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394 किलोमीटर तक इंजन में फंसे कटे सिर के साथ दौड़ती रही गतिमान एक्सप्रेस

Sun, 10 Jul 2022 12:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 10 Jul 2022 12:48 AM IST
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Gatimaan Express running for 394 kms with severed head stuck in engine
झांसी। हजरत निजामुद्दीन से झांसी आ रही गतिमान एक्सप्रेस (12050) के इंजन में एक युवक का धड़ से कटा सिर फंसा रहा। इसके बावजूद गाड़ी करीब 394 किलोमीटर तक का सफर पूरा करके झांसी आ गई। यहां जब इंजन को चेक किया गया तो पता चला। मौके पर रेल अफसर और जीआरपी-आरपीएफ भी पहुंच गई। जांच-पड़ताल में मालूम चला कि तुगलकाबाद से गाड़ी के आगे बढ़ने पर एक युवक हादसे का शिकार हुआ था। युवक की अभी तक शिनाख्त नहीं हो सकी है।
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दिल्ली में निजामुद्दीन स्टेशन से सुबह 8.10 मिनट पर लोको पायलट पंकज गर्ग गतिमान एक्सप्रेस लेकर रवाना हुए थे। इसके बाद गाड़ी 9.59 मिनट पर आगरा स्टेशन पहुंची। यहां से लोको पायलट की ड्यूटी बदल गई। यहां से गाड़ी ग्वालियर होते हुए दोपहर करीब 12.27 मिनट पर झांसी पहुंची। गाड़ी के ठहराव के बाद चेकिंग स्टॉफ इंजन की जांच में जुटा था, उसी समय कैटिल गार्ड से करीब डेढ़ फीट ऊंचाई पर युवक का धड़ से अलग सिर फंसा दिखा। नीचे कैटिल गार्ड में खून के निशान थे। सिर के फंसे होने की सूचना से स्टेशन पर हड़कंप मच गया। तुरंत मौके पर स्टेशन प्रबंधक समेत जीआरपी इंस्पेक्टर पंकज पांडेय, आरपीएफ इंस्पेक्टर रविंद्र कौशिक फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। करीब पैंतालीस मिनट की मशक्कत के बाद सिर को इंजन से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। जीआरपी इंस्पेक्टर पंकज पांडेय के मुताबिक दोनों लोको पायलट से पूछताछ के बाद मालूम चला है कि गाड़ी जैसे ही निजामुद्दीन स्टेशन से आगे तुगलकाबाद पहुंची, उसी दौरान घटना हो गई। शव की शिनाख्त नहीं हो सकी है। शिनाख्त कराने की कोशिश की जा रही है।
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हर स्टेशन पर इंजन चेक करने का प्रावधान, फिर भी हो गई चूक
रेल सफर को सुरक्षित रखने के लिए हर स्टेशन पर गाड़ी के पहुंचते ही उसको रेलवे स्टॉफ की ओर से चेक किया जाता है। इसके लिए स्टेशन पर अलग से तकनीकी स्टॉफ को तैनात किया जाता है। इसके अलावा इंजन की विशेष चेकिंग होती है। इसमें प्रेशर, ब्रेेक, ओएचई वायर समेत पूरे इंजन का बारीकी से परीक्षण किया जाता है। हर स्टेशन पर यह काम होता है। गतिमान एक्सप्रेस आगरा और ग्वालियर स्टेशन पर ठहरी लेकिन, कहीं भी ऐसी कोई सूचना मेमो में दर्ज नहीं हुई। इसे गंभीर चूक माना जा रहा है। इस मामले में कर्मचारियों पर भी गाज गिरेगी।
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लोको पायलट ने भी नहीं दी कंट्रोल को सूचना
नियमों के मुताबिक हादसा होने के बाद लोको पायलट को कंट्रोल को इसकी सूचना देनी होती है लेकिन, हजरत निजामुद्दीन से गाड़ी लेकर आ रहे लोको पायलट ने इसकी सूचना कंट्रोल रूम को नहीं दी। आगरा पहुंचने के बाद लोको स्टॉफ बदला तब उसे भी इसके बारे में नहीं मालूम चला। रेल अफसरों का कहना है कि निजामुउद्दीन से गाड़ी लेकर आने वाले लोको पायलट ने हादसे की बात बयान में दर्ज कराई है लेकिन, पहले यह बात न बताने को गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।

दोनों लोको पायलट ने अपने बयान दर्ज कराए हैं। शरीर का एक हिस्सा इंजन में होने से कुछ देर तक इंजन प्लेटफार्म पर रहा लेकिन, इस वजह से कोई भी ट्रेन प्रभावित नहीं हुई।
नीरज भटनागर
स्टेशन प्रबंधक
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