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आखिरकार गुरसराय नहर के आखिरी छोर तक पहुंचा पानी
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झांसी। पिछले कई दिनों से चर्चा का केंद्र बनी गुरसराय मुख्य नहर में आखिरकार टेल तक पानी पहुंच गया। लेकिन, नहर कोठी तक पानी पहुंचाने में अफसरों के पसीने छूट गए। शुक्रवार को बेतवा प्रखंड का पूरा अमला नहर में बह रहे पानी की निगरानी में जुटा रहा। हर सौ मीटर पर पानी पहुंचाने की सीधी जानकारी बेतवा भवन बैठे अफसरों तक भेजी जा रही थी।
पिछले काफी दिनों से यह नहर राजनीति का आखड़ा बनी हुई है। सत्तापक्ष के विधायक समेत सपा के पूर्व विधायक, निवर्तमान राज्यसभा सांसद, वर्तमान एमएलसी ने किसानों के साथ मिलकर इस मामले को गरमाया था। किसानों के मुताबिक रबी की बुवाई के लिए खेतों का पलेवा करने का समय आ गया लेकिन, नहर न चलने से बुवाई लगातार पिछड़ती जा रही है। इसी को लेकर पिछले करीब एक सप्ताह से गुरसराय के किसान आंदोलित हैं।
जानकारों का कहना है हर वर्ष 24 अक्तूबर के बाद ही नहर आरंभ होती है। सामान्य तौर पर टेल तक पानी पहुंचने में दस दिन लगता है। इस बार अक्तूबर माह में बारिश नहीं हुई। नहर के पूरी तरह सूखी होने एवं हेड के खेतों की सिंचाई में दोगुना समय लग जाने से टेल तक पानी पहुंचने में चार दिन का समय अतिरिक्त लग गया। चार दिन की देरी पर जमकर हंगामा हुआ।
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नहर के टेल तक शुक्रवार को पानी पहुंचा दिया गया। यह नहर प्रणाली की क्षमता 1900 हेक्टेयर में सिंचाई की है लेकिन, नहर की दाएं क्षेत्र में वाटर पंप लगाकर करीब 6000 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई होती है। औसतन करीब 27000 हेक्टेयर में सिंचाई होती है। नहर तयशुदा समय पर शुरू हो गई लेकिन, कम बारिश से पानी पहुंचाने में चार दिन का अतिरिक्त समय लगा। उमेश कुमार, अधिशासी अभियंता, बेतवा नहर
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पिछले काफी दिनों से यह नहर राजनीति का आखड़ा बनी हुई है। सत्तापक्ष के विधायक समेत सपा के पूर्व विधायक, निवर्तमान राज्यसभा सांसद, वर्तमान एमएलसी ने किसानों के साथ मिलकर इस मामले को गरमाया था। किसानों के मुताबिक रबी की बुवाई के लिए खेतों का पलेवा करने का समय आ गया लेकिन, नहर न चलने से बुवाई लगातार पिछड़ती जा रही है। इसी को लेकर पिछले करीब एक सप्ताह से गुरसराय के किसान आंदोलित हैं।
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जानकारों का कहना है हर वर्ष 24 अक्तूबर के बाद ही नहर आरंभ होती है। सामान्य तौर पर टेल तक पानी पहुंचने में दस दिन लगता है। इस बार अक्तूबर माह में बारिश नहीं हुई। नहर के पूरी तरह सूखी होने एवं हेड के खेतों की सिंचाई में दोगुना समय लग जाने से टेल तक पानी पहुंचने में चार दिन का समय अतिरिक्त लग गया। चार दिन की देरी पर जमकर हंगामा हुआ।
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नहर के टेल तक शुक्रवार को पानी पहुंचा दिया गया। यह नहर प्रणाली की क्षमता 1900 हेक्टेयर में सिंचाई की है लेकिन, नहर की दाएं क्षेत्र में वाटर पंप लगाकर करीब 6000 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई होती है। औसतन करीब 27000 हेक्टेयर में सिंचाई होती है। नहर तयशुदा समय पर शुरू हो गई लेकिन, कम बारिश से पानी पहुंचाने में चार दिन का अतिरिक्त समय लगा। उमेश कुमार, अधिशासी अभियंता, बेतवा नहर