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झांसी में फैल रहा भू-माफियाओं का जाल, ऐतिहासिक स्थलों को भी बना रहे निशाना
amarujala
Updated Sat, 27 Oct 2018 04:12 PM IST
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jamen, jhansi news
- फोटो : demo
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रेलवे का बहुत बड़ा जंक्शन, देश भर के नगरों को जोड़ने वाला स्वर्णिम चतुर्भज का केंद्र बिंदु (चौराहा), केंद्र व राज्य सरकार के प्रमुख प्रतिष्ठान तथा सियासत के गलियारोें में गरमाहट लाने वाला अलग बुंदेलखंड का मुद्दा जब-जब जोर पकड़ता है, तब-तब राज्य की राजधानी के लिए महानगर का नाम बरबस ही लोगों की जुबान पर आ जाता है। भूमाफिया इनकी आड़ में जमीन का अवैध कारोबार धड़ल्ले से कर रहे हैं। बुंदेलखंड का एकमात्र महानगर होने के कारण भी यहां जमीन बहुत महंगी है। भूमाफिया इसका फायदा उठाते हैं और खरीदार को सब्जबाग दिखाकर जमीन बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
ऐतिहासिक महत्व का शहर होने के साथ- साथ स्मार्ट सिटी और भविष्य में होने वाले विकास को देखते हुए यहां जमीनें बहुत महंगी हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में रीयल इस्टेट का कारोबार काफी तेजी से फैला है। महानगर में बसने की चाहत रखने वाले प्लाट के लिए लालायित रहते हैं, इसका फायदा भूमाफिया उठाते हैं। महानगर का ऐसा कोई इलाका नहीं है, जहां जमीन के अवैध कारोबारी सक्रिय न हों। कारोबारियों ने झांसी महायोजना के अंतर्गत चिह्नित की गई हरित पट्टी और पार्कों की जमीन को भी ठिकाने लगा दिया। जमीन लेने के बाद अब खरीदार परेशान हैं, न तो उन्हें सड़क मिली और न नाली की सुविधा।
पिछोर व कोछाभांवर में सक्रिय अवैध कारोबारी
आसपास के गांव पिछोर और कोछाभांवर में ग्राम समाज की बहुत जमीन थी, लेकिन नगर निगम गठन के बाद जब यह दोनों गांव शहर में शामिल हुए तो जमीन के कारोबारियों ने इसका फायदा उठाया और निजी के साथ- साथ सरकारी जमीन भी ठिकाने लगा दी।
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आयुर्वेदिक कॉलेज की जमीन ठिकाने लगी
ग्वालियर रोड पर राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज की जमीन है। झांसी के पहले सांसद रघुनाथ विनायक धुलेकर ने अपनी जमीन दान में देकर आयुर्वेदिक कॉलेज की स्थापना की थी, लेकिन जमीन कारोबारियों ने इसे ठिकाने लगा दिया। जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर आयुर्वेदिक कॉलेज की जमीन की जांच की जा रही है। उन्होंने एक साल पहले जांच के आदेश दिए थे, पर जांच में क्या हुआ। यह कोई नहीं बता रहा है।
गरियागांव में भी सुरक्षित नहीं जमीन
गरियागांव शहर का बहुत दूर का इलाका है, यहां पर प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास बनाए जाने हैं, लेकिन जमीन के कारोबारियों की नजर यहां भी है। नगर निगम और कारोबारियों के बीच कई मुकदमे चल रहे हैं।
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ऐतिहासिक महत्व का शहर होने के साथ- साथ स्मार्ट सिटी और भविष्य में होने वाले विकास को देखते हुए यहां जमीनें बहुत महंगी हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में रीयल इस्टेट का कारोबार काफी तेजी से फैला है। महानगर में बसने की चाहत रखने वाले प्लाट के लिए लालायित रहते हैं, इसका फायदा भूमाफिया उठाते हैं। महानगर का ऐसा कोई इलाका नहीं है, जहां जमीन के अवैध कारोबारी सक्रिय न हों। कारोबारियों ने झांसी महायोजना के अंतर्गत चिह्नित की गई हरित पट्टी और पार्कों की जमीन को भी ठिकाने लगा दिया। जमीन लेने के बाद अब खरीदार परेशान हैं, न तो उन्हें सड़क मिली और न नाली की सुविधा।
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पिछोर व कोछाभांवर में सक्रिय अवैध कारोबारी
आसपास के गांव पिछोर और कोछाभांवर में ग्राम समाज की बहुत जमीन थी, लेकिन नगर निगम गठन के बाद जब यह दोनों गांव शहर में शामिल हुए तो जमीन के कारोबारियों ने इसका फायदा उठाया और निजी के साथ- साथ सरकारी जमीन भी ठिकाने लगा दी।
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आयुर्वेदिक कॉलेज की जमीन ठिकाने लगी
ग्वालियर रोड पर राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज की जमीन है। झांसी के पहले सांसद रघुनाथ विनायक धुलेकर ने अपनी जमीन दान में देकर आयुर्वेदिक कॉलेज की स्थापना की थी, लेकिन जमीन कारोबारियों ने इसे ठिकाने लगा दिया। जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर आयुर्वेदिक कॉलेज की जमीन की जांच की जा रही है। उन्होंने एक साल पहले जांच के आदेश दिए थे, पर जांच में क्या हुआ। यह कोई नहीं बता रहा है।
गरियागांव में भी सुरक्षित नहीं जमीन
गरियागांव शहर का बहुत दूर का इलाका है, यहां पर प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास बनाए जाने हैं, लेकिन जमीन के कारोबारियों की नजर यहां भी है। नगर निगम और कारोबारियों के बीच कई मुकदमे चल रहे हैं।
सिमरधा और पाल कालोनी में कम नहीं कब्जे
दूरदराज के वार्ड सिमरधा और ग्वालियर रोड स्थित पाल कालोनी में ग्राम समाज की खूब जमीनें थीं, जो नगर निगम में शामिल हो गईं। लेकिन, देखरेख के अभाव में इनका भी वही हाल है। यहां पर कब्जे कम नहीं हैं।
तहसील मेें कर्मचारी, काम जमीनों का कारोबार
सदर तहसील में मामूली से चपरासी पद पर तैनात एक कर्मचारी जमीनों का बहुत बड़ा कारोबारी है। उसने कागजों में पत्नी को तलाक दे रखा है, जबकि जमीनों का कारोबार वह पत्नी के नाम से ही करता है। इससे लिखत- पढ़त में उसका कहीं नाम नहीं आता है। यदि पत्नी के खिलाफ भी कोई कार्रवाई हो तो भी वह साफ बच जाता है कि उसे तलाक दे रखा है। उसके रसूख के आगे सभी अफसर नतमस्तक रहते हैं।
ऐतिहासिक महत्व की जमीन लगा दी ठिकाने
दतिया गेट बाहर क्षेत्र में प्राचीन तालाब था, जो नकटा चोपड़ा के नाम से जाना जाता था। लेकिन, भूमाफियाओं ने पूरा तालाब गायब कर दिया है। स्थिति यह है कि चोपड़ा की जमीन का कोई मालिक नहीं होने के बाद भी पूरी जमीन बिक गई और मकान बन गए। गुलाम गौस खां पार्क भी जमीनी विवाद में उलझा हुआ है। इतना ही नहीं, जहां कभी झांसी रियासत के हाथी बांधे जाते थे, वह जमीन भी ठिकाने लगा दी गई है। रघुनाथराव महल पर अवैध कब्जे हो गए हैं। राजा रामचंद्र राव की समाधि, परकोटा, खंडेराव गेट समेत ऐतिहासिक महत्व के कई स्थानों पर जमीन कारोबारियों ने ठिकाने लगा दिया है।
नगर निगम लगातार अपनी जमीनों को सुरक्षित करता जा रहा है। जिन जमीनों पर कब्जे हो चुके हैं, उन्हें कब्जामुक्त किया जा रहा है। अवैध कब्जे करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।
- प्रताप सिंह भदौरिया, नगर आयुक्त
दूरदराज के वार्ड सिमरधा और ग्वालियर रोड स्थित पाल कालोनी में ग्राम समाज की खूब जमीनें थीं, जो नगर निगम में शामिल हो गईं। लेकिन, देखरेख के अभाव में इनका भी वही हाल है। यहां पर कब्जे कम नहीं हैं।
तहसील मेें कर्मचारी, काम जमीनों का कारोबार
सदर तहसील में मामूली से चपरासी पद पर तैनात एक कर्मचारी जमीनों का बहुत बड़ा कारोबारी है। उसने कागजों में पत्नी को तलाक दे रखा है, जबकि जमीनों का कारोबार वह पत्नी के नाम से ही करता है। इससे लिखत- पढ़त में उसका कहीं नाम नहीं आता है। यदि पत्नी के खिलाफ भी कोई कार्रवाई हो तो भी वह साफ बच जाता है कि उसे तलाक दे रखा है। उसके रसूख के आगे सभी अफसर नतमस्तक रहते हैं।
ऐतिहासिक महत्व की जमीन लगा दी ठिकाने
दतिया गेट बाहर क्षेत्र में प्राचीन तालाब था, जो नकटा चोपड़ा के नाम से जाना जाता था। लेकिन, भूमाफियाओं ने पूरा तालाब गायब कर दिया है। स्थिति यह है कि चोपड़ा की जमीन का कोई मालिक नहीं होने के बाद भी पूरी जमीन बिक गई और मकान बन गए। गुलाम गौस खां पार्क भी जमीनी विवाद में उलझा हुआ है। इतना ही नहीं, जहां कभी झांसी रियासत के हाथी बांधे जाते थे, वह जमीन भी ठिकाने लगा दी गई है। रघुनाथराव महल पर अवैध कब्जे हो गए हैं। राजा रामचंद्र राव की समाधि, परकोटा, खंडेराव गेट समेत ऐतिहासिक महत्व के कई स्थानों पर जमीन कारोबारियों ने ठिकाने लगा दिया है।
नगर निगम लगातार अपनी जमीनों को सुरक्षित करता जा रहा है। जिन जमीनों पर कब्जे हो चुके हैं, उन्हें कब्जामुक्त किया जा रहा है। अवैध कब्जे करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।
- प्रताप सिंह भदौरिया, नगर आयुक्त