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महंगा सरकारी आवास, कर्मचारियों को बना फांस

Wed, 23 Aug 2017 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूराो
अमर उजाला ब्यूराो Updated Wed, 23 Aug 2017 12:57 AM IST
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costly government house
house jhansi news - फोटो : demo pic
झांसी।
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रेलवे कर्मचारियों के लिए सरकारी आवास अब किराए के मकान से भी महंगा पड़ रहा है, मुसीबत यह है कि अब रेल कर्मचारी चाह कर भी सरकारी आवास खाली नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल सातवें वेतन आयोग में एचआरए बढ़ने के बाद 200 से अधिक कर्मचारियों ने आवास खाली करने के लिए आवेदन दिया है। इससे चिंतित मंडल प्रशासन ने रेलवे बोर्ड से नई गाइड लाइन मांगी है। गाइड लाइन आने तक आवास सरेंडर की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।
सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद रेल कर्मचारियों के सरकारी आवास में रहना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। अभी सरकारी आवास लेने पर अपने कुल वेतन का दस फीसदी एचआरए (हाउस रेंट एलाउंस) देना पड़ता है। जैसे की किसी कर्मचारी का मूल वेतन 60 हजार है तो उसे छह हजार रुपये एचआरए देना पड़ता है। बिजली का बिल अतिरिक्त। मगर, सातवें वेतन आयोग ने स्टेशन केटेगिरी के हिसाब से आठ, सोलह और चौबीस फीसदी एचआरए देने का एलान किया है। इस हिसाब से अब कर्मचारियों को सरकारी आवास लेने पर दस हजार रुपये से ऊपर ही देना होगा। इससे कम में उसे निजी आवास किराए पर मिल सकता है। इस कारण कर्मचारी आवास आवंटित होने के बाद वे उसमें कब्जा नहीं ले रहे हैं। जो कर्मचारी अपने आवास खाली कर चुके हैं, वो भी दूसरे कर्मचारी द्वारा कब्जा नहीं लिए जाने से एचआरए बेवजह कटवा रहे हैं। वर्तमान में मंडल में 200 से अधिक कर्मचारियों ने आवास खाली करने के आवेदन दे रखे हैं। इनमें 15 ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन्होंने खुद के घर बनवाने के बाद उसमें शिफ्ट हो गए हैं।
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इधर, रेलवे की दिक्कत यह है कि अगर किसी तरह कर्मचारी आवास खाली करते रहे तो उनके कौन रहेगा? इस कारण मंडल रेल प्रशासन ने पत्र लिखकर रेलवे बोर्ड से गाइड लाइन मांगी है। साथ ही गाइड लाइन आने तक आवास सरेंडर करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। सूत्रों की माने तो रेलवे नियम बना रहा है कि कर्मचारी का स्थानांतरण या मौत के मामले को छोड़ अगर वह आवास खाली करेगा तो उसको एचआरए नहीं दिया जाएगा। या फिर आवास खाली करने का जायज कारण होना चाहिए।
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‘कर्मचारियों को आवास खाली करने में समस्या तो है। मगर, नई गाइड लाइन आने तक उनको इंतजार करना होगा। ’
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।

ये भी समस्या
रेलवे कालॉनी में बने 2300 से अधिक आवासों में रहने वाले सत्तर फीसदी कर्मचारी विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन सभी रेलवे के सभी 16 विभाग के कर्मचारियों को पूल में बांटा गया है। इन आवासों में न तो समुचित सफाई की जा रही है और न ही स्वच्छ जलापूर्ति हो पा रही है। अधिकांश क्वार्टरों के दरवाजे और खिड़कियां टूटे हुए हैं। आवास न लेने का यह भी एक कारण है।


ये भी बड़ी समस्या
अगर कोई कर्मचारी आवास खाली करता है और दूसरा उसमें कब्जा नहीं लेता है तो ऐसी स्थिति में कार्य निरीक्षक को आवास अपने कब्जे में लेना चाहिए, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहे। दरअसल, कार्य निरीक्षक के लिए खाली आवास की रखवाली मुश्किल हो जाती है। पिछले दिनों एक खाली आवास को एक कार्य निरीक्षक ने ताला डालकर अपने कब्जे में ले लिया था। कुछ दिन में ही एक जीआरपी सिपाही ने ताला तोड़कर कब्जा कर लिया।
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