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फ्लाई ऐश की लोडिंग से चार हजार लोगों को मिला काम
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झांसी। फ्लाई ऐश (एनटीपीसी से निकलने वाली राख) की लोडिंग से रेलवे ने बीते छह माह में साढे़ नौ करोड़ रुपये की कमाई की है। थर्मल पावर प्लांट की राख देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाने का झांसी रेल मंडल ने काम किया। इतना ही नहीं लोडिंग की वजह से अप्रत्यक्ष रूप से रेलवे ने 4000 लोगों को दैनिक श्रम के रूप में रोजगार उपलब्ध कराया है।
झांसी रेल मंडल ने वैगनों की लोडिंग के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से क्षेत्रीय लोगों को जीविका के लिए काम भी दिया है। इसके तहत रेलवे ने पावर प्लांटों से निकली राख को भारत के विभिन्न हिस्सों में भेजकर 9,42,18,851 रुपये की आय भी अर्जित की। एक अप्रैल से 30 सितंबर तक 3104 वैगनों के माध्यम से बजाज पावर प्लांट, पारीछा पावर प्लांट और हमीरपुर स्थित एनटीपीसी से निकली राख को विभिन्न स्थानों पर भेजकर 4000 से अधिक लोगों को काम उपलब्ध कराया। पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे ने फ्लाई ऐश से झांसी मंडल ने आय के साथ-साथ श्रमिक वर्ग को अप्रत्यक्ष रूप से लोडिंग का काम देकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया। उन्हें यह काम नियमित रूप से मिल रहा है।
नींव की भराई के काम मेें आती है राख
पावर प्लांटों से निकली राखों का किसान खेती में उपयोग नहीं करते। इसके अतिरिक्त सड़क के किनारे रहने से इसके कण लोगों को सांस रोगी बनाते हैं। पिछले छह माह से रेलवे ने इसे उठाकर पर्यावरण को संरक्षित तो किया ही, साथ ही लोगों को भी सांस की बीमारियों से काफी हद तक राहत मिली। कई बिल्डिंग कांट्रेक्टर्स इसका उपयोग जहां नींव को भरने में करते हैं, वहीं सीमेंट फैक्ट्रियां भी इसका सीमेंट निर्माण के लिए करती हैं।
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झांसी रेल मंडल ने वैगनों की लोडिंग के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से क्षेत्रीय लोगों को जीविका के लिए काम भी दिया है। इसके तहत रेलवे ने पावर प्लांटों से निकली राख को भारत के विभिन्न हिस्सों में भेजकर 9,42,18,851 रुपये की आय भी अर्जित की। एक अप्रैल से 30 सितंबर तक 3104 वैगनों के माध्यम से बजाज पावर प्लांट, पारीछा पावर प्लांट और हमीरपुर स्थित एनटीपीसी से निकली राख को विभिन्न स्थानों पर भेजकर 4000 से अधिक लोगों को काम उपलब्ध कराया। पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे ने फ्लाई ऐश से झांसी मंडल ने आय के साथ-साथ श्रमिक वर्ग को अप्रत्यक्ष रूप से लोडिंग का काम देकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया। उन्हें यह काम नियमित रूप से मिल रहा है।
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नींव की भराई के काम मेें आती है राख
पावर प्लांटों से निकली राखों का किसान खेती में उपयोग नहीं करते। इसके अतिरिक्त सड़क के किनारे रहने से इसके कण लोगों को सांस रोगी बनाते हैं। पिछले छह माह से रेलवे ने इसे उठाकर पर्यावरण को संरक्षित तो किया ही, साथ ही लोगों को भी सांस की बीमारियों से काफी हद तक राहत मिली। कई बिल्डिंग कांट्रेक्टर्स इसका उपयोग जहां नींव को भरने में करते हैं, वहीं सीमेंट फैक्ट्रियां भी इसका सीमेंट निर्माण के लिए करती हैं।
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