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आसान नहीं होगा मीट लाइसेंस बनवा पाना
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Apr 2017 12:12 AM IST
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मांस की दुकान
- फोटो : demo
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मांस का कारोबार करने के लिए अब लाइसेंस बनवाना आसान नहीं होगा। मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को मांग कारोबारी की अनुमति नहीं दी जाएगी। मांस की दुकान पर नाबालिग काम नहीं कर पाएंगे। मछली बेचने वालों को तय स्थान पर ही दुकान लगानी होगी। नई नियमावली के मुताबिक ही अब लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
जांच में पता लगा है कि तो लगा कि मांस बिक्रेताओं ने पिछले पांच साल न तो लाइसेंस रिन्यू नहीं कराया और न ही किराया जमा किया है। तय हुआ है कि अब किराया जमा होने के बाद ही लाइसेंस रिन्यू किया जाएगा। जल्द ही अभियान चलेगा। मछली बाजार के लिए पहूंज नदी के किनारे का क्षेत्र देखा गया है, लेकिन वहां पर बैठने लायक जगह तैयार कराने में समय लगेगा। इसके अलावा गल्ला मंडी के पास बनी सब्जी मार्केट को भी दूसरे विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि, इस मार्केट को बने पांच साल से ज्यादा समय हो गया है और अब तक यहां कोई भी सब्जी वाला नहीं पहुंचा है। चबूतरों पर अवैध कब्जा हो गया है। पशु चिकित्साधिकारी आरके निरंजन ने बताया कि अब नई नियमावली के मुताबिक काम होगा।
ये हैं नियम
-धार्मिक स्थल की 50 मीटर परिधि में मांस दुकानें नहीं खुलेगी।
-सब्जी की दुकानों के आसपास मांस नहीं बेचा जा सकेगा।
-दुकान के अंदर किसी भी सूरत में जानवर नहीं काटे जाएंगे।
- दुकान मालिक और कर्मचारी को स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लेना होगा।
-नगर निगम एनओसी देगा और उसके बाद खाद्य विभाग लाइसेंस देगा।
- मांस की गुणवत्ता पशु चिकित्सक से प्रमाणित करानी होगी।
- बीमार और गर्भवती जानवरों का मांस नहीं बेचा जा सकेगा।
- प्रत्येक छह महीने में दुकान में सफेदी कराना अनिवार्य होगा।
- डस्टबिन रखना होगा, मांस का कचरा जमीन में दफनाना होगा।
- मांस को फ्रिज के अंदर रखकर बेचना होगा।
- जिस बूचड़खाने से मांस खरीदा जाए, उसका रिकार्ड रखना होगा।
- प्रत्येक दुकानदार को गर्म पानी के लिए गीजर रखना होगा।
- दुकान के बाहर पर्दे और गहरे रंग के कांच लगाने होंगे।
- दुकान पक्की बनानी होगी, तीन गुणा तीन का प्लेटफार्म जरूरी।
- मानक पूरे न होने पर लाइसेंस रद कर दिया जाएगा।
- लोहे के नहीं, स्टील के उपकरण इस्तेमाल करने होंगे।
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जांच में पता लगा है कि तो लगा कि मांस बिक्रेताओं ने पिछले पांच साल न तो लाइसेंस रिन्यू नहीं कराया और न ही किराया जमा किया है। तय हुआ है कि अब किराया जमा होने के बाद ही लाइसेंस रिन्यू किया जाएगा। जल्द ही अभियान चलेगा। मछली बाजार के लिए पहूंज नदी के किनारे का क्षेत्र देखा गया है, लेकिन वहां पर बैठने लायक जगह तैयार कराने में समय लगेगा। इसके अलावा गल्ला मंडी के पास बनी सब्जी मार्केट को भी दूसरे विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि, इस मार्केट को बने पांच साल से ज्यादा समय हो गया है और अब तक यहां कोई भी सब्जी वाला नहीं पहुंचा है। चबूतरों पर अवैध कब्जा हो गया है। पशु चिकित्साधिकारी आरके निरंजन ने बताया कि अब नई नियमावली के मुताबिक काम होगा।
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ये हैं नियम
-धार्मिक स्थल की 50 मीटर परिधि में मांस दुकानें नहीं खुलेगी।
-सब्जी की दुकानों के आसपास मांस नहीं बेचा जा सकेगा।
-दुकान के अंदर किसी भी सूरत में जानवर नहीं काटे जाएंगे।
- दुकान मालिक और कर्मचारी को स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लेना होगा।
-नगर निगम एनओसी देगा और उसके बाद खाद्य विभाग लाइसेंस देगा।
- मांस की गुणवत्ता पशु चिकित्सक से प्रमाणित करानी होगी।
- बीमार और गर्भवती जानवरों का मांस नहीं बेचा जा सकेगा।
- प्रत्येक छह महीने में दुकान में सफेदी कराना अनिवार्य होगा।
- डस्टबिन रखना होगा, मांस का कचरा जमीन में दफनाना होगा।
- मांस को फ्रिज के अंदर रखकर बेचना होगा।
- जिस बूचड़खाने से मांस खरीदा जाए, उसका रिकार्ड रखना होगा।
- प्रत्येक दुकानदार को गर्म पानी के लिए गीजर रखना होगा।
- दुकान के बाहर पर्दे और गहरे रंग के कांच लगाने होंगे।
- दुकान पक्की बनानी होगी, तीन गुणा तीन का प्लेटफार्म जरूरी।
- मानक पूरे न होने पर लाइसेंस रद कर दिया जाएगा।
- लोहे के नहीं, स्टील के उपकरण इस्तेमाल करने होंगे।