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महानगर में मिलावटी शराब बनाने वाला गिरोह पकड़ा
Tue, 04 Jun 2019 01:48 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Tue, 04 Jun 2019 01:48 AM IST
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- फोटो : amarujala
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झांसी। स्वॉट व कोतवाली पुलिस ने महानगर में मिलावटी शराब बनाने वाले गिरोह का पर्र्दाफाश कर तीन लोगों को पकड़ लिया, जबकि चार भाग निकले। मौके से पुलिस ने भारी मात्रा में अवैध शराब बनाने का जखीरा बरामद किया है, जिसमें 77 हजार फर्जी बार कोड बरामद हुए हैं। गिरोह की आबकारी विभाग के इन बार कोडों में सेंध लगाकर प्रदेश के अन्य जिलों में भी नकली शराब बनाकर बेचने की तैयारी थी।
सोमवार को स्वॉट प्रभारी विजय पांडेय और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह को सूचना मिली कि नारायण बाग तिराहा के पास श्मशान घाट वाले रास्ते पर एक व्यक्ति अवैैध शराब के खाली क्वार्टर लेकर जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने पहुंचकर थाना सदर बाजार के सिमराहा निवासी तारा राय को दबोच लिया। पूछताछ करने पर उसने बताया कि यह क्वार्टर वह बड़ागांव गेट बाहर ले जा रहा है। वहां वह व उसके साथी मिलावटी शराब बनाने का काम करते हैं। उसके साथी मकान में मौजूद हैं।
इस पर पुलिस ने बड़ागांव गेट बाहर मैरी तिराहा के पास एक मकान मेें छापा मारा। वहां से बड़ागांव गेट बाहर मैरी तिराहा निवासी मनोज कुमार कुशवाहा और तालपुरा निवासी रवि राय को पकड़ लिया गया, चार बदमाश मौके से भागने में सफल हो गए। पुलिस ने मौके से 2 लाख 80 हजार अलग अलग कंपनियोें के ढक्कन, 774 देसी शराब के खाली क्वार्टर, बीस हजार अलग- अलग कंपनी के क्वार्टरों के रैपर, देसी शराब के 90 क्वार्टर और चालीस लीटर ओपी बरामद की। बरामद ओपी के सहारे ही मिलावटी शराब बनाने की तैयारी थी। 77 हजार बारकोड भी बरामद हुए। पूछताछ करने पर तीनों ने बताया कि इन बार कोडों को अवैध शराब की बोेतलों पर लगाने की तैयारी थी।
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बार कोड से होती है असली शराब की पहचान
नकली शराब पर रोक लगाने के लिए आबकारी विभाग ने एक अप्रैल से शराब की बोतलों पर बार कोड लागू किया है। मोबाइल से बार कोड को स्कैन कर पता लगाया जाता है कि शराब असली है या नकली। इससे अवैध कारोबारियों के लिए सिरदर्द पैदा हो गया था। इसमें सेंध लगाते हुए महानगर के गैंग ने नकली बार कोड लगाकर अवैध शराब बेच रहे थे।
सभी के बंटे थे काम
मिलावटी शराब बनाने का कारोबार पकड़े गए आरोपी मनोज कुमार कुशवाहा के मकान में चल रहा था। मौके से जिला निवाड़ी के थाना सेंधरी स्थित देवरी गांव निवासी जीवन राय, रामू राय, आकाश राय और कोतवाली के सामने कस्तूरी होटल वाली गली निवासी प्रदीप ओमहरे राय भाग निकले। पुलिस का कहना है कि स्थान बदल- बदलकर यह गैंग मिलावटी शराब बना रहा था। एक सप्ताह पहले ही मनोज के घर में डेरा डाला था। गिरोह के सभी सदस्य अपना अलग अलग कार्य करते थे। आरोपी रवि तथा प्रदीप राय बाहर से विभिन्न कंपनियों के नकली ढक्कन, नकली रैपर व नकली बार कोड का इंतजाम करते थे। जबकि, जीवन व रामू राय अपने अन्य साथियों को ओपी केमिकल की व्यवस्था कराते थे और बने हुए माल को थोक में खरीद कर फुटकर में कई दुकानों पर सप्लाई करते थेे। गिरोह लंबे समय से जिले के साथ मध्य प्रदेश की दुकानों पर मिलावटी शराब की सप्लाई कर रहे थे।
इस तरह बनाते थे
बताया गया कि आरोपी मनोज, आकाश व ताराचंद्र मिलकर शराब के ठेकों से खाली क्वार्टर व बोतल एकत्रित कर एक लीटर ओपी केमिकल में लगभग चार लीटर पानी मिलाकर अवैध शराब बनाते थे। शराब के निर्माण में उनका सात सौ रुपये खर्च आता था, जिसे वह एक हजार रुपये में जीवन तथा रामू राय को बेच देते थे।
ऐसे करते थे खेल
अंग्रेजी शराब की प्रयोग की गई बोतलें कबाड़ी के यहां बिकती हैं, जहां से इन्हें आरोपी अलग से छंटनी कराकर ले आते थे। जिले के महानगर में कई ऐसे स्थान हैं, जहां पर शराब की खाली बोतलों का स्टॉक रहता है। नकली शराब के माफिया जिस ब्रांड की बिक्री ज्यादा होती है, उसकी बोतलों का स्टॉक यहां से खरीदकर ले आते थे।
उबलते पानी में निकालते कार्क
अंग्रेजी शराब की अधिकांश बोतलों में प्लास्टिक की कार्क लगी होती है। इसमें से शराब बाहर तो आ सकती है, लेकिन भीतर नहीं जा सकती। खाली बोतल से इस कार्क को निकलने के लिए बोतल के कार्क वाले हिस्से को उबलते हुए पानी में थोड़ी देर रखा जाता है, उसके बाद कार्क को बाहर की तरफ खींच लेते हैं।
जरा सी चूक से बड़ा खतरा
इस शराब को तैयार करने में जो अल्कोहल प्रयोग होता है, उसकी मात्रा जरा सी ज्यादा होना पीने वाले के लिए हानिकारक बन जाता है। शराब माफिया कभी - मिथाइल का भी प्रयोग करते हैं, जो जानलेवा होता है।
चर्चित बार में भी होती थी सप्लाई
बताया गया है कि गैंग के एक सदस्य की बार में अच्छी पैठ थी। यहां भी मिलावटी शराब बेची जाती थी। यह भी पता चला है कि पूरा माल रात के समय बार पर पहुंचता था। सूत्रों से यह भी पता चला है कि ढक्कन शिवाजी नगर एक मकान में बनाए जा रहे थे। इसके लिए एक व्यक्ति मशीन भी लगाए हुए है। अवैध कारोबारियों ने भी मशीन लगवाई है।
पुलिस टीम में यह रहे शामिल
टीम में कोतवाल संजय सिंह, स्वॉट प्रभारी विजय पांडेय, उपनिरीक्षक जितेंदर सिंह तक्खर, मिनर्वा चौकी प्र्रभारी सुरेंद्र प्रताप सिंह, बड़ागांव चौकी प्रभारी परमेंद्र कुमार सिंह, राजीव सिंह, योगेंद्र चौहान, सत्यपाल सिंह, शैलेंद्र चौहान, पदम गोस्वामी, प्रदीप सेंगर, दुर्गेश चौहान, विक्रम सिंह, अजय भदौरिया शामिल रहे।
गैंगस्टर की भी होगी कार्रवाई
एसएसपी के अनुसार सभी आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई होगी। इसके अलावा, सभी की संपत्ति की भी जांच कराकर कुर्की की कार्रवाई कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि अधिकांश संपत्ति अवैध कारोबार से बनाई है, जिस पर कार्रर्वाई कराई जाएगी। बताया गया है कि पांच साल पहले अवैध शराब का भंडाफोड़ किया गया था, जिसमें रवि पकड़ा गया था। आरोपियोें ने अवैध शराब से अकूत संपत्ति कमा ली है।
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सोमवार को स्वॉट प्रभारी विजय पांडेय और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह को सूचना मिली कि नारायण बाग तिराहा के पास श्मशान घाट वाले रास्ते पर एक व्यक्ति अवैैध शराब के खाली क्वार्टर लेकर जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने पहुंचकर थाना सदर बाजार के सिमराहा निवासी तारा राय को दबोच लिया। पूछताछ करने पर उसने बताया कि यह क्वार्टर वह बड़ागांव गेट बाहर ले जा रहा है। वहां वह व उसके साथी मिलावटी शराब बनाने का काम करते हैं। उसके साथी मकान में मौजूद हैं।
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इस पर पुलिस ने बड़ागांव गेट बाहर मैरी तिराहा के पास एक मकान मेें छापा मारा। वहां से बड़ागांव गेट बाहर मैरी तिराहा निवासी मनोज कुमार कुशवाहा और तालपुरा निवासी रवि राय को पकड़ लिया गया, चार बदमाश मौके से भागने में सफल हो गए। पुलिस ने मौके से 2 लाख 80 हजार अलग अलग कंपनियोें के ढक्कन, 774 देसी शराब के खाली क्वार्टर, बीस हजार अलग- अलग कंपनी के क्वार्टरों के रैपर, देसी शराब के 90 क्वार्टर और चालीस लीटर ओपी बरामद की। बरामद ओपी के सहारे ही मिलावटी शराब बनाने की तैयारी थी। 77 हजार बारकोड भी बरामद हुए। पूछताछ करने पर तीनों ने बताया कि इन बार कोडों को अवैध शराब की बोेतलों पर लगाने की तैयारी थी।
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बार कोड से होती है असली शराब की पहचान
नकली शराब पर रोक लगाने के लिए आबकारी विभाग ने एक अप्रैल से शराब की बोतलों पर बार कोड लागू किया है। मोबाइल से बार कोड को स्कैन कर पता लगाया जाता है कि शराब असली है या नकली। इससे अवैध कारोबारियों के लिए सिरदर्द पैदा हो गया था। इसमें सेंध लगाते हुए महानगर के गैंग ने नकली बार कोड लगाकर अवैध शराब बेच रहे थे।
सभी के बंटे थे काम
मिलावटी शराब बनाने का कारोबार पकड़े गए आरोपी मनोज कुमार कुशवाहा के मकान में चल रहा था। मौके से जिला निवाड़ी के थाना सेंधरी स्थित देवरी गांव निवासी जीवन राय, रामू राय, आकाश राय और कोतवाली के सामने कस्तूरी होटल वाली गली निवासी प्रदीप ओमहरे राय भाग निकले। पुलिस का कहना है कि स्थान बदल- बदलकर यह गैंग मिलावटी शराब बना रहा था। एक सप्ताह पहले ही मनोज के घर में डेरा डाला था। गिरोह के सभी सदस्य अपना अलग अलग कार्य करते थे। आरोपी रवि तथा प्रदीप राय बाहर से विभिन्न कंपनियों के नकली ढक्कन, नकली रैपर व नकली बार कोड का इंतजाम करते थे। जबकि, जीवन व रामू राय अपने अन्य साथियों को ओपी केमिकल की व्यवस्था कराते थे और बने हुए माल को थोक में खरीद कर फुटकर में कई दुकानों पर सप्लाई करते थेे। गिरोह लंबे समय से जिले के साथ मध्य प्रदेश की दुकानों पर मिलावटी शराब की सप्लाई कर रहे थे।
इस तरह बनाते थे
बताया गया कि आरोपी मनोज, आकाश व ताराचंद्र मिलकर शराब के ठेकों से खाली क्वार्टर व बोतल एकत्रित कर एक लीटर ओपी केमिकल में लगभग चार लीटर पानी मिलाकर अवैध शराब बनाते थे। शराब के निर्माण में उनका सात सौ रुपये खर्च आता था, जिसे वह एक हजार रुपये में जीवन तथा रामू राय को बेच देते थे।
ऐसे करते थे खेल
अंग्रेजी शराब की प्रयोग की गई बोतलें कबाड़ी के यहां बिकती हैं, जहां से इन्हें आरोपी अलग से छंटनी कराकर ले आते थे। जिले के महानगर में कई ऐसे स्थान हैं, जहां पर शराब की खाली बोतलों का स्टॉक रहता है। नकली शराब के माफिया जिस ब्रांड की बिक्री ज्यादा होती है, उसकी बोतलों का स्टॉक यहां से खरीदकर ले आते थे।
उबलते पानी में निकालते कार्क
अंग्रेजी शराब की अधिकांश बोतलों में प्लास्टिक की कार्क लगी होती है। इसमें से शराब बाहर तो आ सकती है, लेकिन भीतर नहीं जा सकती। खाली बोतल से इस कार्क को निकलने के लिए बोतल के कार्क वाले हिस्से को उबलते हुए पानी में थोड़ी देर रखा जाता है, उसके बाद कार्क को बाहर की तरफ खींच लेते हैं।
जरा सी चूक से बड़ा खतरा
इस शराब को तैयार करने में जो अल्कोहल प्रयोग होता है, उसकी मात्रा जरा सी ज्यादा होना पीने वाले के लिए हानिकारक बन जाता है। शराब माफिया कभी - मिथाइल का भी प्रयोग करते हैं, जो जानलेवा होता है।
चर्चित बार में भी होती थी सप्लाई
बताया गया है कि गैंग के एक सदस्य की बार में अच्छी पैठ थी। यहां भी मिलावटी शराब बेची जाती थी। यह भी पता चला है कि पूरा माल रात के समय बार पर पहुंचता था। सूत्रों से यह भी पता चला है कि ढक्कन शिवाजी नगर एक मकान में बनाए जा रहे थे। इसके लिए एक व्यक्ति मशीन भी लगाए हुए है। अवैध कारोबारियों ने भी मशीन लगवाई है।
पुलिस टीम में यह रहे शामिल
टीम में कोतवाल संजय सिंह, स्वॉट प्रभारी विजय पांडेय, उपनिरीक्षक जितेंदर सिंह तक्खर, मिनर्वा चौकी प्र्रभारी सुरेंद्र प्रताप सिंह, बड़ागांव चौकी प्रभारी परमेंद्र कुमार सिंह, राजीव सिंह, योगेंद्र चौहान, सत्यपाल सिंह, शैलेंद्र चौहान, पदम गोस्वामी, प्रदीप सेंगर, दुर्गेश चौहान, विक्रम सिंह, अजय भदौरिया शामिल रहे।
गैंगस्टर की भी होगी कार्रवाई
एसएसपी के अनुसार सभी आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई होगी। इसके अलावा, सभी की संपत्ति की भी जांच कराकर कुर्की की कार्रवाई कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि अधिकांश संपत्ति अवैध कारोबार से बनाई है, जिस पर कार्रर्वाई कराई जाएगी। बताया गया है कि पांच साल पहले अवैध शराब का भंडाफोड़ किया गया था, जिसमें रवि पकड़ा गया था। आरोपियोें ने अवैध शराब से अकूत संपत्ति कमा ली है।