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इस बार समय पर नहीं मिल सकेगी शुल्क प्रतिपूर्ति
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झांसी। जिले के 53 हजार विद्यार्थियों को इस बार शुल्क प्रतिपूर्ति मिलने में इंतजार करना पड़ सकता है। कोरोना महामारी के चलते सभी जगह से ब्योरा एकत्र न हो सकने से प्रतिपूर्ति संबंधी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसके साथ 75 फीसदी उपस्थिति के मामले को लेकर भी अभी तक पेंच फंसा हुआ है।
कोरोना महामारी का असर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति पर भी पड़ता दिखता है। अब तक अक्तूबर माह तक छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का काम करीब पूरा हो जाता था। दो अक्तूबर को सार्वजनिक समारोह में छात्रवृत्ति का वितरण होता था लेकिन, इस बार यह काम समय पर होना मुश्किल होना है। छात्रवृत्ति संबंधी आंकड़े भी अब तक जिले भर से एकत्र नहीं हो सके हैं। छात्रवृत्ति वितरण में 75 फीसदी उपस्थिति भी अनिवार्य होती है। लेकिन महामारी के बाद से तकरीबन सभी शिक्षण संस्थाएं बंद चल रही है। इससे उपस्थिति तय करने में भी दुविधा हो रही। अफसरों का कहना है कि शासन स्तर पर परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को योजना में शामिल कर लेने की बात कही जा रही। लेकिन, अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। इस वजह से छात्रों को दो अक्तूबर तक छात्रवृत्ति का मिलना मुश्किल होगा। इसी तरह सरकार की ओर से दुर्बल आय वर्ग के छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति के जरिए शिक्षा में मदद की जाती है। सरकार सामान्य के साथ ही व्यवसायिक शिक्षा के लिए फीस की प्रतिपूर्ति करती है लेकिन, कोरोना महामारी की वजह से अभी तक न शुल्क प्रतिपूर्ति के संबंध में होने वाली सभी प्रक्रिया पूरी तरह थमी हुई है। इन छात्रों को भी तयशुदा समय पर शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिल सकेगी। बता दें जनपद में करीब 53 हजार छात्रों को विभिन्न वर्गों में छात्रवृत्ति समेत शुल्क प्रतिपूर्ति की सुविधा दी जाती है। वहीं, जिला पिछड़ा कल्याण अधिकारी का कहना है कि शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर शासन स्तर पर विचार-विर्मश चल रहा है। इस बारे में जल्द ही निर्णय लिए जाने की संभावना है।
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कोरोना महामारी का असर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति पर भी पड़ता दिखता है। अब तक अक्तूबर माह तक छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का काम करीब पूरा हो जाता था। दो अक्तूबर को सार्वजनिक समारोह में छात्रवृत्ति का वितरण होता था लेकिन, इस बार यह काम समय पर होना मुश्किल होना है। छात्रवृत्ति संबंधी आंकड़े भी अब तक जिले भर से एकत्र नहीं हो सके हैं। छात्रवृत्ति वितरण में 75 फीसदी उपस्थिति भी अनिवार्य होती है। लेकिन महामारी के बाद से तकरीबन सभी शिक्षण संस्थाएं बंद चल रही है। इससे उपस्थिति तय करने में भी दुविधा हो रही। अफसरों का कहना है कि शासन स्तर पर परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को योजना में शामिल कर लेने की बात कही जा रही। लेकिन, अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। इस वजह से छात्रों को दो अक्तूबर तक छात्रवृत्ति का मिलना मुश्किल होगा। इसी तरह सरकार की ओर से दुर्बल आय वर्ग के छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति के जरिए शिक्षा में मदद की जाती है। सरकार सामान्य के साथ ही व्यवसायिक शिक्षा के लिए फीस की प्रतिपूर्ति करती है लेकिन, कोरोना महामारी की वजह से अभी तक न शुल्क प्रतिपूर्ति के संबंध में होने वाली सभी प्रक्रिया पूरी तरह थमी हुई है। इन छात्रों को भी तयशुदा समय पर शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिल सकेगी। बता दें जनपद में करीब 53 हजार छात्रों को विभिन्न वर्गों में छात्रवृत्ति समेत शुल्क प्रतिपूर्ति की सुविधा दी जाती है। वहीं, जिला पिछड़ा कल्याण अधिकारी का कहना है कि शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर शासन स्तर पर विचार-विर्मश चल रहा है। इस बारे में जल्द ही निर्णय लिए जाने की संभावना है।
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