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विद्यालयों पर हर माह खर्च होते छह करोड़ से ज्यादा..पर रिजल्ट दे रहे फिसड्डी

Tue, 21 Jun 2022 12:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jun 2022 12:18 AM IST
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Every month more than six crores are spent on schools.. but the results are laggy
झांसी। हर महीने छह करोड़ से ज्यादा खर्च करवा रहे झांसी के एडेड, जीआईसी व जीजीआईसी स्कूल बोर्ड परीक्षा में अच्छा रिजल्ट नहीं दे पा रहे। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के नतीजों में जनपद फिसड्डी साबित हुआ है। प्रदेश की रैंकिंग में झांसी हाईस्कूल में 54वें और इंटरमीडिएट में 72वें नंबर पर है। हकीकत ये भी है कि पिछले छह वर्षों से झांसी ने यूपी बोर्ड के रिजल्ट में 90 फीसदी का आंकड़ा छुआ तक नहीं है।
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झांसी में इस बार हाईस्कूल और इंटर के रिजल्ट को लेकर किरकिरी हो रही है। बोर्ड तक झांसी के रिजल्ट को फिसड्डी बता रहा है। उधर, अभी जहां हर विद्यालय अपना रिजल्ट बेहतरीन बता रहा है, लेकिन सच्चाई बोर्ड द्वारा विद्यालय वार रिजल्ट जारी होते ही सामने आ जाएगी। उधर, जनपद पर नजर डालें तो जनपद में 34 जीआईसी और जीजीआईसी हैं। इनमें तकरीबन 243 शिक्षक-शिक्षिकाएं हैं और महीने में इनका वेतन डेढ़ करोड़ से अधिक बनता है। इसके अलावा 48 एडेड विद्यालय हैं। इसमें अलग-अलग विषयों और ग्रेड के 750 शिक्षक-शिक्षिकाएं हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में स्थित लेखाधिकारी कार्यालय से हर महीने इन विद्यालयों को तकरीबन 5 करोड़ से अधिक वेतन रिलीज किया जाता है। इसमें शिक्षकों के वेतन के नाम पर ही ढाई से तीन करोड़ खर्च होता है। जबकि 10वीं का परीक्षा परिणाम सिर्फ 86.46 फीसदी रहा। परीक्षा में 22095 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए थे। वहीं इंटरमीडिएट में 21505 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी। जबकि रिजल्ट 76.00 फीसदी ही रहा। ऐसे में जनपद के स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर उंगली उठ रही है।
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कोरोना काल से पहले ही गिर गया था रिजल्ट
झांसी। बोर्ड द्वारा जारी पिछले वर्षों का आंकड़ा देखें तो कोरोना काल से पहले ही विद्यालयों का रिजल्ट कमजोर हो गया था। वर्ष 2017 में हाईस्कूल में रिजल्ट मात्र 74.21 फीसदी था। इंटर में भी रिजल्ट 86.00 फीसदी था। हालांकि 2019-2020 में हाईस्कूल के रिजल्ट में कुछ सुधार आया लेकिन इंटर का रिजल्ट गिर गया। ऐसे में शिक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि झांसी के स्कूलों में पढ़ाई किस तरह कराई जा रही है।
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ये रहा चार वर्षों का रिजल्ट
वर्ष 10वीं पास 12वीं पास
2017 74.21 86.00
2018 79.32 79.40
2019 82.76 74.24
2020 86.16 83.65
(नोट: आंकड़े प्रतिशत में। 2021 में छात्र प्रोन्नत हुए)
जिन विद्यालयों का रिजल्ट कमजोर होगा, उन पर फोकस किया जाएगा।
-कोमल यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक
बोले प्रधानाचार्य
रिजल्ट खराब होने का मुख्य कारण कोरोना के बाद की स्थिति रही। असल में कोरोना के बाद स्कूल खुले तो बच्चे आए ही नहीं। शिक्षकों ने घर-घर फोन तक किए लेकिन बच्चे नहीं आए। यही कारण है कि बोर्ड का रिजल्ट बिगड़ गया। हमारे स्कूल में भी आर्ट्स का रिजल्ट इसी कारण से कम रहा।

-अंजुम बेगम, प्रधानाचार्य, हाफिज सिद्दीकी नेशनल गर्ल्स कॉलेज
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शैक्षणिक कलेंडर स्कूलों में सही तरह से लागू नहीं हो पाया, क्योंकि बीच-बीच में कई बार स्कूल बंद हुए। ऑनलाइन कक्षाओं में भी बच्चों ने गंभीरता से पढ़ाई नहीं की। इस कारण से रिजल्ट में कमियां देखने को मिल रही हैं। बच्चों पर फोकस करना अब जरूरी जरूरी हो गया है।
-अरविंद कुमार ओझा, प्रधानाचार्य एलवीएम
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