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शिक्षा और स्वावलंबन के सहारे हर मुकाम हासिल कर सकती है ‘आधी आबादी’

Sun, 07 Mar 2021 12:58 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 07 Mar 2021 12:58 AM IST
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Education and swawalamban get every goal
अमर उजाला की अपराजिता मुहिम के तहत महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित संवाद में चर्चा करतीं महिला?
झांसी। अमर उजाला की अपराजिता मुहिम के तहत अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने कहा कि शिक्षा और स्वावलंबन के जरिये ‘आधी आबादी’ किसी भी मुकाम को हासिल कर सकती है। समाज के सामने ऐसी तमाम नजीरें मौजूद भी हैं। पढ़ी - लिखी महिला समाज को शिक्षित बनाने की हिम्मत रखती है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि महिलाओं को एक-दूसरे को प्रोत्साहित करना चाहिए। परिवार के लोगों को भी महिलाओं की बेहतरी के लिए आगे आना चाहिए। समाज को महिलाओं को सुरक्षित माहौल प्रदान करना चाहिए। समाज के हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी काबिलियत के बल पर कामयाबी के झंडे फहरा रहीं हैं। देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ महिलाएं अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भी काम कर रही हैं।
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महिलाएं जितनी शिक्षित होंगी, उतना ही देश और समाज तरक्की करेगा। पढ़ी-लिखी महिला परिवार और समाज को शिक्षित करने का काम करती है। इसके लिए महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। बेहतरी के लिए महिलाओं को भी एक- दूसरे का सहयोग करना चाहिए। केवल आठ मार्च की तारीख ही नहीं, बल्कि साल के 365 दिन महिलाओं के होने चाहिए।
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- डा. मनीषा जैन
तरक्की की राह में महिलाएं अपने कदम आगे बढ़ा चुकी हैं। कई बार देखने में सामने आ चुका है कि परिवार के सहयोग के बगैर भी महिलाएं अपनी काबिलियत के बलबूते पर ऊंचा मुकाम हासिल कर चुकी हैं। हालांकि, समाज की सोच में बढ़ा परिवर्तन आया है, लेकिन कुछ तबकों में अब भी बेटा और बेटी में फर्क किया जाता है। इस मानसिकता को बदलने का काम होना चाहिए।
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- दीपाली अग्रवाल
शुरुआती दौर में आईटी सेक्टर में केवल पुरुष ही अपना कॅरियर बनाते थे, लेकिन अब इस क्षेत्र में महिलाएं छाई हुईं हैं और देश-विदेश में नाम रोशन कर रही हैं। इससे साबित होता है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल कर सकती हैं। लेकिन, इसके लिए सही समय पर सही लाइन का चयन किया जाना बेहद जरूरी है। इसमें परिवार और समाज को उनका सहयोग करना चाहिए।
- रजनी गुप्ता
सामाजिक गतिविधियों में महिलाओं की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। सामाजिक संगठनों में भी महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ रही है। समाज के नवनिर्माण में महिलाएं आगे आ चुकी हैं। इसमें उन्हें सभी का भरपूर सहयोग मिल रहा है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी महिलाओं को समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने का बीड़ा उठाना चाहिए और देश के नवनिर्माण के लिए आगे आना चाहिए।
- शालू गर्ग
महिलाओं के साथ आपराधिक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में महिलाओं को आत्मरक्षा में आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है। इसके अलावा उन्हें स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ना होगा। इसके लिए जरूरी नहीं कि वे केवल नौकरी ही करें, बल्कि व्यावसायिक क्षेत्र में भी महिलाओं को अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहिए। समाज और देश की प्रगति के लिए हर महिला को अपराजिता बनना होगा।
- मनीला गोयल
आठ मार्च की तारीख महिला दिवस के रूप में जानी जाती है। ये हर महिला के लिए गौरव की बात है। ये दिन महिलाओं की पहचान, उनकी प्रगति और सशक्तीकरण के लिए तय किया गया है। इसका सभी को भावार्थ समझना होगा। इसके अलावा शिक्षित समाज की स्थापना के लिए महिलाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही महिला सुरक्षा के उपाय किए जाना बेहद जरूरी है।
- इश्रिता जैन
पुराने दौर में महिलाओं के पिछड़ेपन के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदार महिलाएं ही होती थीं। लेकिन, अब समाज की सोच में बड़ा बदलाव आया है। महिला कभी मां बनकर बेटी को शिक्षित करने का काम करती है, तो कभी सास के रूप में स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ाती है। ये देश और समाज के भविष्य के लिए शुभ संकेत है। इसी बदलाव के चलते देश की प्रगति में महिलाओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ती जा रही है।
- रश्मि गर्ग
आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मैंने पहला कदम सिलाई सीखकर उठाया था। आज मैं सिलाई करती हूूं और दूसरी महिलाओं को सिखाती हूं। क्योंकि, महिला हो या पुरुष, समाज में सम्मान पाने के लिए सभी का आत्मनिर्भर होना जरूरी है। महिलाओं की शिक्षा के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। महिलाओं में व्यावसायिक सोच का विकास हो, इसके लिए सरकारी स्तर पर भी प्रयास होने चाहिए।
- नेहा
शुरुआत से ही मन में खुद की पहचान बनाने की लालसा थी। लेकिन, शादी हो गई और पारिवारिक जिम्मेदारियों में फंस गई। लेकिन, ससुराल में सास ने मन की बात समझ ली और पूरा सहयोग दिया। आज मैं कुकिंग क्लास चलाती हूं। टेडिवियर बनाना सिखाती हूं। अपनी अलग पहचान बनाकर अच्छा महसूस होता है। सभी महिलाओं को अपनी खुद की पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

- ममता राय
चाह के आगे सभी राह आसान हो जाती हैं। हमेशा से ही मन में नेचुरल फार्मिंग की इच्छा थी। लेकिन, इसके लिए जगह नहीं थी, तो घर की छतों पर ही शुरू कर दी फल, सब्जी और मेडिसिन प्लांट की खेती। इसके अलावा बेकार चीजों को आकार देने का काम भी शुरू कर दिया। कहने का आशय ये है कि अपनी इच्छाओं को मारना नहीं चाहिए। प्रबल इच्छा शक्ति के आगे कठिन कार्य भी आसान हो जाते हैं।
- नीलम सारंगी
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