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पराली जलाने को रोकने के लिए किसानों को करेंगे जागरूक

Fri, 06 Aug 2021 01:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 01:21 AM IST
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Farmers will be made aware to stop stubble burning
झांसी। किसान भले ही अभी बारिश को लेकर चिंतित हों, पर प्रशासन की चिंता किसानों द्वारा जलाई जाने वाली पराली को लेकर है। आने वाले डेढ़ से दो महीने में खरीफ की फसलें किसानों के घर पर पहुंच जाएंगी। रबी फसलों की तैयारियों से पहले किसान अपने खेतों में पराली जलाते हैं। किसान पराली न जलाएं, इसलिए उन्हें जागरूक किया जाएगा। इसके लिए दस से 18 अगस्त तक गांव- गांव में बैठकें होंगी। बैठकों के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी गई है।
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पराली धान के बचे हिस्से को कहते हैं, जिसकी जड़ें जमीन में होती हैं। फसल पकने के बाद ऊपरी हिस्सा काट लेते हैं, बाकी हिस्सा किसी काम का नहीं रहता है। अगली फसल बोने के लिए खेत खाली करने होते हैं, इसलिए किसान बाकी फसल के हिस्सों को जला देते हैं। इसी को पराली कहते हैं। मोंठ क्षेत्र में धान सर्वाधिक पैदा होती है। इसलिए पराली जलाने के सबसे अधिक मामले मोंठ क्षेत्र में ही होते हैं।
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खेत में पराली जलाने से राख पैदा होती है। इससे उस जगह पर पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों का विनाश हो जाता है। इससे फसलों की पैदावार और मिट्टी की गुणवत्ता में कमी आती है। पराली जलाने से हवा प्रदूषित होती है। हवा में उपस्थित धुएं से आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होती है। इसलिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है कि वह किसानों को जागरूक करें। किसानों को बताया जाएगा कि खेत अथवा सामुदायिक स्थलों पर कंपोस्ट खाद के गड्ढे बना लें। पराली को काटकर गड्ढे में डाल दें और कंपोस्ट खाद बनने पर खेतों में डालें, जिससे पैदावार बढ़ेगी। लेखपाल और ग्राम प्रधान पराली के बारे में प्रचार- प्रसार कराएंगे। गांव में खुली बैठकों में पराली के बारे में बताया जाएगा। संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकारी, थानाध्यक्ष, बीट प्रभारी, सिपाही और चौकीदार भी किसानों को जागरूक करेंगे। फसल के अवशेषों को पशु चारा और बायो फ्यूल बनाने में उपयोग करने के बारे में किसानों को जागरूक किया जाएगा।
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इतना लगता है जुर्माना
एनजीटी ने पराली जलाने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है। यदि किसान के पास दो से पांच एकड़ जमीन है और पराली जलाता है तो 2500 रुपया, पांच एकड़ से अधिक जमीन है तो पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक है तो 15 हजार रुपये जुर्माना और छह माह की सजा है।
यह होता है नुकसान
पराली जलाने से कार्बन मोना ऑक्साइड और कार्बन डाई ऑक्साइड गैसों से ओजोन परत का नुकसान होता है और अल्ट्रावायलेट किरणें निकलती हैं, जिससे त्वचा को नुकसान होता है। धुएं से सांस लेने में दिक्कत होती है और फेफड़ों की बीमारियां होने की आशंका रहती है।

राजस्व ग्राम स्तर पर गोष्ठियों के माध्यम से किसानाें को फसल अवशेष जलाने से मिट्टी, जलवायु, एवं मानव स्वास्थ्य को होने वाली हानियों के बारे में बताया जाएगा। - के के सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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