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दंपति की मौत के बाद हरकत में आई जीआरपी
ब्यूरो
Updated Wed, 02 Mar 2016 01:20 AM IST
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झांसी। जीआरपी द्वारा पौने तीन माह पूर्व मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए गए दंपति की शिनाख्त तो नहीं हो सकी। मगर जीआरपी की शिथिलता के कारण उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भी तीन दिन का इंतजार करना पड़ा। मेमो की सही तिथि का पता करने के लिए जीआरपी मंगलवार को डिप्टी एसएस वाणिज्य के समक्ष रिकार्ड खंगालती रही।
मालूम हो कि बारह दिसंबर को करीब 55 वर्षीय महिला व 60 वर्षीय पुरुष रेलवे स्टेशन पर अचेतावस्था में मिले थे। जीआरपी के एक सिपाही ने दोनों को मेडिकल कालेज में भर्ती कराया, जहां दोपहर के समय वह कुछ चेतना में आए। लापरवाह जीआरपी ने दोनों को मेडिकल कालेज में भर्ती कराकर कर्तव्य की इतिश्री कर ली थी।
इसके बाद जीआरपी ने उनकी जानकारी नहीं ली। वहीं, दूसरी तरफ अपनों का साया नहीं होने से वृद्ध दंपति मेडिकल कालेज में पड़ा रहा, जिससे कुछ समय बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी। विगत 27 फरवरी की सुबह दोनों ने दम तोड़ दिया। जीआरपी को पोस्टमार्टम कराने के लिए जब जानकारी भेजी गई, तब उन्होंने कहा कि इस तिथि में उन्हें भर्ती कराने का कोई मेमो दिया ही नहीं गया।
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तीन दिन तक पोस्टमार्टम हाउस में शव पड़े होने के बाद जब जीआरपी पर दबाव डाला गया, तब सोमवार को जीआरपी हरकत में आई। जीआरपी ने डिप्टी एसएस वाणिज्य के पास पहुंचकर जब रिकार्ड खंगाला तो पता चला कि मेमो 12 दिसंबर का था, न कि 27 दिसंबर का। इसके बाद जीआरपी ने शवों का पोस्टमार्टम कराया। कारण कुछ भी रहा हो, मगर जीआरपी तीन महीने की अवधि में अगर उक्त वृद्धों से संपर्क करने का प्रयास करती तो शायद उनकी शिनाख्त हो सकती थी।
इस संबंध में जीआरपी थाना प्रभारी रवि चंद्र मिश्र ने बताया कि मृतकों के शरीर पर चोटों के निशान थे, जिससे वह बात करने की स्थिति में नहीं थे। मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के बाद से ही वह कोमा में चल रहे थे। बीच में उनसे संपर्क किया गया, लेकिन वह बेसुध ही बने रहे।
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मालूम हो कि बारह दिसंबर को करीब 55 वर्षीय महिला व 60 वर्षीय पुरुष रेलवे स्टेशन पर अचेतावस्था में मिले थे। जीआरपी के एक सिपाही ने दोनों को मेडिकल कालेज में भर्ती कराया, जहां दोपहर के समय वह कुछ चेतना में आए। लापरवाह जीआरपी ने दोनों को मेडिकल कालेज में भर्ती कराकर कर्तव्य की इतिश्री कर ली थी।
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इसके बाद जीआरपी ने उनकी जानकारी नहीं ली। वहीं, दूसरी तरफ अपनों का साया नहीं होने से वृद्ध दंपति मेडिकल कालेज में पड़ा रहा, जिससे कुछ समय बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी। विगत 27 फरवरी की सुबह दोनों ने दम तोड़ दिया। जीआरपी को पोस्टमार्टम कराने के लिए जब जानकारी भेजी गई, तब उन्होंने कहा कि इस तिथि में उन्हें भर्ती कराने का कोई मेमो दिया ही नहीं गया।
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तीन दिन तक पोस्टमार्टम हाउस में शव पड़े होने के बाद जब जीआरपी पर दबाव डाला गया, तब सोमवार को जीआरपी हरकत में आई। जीआरपी ने डिप्टी एसएस वाणिज्य के पास पहुंचकर जब रिकार्ड खंगाला तो पता चला कि मेमो 12 दिसंबर का था, न कि 27 दिसंबर का। इसके बाद जीआरपी ने शवों का पोस्टमार्टम कराया। कारण कुछ भी रहा हो, मगर जीआरपी तीन महीने की अवधि में अगर उक्त वृद्धों से संपर्क करने का प्रयास करती तो शायद उनकी शिनाख्त हो सकती थी।
इस संबंध में जीआरपी थाना प्रभारी रवि चंद्र मिश्र ने बताया कि मृतकों के शरीर पर चोटों के निशान थे, जिससे वह बात करने की स्थिति में नहीं थे। मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के बाद से ही वह कोमा में चल रहे थे। बीच में उनसे संपर्क किया गया, लेकिन वह बेसुध ही बने रहे।