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वित्त मंत्री जी... कम नहीं हो रही लागत, कैसे करें खेती

Wed, 02 Feb 2022 01:06 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Feb 2022 01:06 AM IST
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Finance minister... the cost is not decreasing, how to do farming
झांसी। केंद्रीय बजट में वित्तमंत्री ने कीटनाशक मुक्त खेती को बढ़ावा देने, जीरो बजट खेती, ऑगेनिक खेती, आधुनिक कृषि को बढ़ावा देने की बात कही। नाबार्ड के जरिए किसानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही मोटा अनाज उत्पादन को प्रोत्साहित करने की बात कही लेकिन, किसानों का कहना है खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। सरकार को लागत घटाने के साथ ही उपज का सही दाम दिलाने की कोशिश करनी चाहिए। वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वायदा किया लेकिन, किसानों तक इसका फायदा भी नहीं पहुंचा।
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बुंदेलखंड में गेहूं, मटर, चना, मूंगफली, उड़द एवं मूंग की बुवाई सर्वाधिक होती है। कृषि विभाग के मुताबिक बुंदेलखंड इलाके में गेंहू की बुवाई पर करीब 36,400 रुपये प्रति हेक्टेयर खर्च आता है। इनमें जुताई, बुवाई, खाद, बीज, सिंचाई एवं मजदूरी शामिल है। इसी तरह धान की फसल में करीब 32,885 रुपये, चना 30,200 रुपये, मूंगफली 33,150 रुपये, मटर 32,400 रुपये, उड़द एवं मूंग 20,150 रुपये लागत आती है। इसमें जमीन का किराया एवं किसानों के श्रम का मूल्य शमिल नहीं है। वहीं, डीजल का दाम लगातार बढ़ने से जुताई एवं सिंचाई की लागत बढ़ती जा रही है। बीज, खाद एवं मजदूरी में भी किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गेहूं की औसत उत्पादकता 18.86 क्ंिवटल प्रति हेक्टेयर है। पिछले वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति क्विंटल तय था हालांकि नए वित्तीय वर्ष 2022-23 में इसे बढ़ाकर 2015 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया। नए समर्थन मूल्य के लिहाज से किसानों को प्रति हेक्टेयर करीब 37,720 रुपये ही मिलेंगे जबकि सरकार लागत मूल्य का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने की बात कहती आई है। किसानों का कहना है कि अगर वे जमीन का किराया एवं अपने परिवार के श्रम की कीमत भी जोड़ लें तब उपज की लागत भी उनके हिस्से नहीं आ रही। खरीफ फसल भी उनके लिए फायदेमंद नहीं है। उनका कहना है कि प्राकृतिक वजहों से अगर फसल बच गई तब किसानों को स्थानीय व्यापारियों को उपज बेचने को मजबूर होना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लागत घटाए बिना खेती में फायदा संभव नहीं। नई तकनीक का इस्तेमाल करके इसे घटाया जा सकता है।
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- डीजल, बीज समेत अन्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से उपज की लागत बढ़ती जा रही। बजट में सरकार को लागत कम करने की कोशिश करनी चाहिए। सरकार उपज का सही दाम दिलाने का काम करे।
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अविनाश भार्गव
सम्मान निधि की रकम बढ़ाए जाने की जरूरत थी। उम्मीद थी कि सरकार बजट में इसे बढ़ाने का काम करेगी लेकिन, सम्मान निधि नहीं बढ़ाई गई। इससे किसानों को काफी मदद हो जाती है।
गोविंद
लागत बढ़ने से खेती करना मुश्किल होता जा रहा है। उपज का सही मूल्य भी नहीं मिलता। बजट में इसका प्रावधान होना चाहिए था।
कमलेश
- जैविक खेती को बढ़ावा देने का प्रस्ताव अच्छा है। जमीनी स्तर पर अगर इसे अमल में लाया जाए तब बुंदेलखंड के किसानों को भी इसका फायदा हो सकता है। किसानों की इसका फायदा मिलेगा।

रामाशंकर
बजट में खेती-किसानी को मदद करने के लिए कई प्रावधान किए हैं। सरकार खेती में नई तकनीक को बढ़ावा देना चाहती है। किसानों को अब ख्ेाती में तकनीकी का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे उनकी आय में बढ़ोत्तरी होगी।
अमित तिवारी
बजट के जरिए सरकार को कृषि उपकरणों में सब्सिडी बढ़ानी चाहिए। सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। सरकार को सिंचाई उपकरणों में सब्सिडी अधिक देनी चाहिए
अजीत कुशवाहा
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