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खुली बैठकों में तय होगा पंचायतों के विकास का खाका
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झांसी। गांव की खुली बैठक में अब ग्राम पंचायतों के विकास का खाका तैयार होगा। गांधी जयंती के अवसर पर आज से इसकी शुरुआत हुई। 31 जनवरी तक जनपद की सभी 496 ग्राम सभाओं को खुली बैठक करके अगले वित्तीय वर्ष 20-21 के लिए विकास योजनाएं तैयार करनी होंगी। पोर्टल पर अपलोड होने वाली योजनाओं को ही वित्तीय एवं प्रशासनिक मंजूरी मिलेगी।
ग्राम पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार करने में सर्वाधिक विवाद सामने आता है। अकसर ग्राम प्रधान एवं सचिव पर मिलीभगत करके मनमाने तरीके से योजनाएं तैयार करने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे भी तमाम मामले आए जिनमें कार्य हुए बिना भुगतान हो गया। इन्हीं गड़बड़ियों को खत्म करने एवं ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने की खातिर केंद्र सरकार ने जीपीडीपी की शुरुआत की। इसके जरिए ग्राम पंचायतों को खुली बैठक बुलाना जरूरी कर दिया गया। अब इन्हीं बैठकों में साल भर में कराए जाने वाले कार्य तय होंगे हालांकि बाद में कुछ कार्य जोड़े भी जा सकेंगे।
बैठक में तय योजनाएं ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड होंगी। अपलोड होने वाली योजनाओं को ही वित्तीय एवं प्रशासनिक मंजूरी मिल सकेगी। अक्तूबर से जनवरी तक ग्राम पंचायतों को योजनाएं तैयार करने का मौका रहेगा। इसके पहले मिशन अंत्योदय के जरिए प्रत्येक पंचायत की रैंकिंग भी तय की जानी है। जो पंचायत इसमें पीछे होंगी वहां इससे संबंधित कार्य कराए जाएंगे। डीपीआरओ जगदीश राम का कहना है कि इस संबंध में समयसीमा के मुताबिक अभियान चलाया जाएगा।
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अभियान में अफसरों को दिलचस्पी नहीं
अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक जीपीडीपी को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों के बीच इसका प्रचार-प्रसार भी किया जाना है। जिससे ग्रामीण इसमें जुट सकें। शासनोदश के मुताबिक पंचायती राज विभाग को 15 सितंबर तक प्रचार-प्रसार अभियान शुरू कर देना था लेकिन, अफसरों के दिलचस्पी न लेने से ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान नहीं चलाया जा सका। सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण का काम भी तीस सितंबर तक पूरा होना था लेकिन, वह भी पूरा नहीं हो सका है।
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ग्राम पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार करने में सर्वाधिक विवाद सामने आता है। अकसर ग्राम प्रधान एवं सचिव पर मिलीभगत करके मनमाने तरीके से योजनाएं तैयार करने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे भी तमाम मामले आए जिनमें कार्य हुए बिना भुगतान हो गया। इन्हीं गड़बड़ियों को खत्म करने एवं ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने की खातिर केंद्र सरकार ने जीपीडीपी की शुरुआत की। इसके जरिए ग्राम पंचायतों को खुली बैठक बुलाना जरूरी कर दिया गया। अब इन्हीं बैठकों में साल भर में कराए जाने वाले कार्य तय होंगे हालांकि बाद में कुछ कार्य जोड़े भी जा सकेंगे।
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बैठक में तय योजनाएं ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड होंगी। अपलोड होने वाली योजनाओं को ही वित्तीय एवं प्रशासनिक मंजूरी मिल सकेगी। अक्तूबर से जनवरी तक ग्राम पंचायतों को योजनाएं तैयार करने का मौका रहेगा। इसके पहले मिशन अंत्योदय के जरिए प्रत्येक पंचायत की रैंकिंग भी तय की जानी है। जो पंचायत इसमें पीछे होंगी वहां इससे संबंधित कार्य कराए जाएंगे। डीपीआरओ जगदीश राम का कहना है कि इस संबंध में समयसीमा के मुताबिक अभियान चलाया जाएगा।
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अभियान में अफसरों को दिलचस्पी नहीं
अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक जीपीडीपी को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों के बीच इसका प्रचार-प्रसार भी किया जाना है। जिससे ग्रामीण इसमें जुट सकें। शासनोदश के मुताबिक पंचायती राज विभाग को 15 सितंबर तक प्रचार-प्रसार अभियान शुरू कर देना था लेकिन, अफसरों के दिलचस्पी न लेने से ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान नहीं चलाया जा सका। सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण का काम भी तीस सितंबर तक पूरा होना था लेकिन, वह भी पूरा नहीं हो सका है।