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ई-वे बिल लागू, मगर रिस्क पर मंगा रहे माल
amarujala
Updated Thu, 27 Jul 2017 12:08 AM IST
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जीएसटी लागू होने के साथ ही प्रदेश सरकार ने फार्म 38 की जगह बुधवार से ई-वे बिल लागू कर दिया है। यह भी तय था कि जीएसटी लागू पर सभी प्रकार के फार्म समाप्त हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। फिलहाल व्यापारियों ने अभी ई-वे बिल का प्रयोग शुरू नहीं किया है, वे अभी अपने रिस्क पर ही दूसरे प्रदेश से माल मंगा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू होने से पहले कारोबारियों को भरोसा दिलाया गया था कि माल मंगाने और भेजने से जुड़े सभी फार्मों को समाप्त कर दिया जाएगा। लेकिन प्रदेश सरकार ने 26 जुलाई से दोबारा पुराने नियमों को लागू कर दिया। बस फार्मों के नाम बदल दिए गए हैं। दूसरे राज्य से माल मंगाने पर फार्म 38 (आयात घोषणापत्र) की जगह अब ई- वे बिल 01, दूसरे राज्य में माल भेजने के लिए फार्म 21 (परिवहन मेमो) की जगह ई-वे बिल 02 और प्रदेश से गुजरने के लिए सीमा में प्र्रवेश करने के लिए बहती की जगह ई-वे बिल 03 इंटरनेट पर डाउनलोड करना है। फिलहाल अधिकांश व्यापारी अभी अपने पुराने स्टॉक को ही बेचने में लगे हैं। जो लोग माल मंगा भी रहे हैं तो वे बिना फार्म के ही सिर्फ जीएसटी नंबर से रिस्क पर मंगा रहे हैं।
‘ वैट में पंजीकृत व्यापारी पुरानी व्यवस्था की तरह अपने फर्म ऑनलाइन जनरेट कर सकते हैं। नए फार्मों का प्रयोग न करने पर क्या कार्रवाई होगी? अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है।’
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डॉ. विमल कुमार, डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर।
ये हैं नए नियम
---------------
- उत्तर प्रदेश के बाहर के किसी स्थान से प्रदेश के अंदर 5000 रुपये अथवा उससे अधिक मूल्य के माल को मंगाने पर ई-वे बिल 01 लगाना होगा।
- उत्तर प्रदेश के अंदर या दूसरे प्रदेश में एक लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य के मेंथा ऑयल, सुपारी, लोहा और इस्पात तथा सभी प्रकार के खाद्य तेल व वनस्पति घी ई-वे बिल 02 लगाना होगा।
- उत्तर प्रदेश के अंदर ई-कामर्स ऑपरेटरों अथवा उनके द्वारा अधिकृत कोरियर अभिकर्ताओं से माल मंगाने पर ई-वे बिल 03 लगाना होगा।
- उत्तर प्रदेश की सीमा से 5000 रुपये या उससे अधिक मूल्य का माल निकालने पर टीडीएफ-01 फार्म जनरेट कराना होगा।
- यदि कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए निजी वाहन से व्यक्तिगत सामान के रूप में या किसी सार्वजनिक यात्री परिवहन वाहन के माध्यम से अपने पहचान संबंधी दस्तावेजों के साथ 50,000 रुपये से कम मूल्य का माल लाता है तो इसमें ई-वे बिल 01 की आवश्यकता नहीं है।
- फार्म ई-वे बिल 01, ई-वे बिल 02, ई-वे बिल 03 डाउनलोड करने से पूर्व विभागीय वेबसाइट एचटीटीपी:// सीओएमटीएएक्स.यूपी.एनआईसी.आईएन पर ऑलाइन रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है।
- ऐसे सभी कारोबारी जिनके द्वारा पूर्व से विभागीय ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग किया जा रहा है। वे अपने पुराने यूजर आईडी तथा पासवर्ड के माध्यम से ई-वे बिल डाउनलोड कर सकते है।
फोटो
दोहरी नीति अपना रही सरकार
प्रदेश सरकार ने माल मंगाने और भेजने में फार्मों की पुरानी व्यवस्था को लागू कर व्यापार को और मुश्किल बना दिया है। मुझे लगता है कि यह बहुत जल्दबाजी में लिया गया निर्णय है। जब केंद्र ने व्यापारियों को जीएसटी में काम करने के लिए तीन माह तक ही राहत दी है, तो इस बात को समझना चाहिए।
विजय खन्ना, अध्यक्ष आयकर अधिवक्ता संघ
फोटो
एक टैक्स से कोई राहत नहीं
देश में एक टैक्स की व्यवस्था जरूर लागू हो गई है, लेकिन मुझे नहीं लगता इससे व्यापारियों कोई राहत मिली हो। आए-दिन कोई न कोई नए नियम सामने आ रहे हैं, जिससे कारोबारियों की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं।
अतुल जैन, इलेक्ट्रानिक व्यापारी।
फोटो
व्यापार करना हो गया मुश्किल
सरकार ने व्यापार को इंटरनेट के जाल में बांध दिया है। मुझे लगता है कि भारत जैसे विकासशील देश में अभी व्यापार इतना स्मार्ट नहीं हुआ है। व्यापारी और व्यापार को समाप्त करने की साजिश चल रही है।
पंकज शुक्ला, रेडीमेड व्यापारी।
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जीएसटी लागू होने के साथ ही प्रदेश सरकार ने फार्म 38 की जगह बुधवार से ई-वे बिल लागू कर दिया है। यह भी तय था कि जीएसटी लागू पर सभी प्रकार के फार्म समाप्त हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। फिलहाल व्यापारियों ने अभी ई-वे बिल का प्रयोग शुरू नहीं किया है, वे अभी अपने रिस्क पर ही दूसरे प्रदेश से माल मंगा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू होने से पहले कारोबारियों को भरोसा दिलाया गया था कि माल मंगाने और भेजने से जुड़े सभी फार्मों को समाप्त कर दिया जाएगा। लेकिन प्रदेश सरकार ने 26 जुलाई से दोबारा पुराने नियमों को लागू कर दिया। बस फार्मों के नाम बदल दिए गए हैं। दूसरे राज्य से माल मंगाने पर फार्म 38 (आयात घोषणापत्र) की जगह अब ई- वे बिल 01, दूसरे राज्य में माल भेजने के लिए फार्म 21 (परिवहन मेमो) की जगह ई-वे बिल 02 और प्रदेश से गुजरने के लिए सीमा में प्र्रवेश करने के लिए बहती की जगह ई-वे बिल 03 इंटरनेट पर डाउनलोड करना है। फिलहाल अधिकांश व्यापारी अभी अपने पुराने स्टॉक को ही बेचने में लगे हैं। जो लोग माल मंगा भी रहे हैं तो वे बिना फार्म के ही सिर्फ जीएसटी नंबर से रिस्क पर मंगा रहे हैं।
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‘ वैट में पंजीकृत व्यापारी पुरानी व्यवस्था की तरह अपने फर्म ऑनलाइन जनरेट कर सकते हैं। नए फार्मों का प्रयोग न करने पर क्या कार्रवाई होगी? अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है।’
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डॉ. विमल कुमार, डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर।
ये हैं नए नियम
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- उत्तर प्रदेश के बाहर के किसी स्थान से प्रदेश के अंदर 5000 रुपये अथवा उससे अधिक मूल्य के माल को मंगाने पर ई-वे बिल 01 लगाना होगा।
- उत्तर प्रदेश के अंदर या दूसरे प्रदेश में एक लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य के मेंथा ऑयल, सुपारी, लोहा और इस्पात तथा सभी प्रकार के खाद्य तेल व वनस्पति घी ई-वे बिल 02 लगाना होगा।
- उत्तर प्रदेश के अंदर ई-कामर्स ऑपरेटरों अथवा उनके द्वारा अधिकृत कोरियर अभिकर्ताओं से माल मंगाने पर ई-वे बिल 03 लगाना होगा।
- उत्तर प्रदेश की सीमा से 5000 रुपये या उससे अधिक मूल्य का माल निकालने पर टीडीएफ-01 फार्म जनरेट कराना होगा।
- यदि कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए निजी वाहन से व्यक्तिगत सामान के रूप में या किसी सार्वजनिक यात्री परिवहन वाहन के माध्यम से अपने पहचान संबंधी दस्तावेजों के साथ 50,000 रुपये से कम मूल्य का माल लाता है तो इसमें ई-वे बिल 01 की आवश्यकता नहीं है।
- फार्म ई-वे बिल 01, ई-वे बिल 02, ई-वे बिल 03 डाउनलोड करने से पूर्व विभागीय वेबसाइट एचटीटीपी:// सीओएमटीएएक्स.यूपी.एनआईसी.आईएन पर ऑलाइन रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है।
- ऐसे सभी कारोबारी जिनके द्वारा पूर्व से विभागीय ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग किया जा रहा है। वे अपने पुराने यूजर आईडी तथा पासवर्ड के माध्यम से ई-वे बिल डाउनलोड कर सकते है।
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दोहरी नीति अपना रही सरकार
प्रदेश सरकार ने माल मंगाने और भेजने में फार्मों की पुरानी व्यवस्था को लागू कर व्यापार को और मुश्किल बना दिया है। मुझे लगता है कि यह बहुत जल्दबाजी में लिया गया निर्णय है। जब केंद्र ने व्यापारियों को जीएसटी में काम करने के लिए तीन माह तक ही राहत दी है, तो इस बात को समझना चाहिए।
विजय खन्ना, अध्यक्ष आयकर अधिवक्ता संघ
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एक टैक्स से कोई राहत नहीं
देश में एक टैक्स की व्यवस्था जरूर लागू हो गई है, लेकिन मुझे नहीं लगता इससे व्यापारियों कोई राहत मिली हो। आए-दिन कोई न कोई नए नियम सामने आ रहे हैं, जिससे कारोबारियों की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं।
अतुल जैन, इलेक्ट्रानिक व्यापारी।
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व्यापार करना हो गया मुश्किल
सरकार ने व्यापार को इंटरनेट के जाल में बांध दिया है। मुझे लगता है कि भारत जैसे विकासशील देश में अभी व्यापार इतना स्मार्ट नहीं हुआ है। व्यापारी और व्यापार को समाप्त करने की साजिश चल रही है।
पंकज शुक्ला, रेडीमेड व्यापारी।