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अगरबत्ती निर्माण की दी जानकारी, मिला काम का प्रस्ताव
Fri, 01 Feb 2019 02:02 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Fri, 01 Feb 2019 02:02 AM IST
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aprajita 100 miliun smiles
- फोटो : demo
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अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत बृहस्पतिवार को ‘रोजगार चौपाल’ आयोजित की गई, जिसमें सहारिया समुदाय की जरूरतमंद महिलाओं को अगरबत्ती निर्माण की जानकारी दी गई, साथ ही एक फैक्ट्री में प्रशिक्षण और काम के लिए आमंत्रित भी किया गया। बस्ती की पांच महिलाओं ने इसके लिए सहमति भी जताई।
ग्वालियर - कानपुर फोरलेन बाईपास से सटी सहारिया बस्ती में आयोजित चौपाल में ट्रेनर राम और प्राची गुप्ता ने बताया कि अगरबत्ती मशीन के जरिये तैयार की जाती है। लेकिन, मशीन में सींक डालने का काम कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। बाद में अगरबत्ती को सुगंधित करने और पैकिंग करने के लिए लोगों की आवश्यकता पड़ती है।
महिलाएं इस काम में ज्यादा होती हैं। यह बेहद आसान है। एक सप्ताह के प्रशिक्षण के बाद काम शुरू किया जा सकता है। एक महीने में काम की गति तेज होने पर आसानी से रोजाना लगभग दो सौ रुपये कमाए जा सकते हैं। इसमें काम की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी ये काम शुरू करना चाहता है, उसके लिए तत्काल काम की व्यवस्था हो जाएगी। बस्ती की पांच महिलाएं इसके लिए तैयार हो गईं। इनमें संजना, गुंजा, गीता, रामवती व खुशबू शामिल हैं। इस दौरान समर्पण सेवा समिति की अध्यक्ष अपर्णा दुबे ने भी महिलाओं और युवतियों को काम के लिए प्रेरित किया।
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काम करना तो चाहते हैं, पर मिलता नहीं है। कार्यक्रम में अगरबत्ती निर्माण के बारे में बताया गया और काम करने का मौका भी दिया गया। काम जरूर करेंगे। हुनर भी आएगा और पैसा भी।
- संजना, बस्ती की निवासी
इस प्रकार के छोटे-छोटे आयोजनों के माध्यम से बड़े-बड़े काम किए जा सकते हैं। महिला सशक्तीकरण की दिशा में अमर उजाला की अपराजिता मुहिम आने वाले दिनों में मील का पत्थर साबित होगी।
- सीमा सोलंकी, समर्पण सेवा समिति
संस्था की ओर से बस्ती में कई बार कपड़े और भोजन सामग्री बांट चुके हैं। लेकिन, ये स्थायी सहायता नहीं है। उन्हें हुनरमंद बनाने और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना बड़ा काम है।
- सुधा राय, जेसीआई वीरांगना
न काम की कमी है और न ही काम करने वालों की, लेकिन ये दोनों एक साथ मिल नहीं पाते हैं। अपराजिता मुहिम के तहत हुई इस कार्यशाला में दोनों को एक साथ लाने का काम किया गया है।
- आराधना आनंदानी, समर्पण सेवा समिति
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ग्वालियर - कानपुर फोरलेन बाईपास से सटी सहारिया बस्ती में आयोजित चौपाल में ट्रेनर राम और प्राची गुप्ता ने बताया कि अगरबत्ती मशीन के जरिये तैयार की जाती है। लेकिन, मशीन में सींक डालने का काम कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। बाद में अगरबत्ती को सुगंधित करने और पैकिंग करने के लिए लोगों की आवश्यकता पड़ती है।
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महिलाएं इस काम में ज्यादा होती हैं। यह बेहद आसान है। एक सप्ताह के प्रशिक्षण के बाद काम शुरू किया जा सकता है। एक महीने में काम की गति तेज होने पर आसानी से रोजाना लगभग दो सौ रुपये कमाए जा सकते हैं। इसमें काम की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी ये काम शुरू करना चाहता है, उसके लिए तत्काल काम की व्यवस्था हो जाएगी। बस्ती की पांच महिलाएं इसके लिए तैयार हो गईं। इनमें संजना, गुंजा, गीता, रामवती व खुशबू शामिल हैं। इस दौरान समर्पण सेवा समिति की अध्यक्ष अपर्णा दुबे ने भी महिलाओं और युवतियों को काम के लिए प्रेरित किया।
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काम करना तो चाहते हैं, पर मिलता नहीं है। कार्यक्रम में अगरबत्ती निर्माण के बारे में बताया गया और काम करने का मौका भी दिया गया। काम जरूर करेंगे। हुनर भी आएगा और पैसा भी।
- संजना, बस्ती की निवासी
इस प्रकार के छोटे-छोटे आयोजनों के माध्यम से बड़े-बड़े काम किए जा सकते हैं। महिला सशक्तीकरण की दिशा में अमर उजाला की अपराजिता मुहिम आने वाले दिनों में मील का पत्थर साबित होगी।
- सीमा सोलंकी, समर्पण सेवा समिति
संस्था की ओर से बस्ती में कई बार कपड़े और भोजन सामग्री बांट चुके हैं। लेकिन, ये स्थायी सहायता नहीं है। उन्हें हुनरमंद बनाने और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना बड़ा काम है।
- सुधा राय, जेसीआई वीरांगना
न काम की कमी है और न ही काम करने वालों की, लेकिन ये दोनों एक साथ मिल नहीं पाते हैं। अपराजिता मुहिम के तहत हुई इस कार्यशाला में दोनों को एक साथ लाने का काम किया गया है।
- आराधना आनंदानी, समर्पण सेवा समिति