन का निर्माण पिछले पांच वर्षों से बंद पड़ा हुआ है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) और कंस्ट्रक्शन कंपनी के बीच कानून की लड़ाई जारी है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो चुकी है। अब बस फैसला आने का इंतजार है। इसके बाद फोरलेन का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
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झांसी से ग्वालियर तक 82 किलोमीटर की फोरलेन सड़क के निर्माण का काम एनएचएआई ने ग्वालियर-झांसी एक्सप्रेस वे लिमिटेड (डीएस कंस्ट्रक्शन कंपनी) को दिया था। कंपनी ने जून 2007 में काम शुरू किया था। शुरुआत में काम तेज गति से हुआ। लेकिन, बाद में रफ्तार धीमी पड़ गई। इसे लेकर एनएचएआई और कंस्ट्रक्शन कंपनी के बीच रार शुरू हो गई। इसके बाद मार्च 2012 में कंपनी ने काम बंद कर दिया। दो साल तक सड़क खुर्दबुर्द अवस्था में पड़ी रही। आए दिन दुर्घटनाएं होने लगीं। इस समस्या को अमर उजाला में प्रमुखता से उठाए जाने के बाद हरकत में आए एनएचएआई ने 2014 में इसकी मरम्मत कर आवागमन लायक बनाया था। लेकिन, सड़क पर दुर्घटना का खतरा अब भी कम नहीं हुआ है। वाहनों को घुमावदार रास्तों से गुजरकर अपना सफर पूरा करना पड़ता है।
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एनएचएआई के परियोजना निदेशक मनोज कुमार जैन ने बताया कि कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा काम बंद किए जाने के बाद एनएचएआई की ओर से उसे टर्मिनेशन नोटिस दिया गया था। लेकिन, कंपनी को दिल्ली हाईकोर्ट से स्थगन आदेश मिल गया था। बाद में न्यायालय के आदेश पर ट्रिब्यूनल बनाया गया था। ट्रिब्यूनल ने बचा हुआ कार्य कराने में पुरानी कंपनी को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे। ट्रिब्यूनल के इस निर्देश को एनएचएआई ने न्यायालय में चुनौती दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। सुप्रीम कोर्ट में 23 मार्च 2018 को पूरे मामले की सुनवाई हो चुकी है। आदेश सुरक्षित रखा हुआ है। आदेश आते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि एनएचएआई ने काम कराने के लिए नई कंपनी का चयन भी कर लिया है। अब कोर्ट के आदेश पर सबकुछ निर्भर है। कोर्ट यदि पुरानी कंपनी से काम कराने को कहती है, तो काम शुरू हो जाएगा। नई कंपनी के लिए आदेश देने पर चयनित कंपनी तत्काल काम शुरू कर देगी।


तीन गुना बढ़ी परियोजना की लागत
ग्वालियर-झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग को 82 किलोमीटर तक फोरलेन में बदल जाना था। इस पर ग्यारह साल पहले 604 करोड़ रुपये की लागत आनी थी। लेकिन, समय पर काम पूरा न होने की वजह से निर्माण लागत कई गुना बढ़ गई है। 2012 में एनएचएआई ने इसका आकलन किया था, तब लागत राशि बढ़कर 1,104 करोड़ पर पहुंच गई थी। अब इसके लगभग पंद्रह सौ करोड़ पर पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है।
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