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रेलवे की सहमति के इंतजार में फंसा ग्वालियर मार्ग ओवरब्रिज
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रेलवे की सहमति के इंतजार में फंसा ग्वालियर मार्ग ओवरब्रिज
झांसी। ग्वालियर रोड रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का प्रस्ताव सालों से फाइलों में ही झूल रहा है। हालांकि, इसके निर्माण को लेकर शासन स्तर पर तैयारियां पूरी हैं, लेकिन अब रेलवे की हरी झंडी न मिल पाने की वजह से काम अटका हुआ है। सरकारी तंत्र की ढुलमुल कार्यशैली का खामियाजा आम जनमानस को भुगतना पड़ रहा है। बार-बार रेलवे क्रॉसिंग बंद होने की वजह से लोगों का समय और ईंधन दोनों ही बर्बाद होता है। अक्सर एंबुलेंस भी क्रॉसिंग खुलने का इंतजार करती नजर आती हैं।
ग्वालियर रोड से कानपुर रेलवे ट्रैक गुजरा हुआ है। ये रेलवे के व्यस्ततम ट्रैकों में से एक है। इस पर सवारी और मालगाड़ियों की एक के बाद एक आवाजाही बनी रहती है। इस वजह से हर 15-20 मिनट के बाद क्रॉसिंग बंद करनी पड़ जाती है। स्थिति ये है कि चौबीस घंटे में से लगभग बारह घंटे क्रॉसिंग बंद रहती है। हर बार क्रॉसिंग बंद होने पर 15 से 20 मिनट के लिए सड़क का यातायात थम जाता है। क्रॉसिंग खुलने के बाद वाहनों के आमने-सामने आने पर जाम लग जाता है। चिलचिलाती धूप में पहले क्रॉसिंग खुलने का इंतजार और उसके बाद जाम से छुटकारा पाने में लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। लंबे समय से क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनाने की मांग चली आ रही है। इसे पूरा करने के लिए पिछले साल अगस्त में योजना का खाका तैयार कर शासन को भेजा गया था। ब्रिज के निर्माण पर 108 करोड़ रुपये की लागत आनी है। तय हुआ था कि इसमें से 20 करोड़ रुपये स्मार्ट सिटी योजना से खर्च किए जाएंगे। जबकि, 22 करोड़ रुपये रेलवे को देने थे। लेकिन, अब तक रेलवे की ओर से सहमति नहीं मिली है, जिससे ब्रिज निर्माण की योजना कागजों से निकलकर धरातल पर नहीं उतर पा रही है।
ग्वालियर रोड रेलवे क्रॉसिंग पर फोरलेन ओवरब्रिज बनाया जाना है। इसका प्रोजेक्ट तैयार कर लिया गया है। शासन की भी सहमति मिल गई है। लेकिन, अभी रेलवे की सहमति नहीं मिली है। रेलवे की सहमति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। वेदप्रकाश, परियोजना प्रबंधक - उप्र राज्य सेतु निगम
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झांसी। ग्वालियर रोड रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का प्रस्ताव सालों से फाइलों में ही झूल रहा है। हालांकि, इसके निर्माण को लेकर शासन स्तर पर तैयारियां पूरी हैं, लेकिन अब रेलवे की हरी झंडी न मिल पाने की वजह से काम अटका हुआ है। सरकारी तंत्र की ढुलमुल कार्यशैली का खामियाजा आम जनमानस को भुगतना पड़ रहा है। बार-बार रेलवे क्रॉसिंग बंद होने की वजह से लोगों का समय और ईंधन दोनों ही बर्बाद होता है। अक्सर एंबुलेंस भी क्रॉसिंग खुलने का इंतजार करती नजर आती हैं।
ग्वालियर रोड से कानपुर रेलवे ट्रैक गुजरा हुआ है। ये रेलवे के व्यस्ततम ट्रैकों में से एक है। इस पर सवारी और मालगाड़ियों की एक के बाद एक आवाजाही बनी रहती है। इस वजह से हर 15-20 मिनट के बाद क्रॉसिंग बंद करनी पड़ जाती है। स्थिति ये है कि चौबीस घंटे में से लगभग बारह घंटे क्रॉसिंग बंद रहती है। हर बार क्रॉसिंग बंद होने पर 15 से 20 मिनट के लिए सड़क का यातायात थम जाता है। क्रॉसिंग खुलने के बाद वाहनों के आमने-सामने आने पर जाम लग जाता है। चिलचिलाती धूप में पहले क्रॉसिंग खुलने का इंतजार और उसके बाद जाम से छुटकारा पाने में लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। लंबे समय से क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनाने की मांग चली आ रही है। इसे पूरा करने के लिए पिछले साल अगस्त में योजना का खाका तैयार कर शासन को भेजा गया था। ब्रिज के निर्माण पर 108 करोड़ रुपये की लागत आनी है। तय हुआ था कि इसमें से 20 करोड़ रुपये स्मार्ट सिटी योजना से खर्च किए जाएंगे। जबकि, 22 करोड़ रुपये रेलवे को देने थे। लेकिन, अब तक रेलवे की ओर से सहमति नहीं मिली है, जिससे ब्रिज निर्माण की योजना कागजों से निकलकर धरातल पर नहीं उतर पा रही है।
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ग्वालियर रोड रेलवे क्रॉसिंग पर फोरलेन ओवरब्रिज बनाया जाना है। इसका प्रोजेक्ट तैयार कर लिया गया है। शासन की भी सहमति मिल गई है। लेकिन, अभी रेलवे की सहमति नहीं मिली है। रेलवे की सहमति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। वेदप्रकाश, परियोजना प्रबंधक - उप्र राज्य सेतु निगम
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