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गुजरा साल, व्यवस्था नहीं हुई बहाल, होगा बुरा हाल

Sat, 03 Feb 2018 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 03 Feb 2018 12:29 AM IST
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gujra sal vebstay nhi hui bhal
nagar nigam jhansi news - फोटो : demo
महानगर के विस्तारित क्षेत्रों की एक चौथाई आबादी गर्मियों में एक-एक बूंद पानी को तरसती रही है। पिछले दो दशक से चुनाव में राजनीतिक दल पानी को मुद्दा तो हर बार बनाते हैं, लेकिन मतदान के बाद इस समस्या की सुध लेने वाला कोई नहीं रहता। 2017 में भी पानी का कोई इंतजाम नहीं हो सका। गर्मी सामने है और इस बार भी इन क्षेत्र के लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ेगा।
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शहर को नगर पालिका से नगर निगम बने 13 साल से अधिक समय बीत चुका है। महानगर का विस्तारित क्षेत्र धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है। नई-नई कॉलोनी और बस्तियां विकसित होती जा रही है। मगर, अब भी एक चौथाई बड़ी आबादी सरकारी पेयजल व्यवस्था पर निर्भर होने की बजाय हैंडपंप या अन्य स्रोतों पर ही आश्रित है। यह हम नहीं, बल्कि सरकारी आंकड़े कह रहे हैं। महानगर में एक लाख 12 हजार मकान हैं, जिनमें से सिर्फ चालीस हजार मकानों तक जल संस्थान की पाइप लाइन पहुंची है। गर्मियों में तो हालात बेकाबू हो जाते हैं। उस समय हैंडपंप भी कोढ़ में खाज का काम करते हैं। जल स्तर नीचे जाने से पानी नहीं निकलता।
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ऐसे में लोगों के पास जल संस्थान के टैंकरों से मुहैया कराये जाने वाले पानी के सिवा कोई विकल्प नहीं बचता है। जलापूर्ति की यह व्यवस्था पिछले तीन दशकों से एक जैसी ही है, जबकि, इस अवधि में आबादी में तीन गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। महानगर के 36 से अधिक मुहल्ले सिर्फ इसी वजह से जल संकट झेलने को विवश हैं। इस समस्या को हर बार चुनावी मुद्दा बनाया जाता है, मगर चुनाव होते ही समस्या संबंधित क्षेत्र के लोगों के बीच ही रह जाती है। 2017 भी विधानसभा और नगर निगम चुनाव के वादों के बीच गुजर गया। लोगों की समस्या तस के तस खड़ी है।
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यहां है किल्लत
करगुवां जी, पिछोर, गुमनावारा, महाराणा प्रताप नगर, वकील कालोनी, राजपूत कालोनी, वीरांगना नगर, मयूर विहार कालोनी, सराय, सिलवटगंज, डड़ियापुरा, मद्रासी कालोनी, सत्यम कालोनी, भगवंतपुरा, कोछाभांवर, सिमरधा, गड़ियागांव, वीरांगना नगर, पाल कालोनी, सिद्धेश्वर नगर, अलीगोल, मेवातीपुरा, बाहर उन्नाव गेट।

जल्द दूर होगी समस्या
पेजयल महायोजना के लिए बजट मंजूर हो चुका है। टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इस योजना के तैयार होते ही संबंधित क्षेत्रों की पेयजल समस्या दूर हो जाएगी।
रवि शर्मा, विधायक।

टैंकर चलाएं जाएंगे
पेयजल संकटग्रस्त क्षेत्रों में जब तक पाइप लाइन नहीं डल जाती हैं, तब तक पूर्व की तरह गर्मियों में टैंकरों का संचालन होगा। जरूरत के हिसाब से पंद्रह अप्रैल से पहले भी टैंकरों का संचालन शुरू हो सकता है।
एपी मिश्रा, सहायक अभियंता, जल संस्थान।

करगुवा में हैंडपंप सूखे, दूर से ला रहे पानी
झांसी।  मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में स्थित करगुवा समेत आसपास की सभी कॉलोनियों में अभी से जल संकट गहराना शुरू हो गया है। क्षेत्र के सभी हैंडपंप सूख गए हैं और लोगों को आधे से एक किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है।
महानगर में 29 से अधिक जल संकटग्रस्त क्षेत्र हैं, जिनमें गर्मी की शुरूआत होते ही हैंडपंपों से पानी निकलना बंद होने लगता है। अधिकांश निजी बोरिंग भी साथ छोड़ देती हैं। इसके बाद इक्का-दुक्का चालू सरकारी हैंडपंप ही लोगों का सहारा बनते हैं। संकटग्रस्त क्षेत्रों के अधिकांश हैंडपंप अभी से सूख गए हैं। इक्का-दुक्का हैंडपंप जिनमें पानी निकल रहा है लोग उनसे ही किसी तरह काम चला रहे हैं।  

फोटोआधा किमी दूर से लाना पड़ रहा पानी
मुझे अभी से आधा किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। क्षेत्र के सभी 20 हैंडपंप सूख गए हैं। एक व्यक्ति की बोरिंग चल रही है उसके यहां से पानी भरकर लाते हैं। वह भी अब पानी के बदले रुपयों की मांग करने लगे हैं।
इमरत सिंह, करगुवां।

पेट दर्द हुआ शुरू  
मुझे दूर से पानी लाते- लाते पेट में दर्द शुरू हो गया। मजबूरन, अब टैंकर से प्रतिदिन दो सौ लीटर का ड्रम सौ रुपये में भरवाना पड़ रहा है। एक ड्रम पानी रोज खर्च हो जाता है। ऐसी स्थिति में गर्मियों कैसे कटेगी? कुछ समझ नहीं आ रहा।
जितेंद्र परिहार, करगुवा।

हर जगह कर चुकी शिकायत
मैं पानी की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री, महापौर और जल संस्थान तक में ई मेल और हेल्प लाइन नंबरों पर शिकायत कर चुकी हूं। मुख्यमंत्री के यहां से जवाब भी आया कि अपने क्षेत्र के महापौर से संपर्क करें। संपर्क भी किया, लेकिन कहीं कुछ नहीं हुआ।

आरती ठाकुर, करगुवा।

नहीं आए पार्षद
नगर निगम के चुनाव में हर बार पार्षद प्रत्याशी पानी की समस्या को दूर करने की बात करता है। मगर, जीतने के बाद कोई उनकी परेशानी देखने तक नहीं आता। इस बार भी यहीं हाल। मेरा, पूरा परिवार पानी भरने को लेकर परेशान रहता है।
दिनेश कुमार, करगुवा।
 
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