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भगवान कृष्ण जन्मोत्सव: आ रही मधुर बेला, मटकी फोड़ने को बेताब हैं गोपाला

Fri, 23 Aug 2019 04:28 AM IST
झांसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Fri, 23 Aug 2019 04:28 AM IST
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Gopalas eager for 93 years old Matki fod competition
कृष्ण जन्माष्टमी - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की खुशी में देश के कोने-कोने में दही मटकी फोड़ी जाती हैं। यह परंपरा झांसी के सदर बाजार में भी पिछले 93 वें सालों से लगातार निभाई जा रही है। इसे बुंदेलखंड के सबसे पुराने आयोजनों में माना जाता है। इस साल भी 26 अगस्त एकादशी को सदर बाजार में गोपाला दही मटकी फोड़ेंगे। साथ ही लोगों को मयूर नृत्य और वृंदावन की रासलीला भी देखने को मिलेगी।

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श्रीकृष्ण जन्म भूमि मथुरा सहित देश के कई छोटे - बडे़ महानगरों में जन्माष्टमी के बाद दही मटकी फोड़ने के आयोजन शुरू हो जाते हैं। बुंदेलखंड में भी जगह-जगह यह आयोजन होते हैं। इनमें सदर बाजार स्थित बलदाऊ मंदिर के सामने पिछले 93 सालों से दही मटकी फोड़ने का क्रम लगातार जारी है।
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आयोजक सदस्य एवं मंदिर के पुजारी हृदेश शुक्ला के अनुसार इसकी शुरूआत अंग्रेजों की पाश्चात्य संस्कृति से बचने के लिए हुई थी, ताकि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के लोग अपनी भारतीय धार्मिक संस्कृति से जुडे़ रहें। आयोजक सदस्य कैलाश अग्रवाल के अनुसार मटकी फोड़ने की तिथि हर साल एक ही निर्धारित रहती है। जन्माष्टमी के ठीक बाद एकादशी पर फोड़ी जाती है। ऐसे में युवा ग्वालों की टोलियां व दर्शक निर्धारित तारीख पर आ जाते हैं। इस दौरान लोगों को मयूर नृत्य और वृंदावन की रासलीला देखने के लिए मिलेगी।
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सेना के जवानों ने फोड़ी थी मटकी

हर साल लगभग 25 फीट ऊंची मटकी लटकाई जाती है। आवश्यकता पड़ने पर इसे तीन से चार फीट झुकाया भी जाता है। हृदेश शुक्ला के अनुसार लगभग 15 वर्ष पहले कोई पार्टी मटकी नहीं फोड़ पाई थी। इसके बाद सेना  के जवानों ने दूसरे दिन मटकी फोड़ी थी।  मटकी में दूध, दही, केसर एवं नकद इनाम रखा जाता है। इनाम 11 हजार से लेकर 21 हजार रुपये तक रहता है। कार्यक्रम से ठीक पहले मंदिर में विराजमान भगवान बलराम, भगवान कृष्ण की विधिवत पूजा की जाती है। 

दो माह पहले से शुरू हो जाता है अभ्यास

दही मटकी तोड़ने के लिए ग्वाले बेहद उत्साहित हैं। उनका कहना है कि यह हमारी प्राचीन संस्कृति का प्रमुख हिस्सा है। कुम्हर्रा के संजय यादव ने बताया कि पहली मटकी रामराजा सरकार ओरछा के परिसर में तोड़ने के लिए जाते हैं। यह आयोजन जन्माष्टमी के ठीक अगले दिन होता है। इसके बाद सभी ग्वालों की टोलियां दही मटकी तोड़ने के लिए निकल पड़ते हैं। मटकी तोड़ने वाली टीम में 25 सदस्यों का होना आवश्यक रहता है। क्योंकि 4 घेरे बनाने पड़ते हैं।

अभ्यास लगभग दो माह पहले से शुरू हो जाता है। शुद्ध खान पान पर ज्यादा जोर दिया जाता है। उनके अनुसार दही मटकी फोड़ने के बाद जो आय होती है, वह हम लोग मंदिरों में लगाते हैं। सदर बाजार में वह वर्ष 11 से अब तक कई बार मटकी तोड़ते आ रहे हैं। सूरज सिंह ग्वाला ने बताया कि मटकी फोड़ने वाली टीम में 14 से 35 वर्ष तक के युवा शामिल होते हैं। हम लोग भगवान कृष्ण के वंशज हैं। ऐसे में पीढ़ियों से मटकी तोड़ने की परंपरा निभा रहे हैं।

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