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Jhansi: केन-बेतवा के पानी से भरे जाएंगे सूखे पड़े चार बांध, उच्च स्तरीय बैठक में हुआ निर्णय, यहां जानें सबकुछ

Thu, 28 Jul 2022 01:33 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Thu, 28 Jul 2022 01:33 AM IST
सार

सिंचाई अभियंताओं के मुताबिक पिछले दिनों दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया था। इस प्रस्ताव के जरिए बेतवा नदी से करीब बीस किलोमीटर दूर स्थित बांध भी इस सिंचाई परियोजना की मदद से भरे जा सकेंगे।

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Four dry dams will be filled with water from Ken Betwa irrigation project
गोविंद सागर बांध - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

महत्वाकांक्षी केन-बेतवा सिंचाई परियोजना की मदद से बेतवा नदी के बीस किमी. दायरे के भीतर मौजूद बांध व तालाब भरने का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। यह प्रस्ताव पिछले दिनों दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक में हुए फैसले के बाद तैयार हो रहा है। सिंचाई अफसरों का कहना है कि इस परियोजना की मदद से उन सभी बांधों को भरने की कोशिश की जाएगी, जो मानसूनी सीजन में भी खाली रह जाते हैं। इसकी मदद से बरुआसागार झील भी साल भर लबालब रहेगी।

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यूपी में सर्वाधिक बांध झांसी मंडल में
यूपी में सर्वाधिक बांध झांसी मंडल में हैं। इनमें 9 बांध ललितपुर जबकि 13 बांध झांसी में हैं। राजघाट, माताटीला, सुकुवां-ढुकुवां शहजाद, जामनी, सजनम, पहाड़ी, लहचूरा, पथरई, सिजार समेत अन्य बांध मध्य प्रदेश की ओर से आने वाले पानी से भर जाते हैं, लेकिन मानसूनी सीजन में भी गोविंद सागर, खपरार, उटारी, कुरार समेत अन्य बांध खाली रह जाते हैं। बरुआसागर झील भी खाली रह जाती है। अफसरों का कहना है कि बुंदेलखंड में पिछले एक दशक से बारिश की दर लगातार घटती जा रही। बारिश की दर घटने से भी यह बांध मानसूनी सीजन में नहीं भर पाते। इन सभी बांध को अब केन-बेतवा सिंचाई परियोजना की मदद से भरने की योजना बनाई गई है।
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जिम्मेदारों का यह है कहना
सिंचाई अभियंताओं का कहना है पिछले दिनों दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया था। इस प्रस्ताव के जरिए बेतवा नदी से करीब बीस किलोमीटर दूर स्थित बांध भी इस सिंचाई परियोजना की मदद से भरे जा सकेंगे। इनको भरने के लिए इन सभी बांधों को लिंक कैनाल से जोड़ा जाएगा। वहीं, इनके रास्ते में पड़ने वाले तालाब भी इसी परियोजना से भरे जाएंगे। इन तालाबों को भरने में नालों का सहारा लिया जाएगा। सिंचाई अभियंताओं का कहना है कि इन बांधों को भरने से मऊरानीपुर, गरौठा समेत अन्य सूखाग्रस्त इलाकों तक पूरे साल तक पानी पहुंचाया जा सकेगा। वहीं, अधीक्षण अभियंता शीलचंद्र उपाध्याय का कहना है कि इन सभी बांधों को भरने के लिए लिंक कैनाल तैयार की जाएगी। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

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