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कोरोना काल में संघ ने बढ़ाया अपना कुनबाः ताकतवर हुआ तंत्र, हर प्रांत में बढ़े स्वयंसेवक

Wed, 21 Oct 2020 02:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुनीत शर्मा, झांसी
पुनीत शर्मा, झांसी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 21 Oct 2020 02:54 AM IST
सार

  • जगह-जगह फंसे मजदूरों की मदद के लिए संघ ने तैयार किया था पूरा नेटवर्क
  • सेवा भारती ने कई बड़े कैंप लगाए, बुंदेलखंड में गरीबों की बस्तियों तक पहुंचे
  • कानपुर प्रांत, अवध और ब्रज प्रांत में शाखाओं की संख्या में भी हुआ इजाफा

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During the Corona period, the Sangh increased its clan, increased volunteers in every province
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कोराना काल में भी संघ अपना विस्तार करने में कामयाब रहा। गांव से लेकर गरीबों की बस्ती तक जरूरतमंदों को मदद पहुंचाकर लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई। जिन इलाकों में संघ का कोई स्वयंसेवक नहीं हुआ करता था वहां भी अच्छी-खासी फौज खड़ी हो गई।

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संघ के सेवाभाव से प्रेरित होकर नौजवान संगठन से जुड़ते चले गए। इससे न केवल स्वयंसेवकों की संख्या में खासा इजाफा हुआ बल्कि नियमित शाखाओं की संख्या भी बढ़ गई। ब्रज, मेरठ, उत्तराखंड, काशी, अवध और गोरखपुर क्षेत्र में बड़ी वृद्धि बताई जा रही है।   
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सेवा भारती के माध्यम से ही 1000 से ज्यादा कैंप प्रदेश भर में लगाए गए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अगर बात करें तो गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, आगरा, अलीगढ़ में संघ ने लॉकडाउन के दौरान फंसे मजदूर और अन्य लोगों को घरों तक पहुंचाया। बुंदेलखंड में भी मदद को खूब हाथ बढ़े।
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लखनऊ-दिल्ली हाईवे, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ हाईवे पर मजदूरों की मदद को हेल्प डेस्क तक खोली गईं। कानपुर प्रांत के सह कार्यवाह  अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि बड़ी संख्या में लोग संघ से जुड़े हैं। स्वयंसेवकों के साथ मिलकर सहायता कैंप तक नौजवानों ने लगाए हैं। अब वे शाखाएं तक लगा रहे हैं।  

कानपुर प्रांत में शाखाओं की संख्या 15000 के पार
संघ में संगठन के लिहाज से कानपुर प्रांत को काफी मजबूत माना जाता है। 22 जिलों वाले इस प्रांत में 15000 शाखाएं लग रही हैं। इनमें 3000 से ज्यादा शाखाएं तो नियमित चलती हैं। अगर कोरोना काल से पहले की बात की जाए तो शाखाओं की संख्या 12000 के करीब थी। जबकि नियमित शाखाओं की संख्या भी 2100 के लगभग थी।

कुल मिलाकर शाखाओं की संख्या में इजाफा हुआ है। संघ के पदाधिकारी कहते हैं कि स्वयंसेवकों ने कोराना काल में लोगों की बड़ी मदद की है। फंसे मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाया। भोजन पानी की व्यवस्था कराई। इससे वह लोग संघ से जुड़ गए। प्रशासन और शासन की मदद से लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराए गए। सेवा भारती के कैंप अभी तक संचालित हो रहे हैं। झांसी मेडिकल कालेज में भी कैंप चल रहा है।


पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्वयंसेवकों में सर्वाधिक वृद्धि
अगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बात करें तो संघ के तीन प्रांत हैं जिनमें मेरठ, ब्रज और उत्तराखंड आता है। इन तीनों प्रांतों में स्वयंसेवकों की संख्या सर्वाधिक बढ़ी है। ब्रज में ही नए स्वयंसेवकों की संख्या 10 हजार से ज्यादा बताई जा रही है जबकि मेरठ और उत्तराखंड में भी 15 से 20 हजार नए स्वयंसेवक बढ़े हैं।


कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में संघ ने इस बीच काफी विस्तार किया है। कोराना काल में संघ से जुड़े सभी संगठन लोगों की मदद करते रहे। इससे लोगों में संघ के प्रति विश्वास पैदा हुआ है। उत्तराखंड में भी काफी इजाफा माना जा रहा है। उत्तराखंड में तो अभी तक कैंपों का संचालन किया जा रहा है। दवाई और कपड़े तक उपलब्ध कराए गए।

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