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नहीं रहे गरीबों का दर्द दूर करने वाले डॉ.बी. लाल

Sat, 07 Nov 2020 01:23 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 07 Nov 2020 01:23 AM IST
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Dr. B.Lal dead first mayor in jhansi
Dr. B.Lal dead first mayor in jhansi - फोटो : REPORTERS
झांसी। गरीबों के दर्द, उनके रोगों को निशुल्क दूर करने वाले झांसी के पहले महापौर डॉ. बी लाल का शुक्रवार को आवास पर निधन हो गया। डॉ.लाल के देहांत की सूचना जिसने सुनी उसने उन्हें श्रद्धांजलि दी। सभी ने कहा कि ताउम्र उन्होंने जरूरतमंदों को हर संभव मदद की। उनकी इस विशेषता के लिए ही उन्हें लोगों ने राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर 2006 में मेयर का चुनाव लड़ा और विजयी हुए। समाज का हर वर्ग उन पर विश्वास करता था। हर राजनीतिक दल के लोग उनका सम्मान करते थे। ठीक एक महीने पहले कोरोना से अपने एक बेटे की मौत से उन्हें बड़ा सदमा लगा था।
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डॉ.लाल के बड़े बेटे उमेश कुमार के अनुसार उनकी उम्र 88 वर्ष थी। ठीक एक महीने पहले मझले बेटे डॉ.हृदय नारायण (57) का कोराना संक्रमण की वजह से इलाज के दौरान लुधियाना के मेडिकल कॉलेज में उनका निधन हुआ। वे फिरोजपुर में अस्पताल चलाते थे। बेटे की मौत ने डॉ.लाल को गहरा आघात पहुंचाया। वे उस सदमे से उबर नहीं पाए। उनके परिवार में अब तीन बेटे और एक बेटी अपने-अपने परिवार के साथ रहते हैं। सबसे बड़े बेटे उमेश कुमार खुद हैं। वे रेलवे में वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। एक बेटा प्रभात कुमार वेस्ट सेंट्रल रेलवे में चीफ इंजीनियर है जो वर्तमान में जबलपुर में तैनात है। सबसे छोटा बेटा नीलू लाल स्टेट बैंक में कार्यरत है। एक बेटी है जो परिवार के साथ मुंबई में रहती है।
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मन से हमेशा समाजसेवी ही रहे
डॉ.बी लाल मूलत: समाजसेवी थे। वे एक कुशल फिजीशियन थे। गरीब मरीजों के इलाज और मदद के लिए वे हमेशा तैयार रहते थे। जरूरतमंदों से फीस नहीं लेते थे बल्कि अपनी तरफ से दवा भी उपलब्ध कराते थे। उनकी समाजसेवा की भावना को देखते हुए कांग्रेस ने 2006 में उन्हें टिकट दिया। वे चुनाव जीते, झांसी के पहले मेयर बने और 2012 तक बखूबी कार्यकाल पूरा किया। इससे पहले वे कांग्रेस के सामान्य सदस्य थे। बेटे के अनुसार न उन्होंने इससे पहले कभी राजनीति की और न इसके बाद। दरअसल मन से वह हमेशा समाजसेवी ही रहे।
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शिक्षा, खेल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी
डॉ.बी लाल ने हमेशा समाज में शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। बच्चों को पढ़ने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। उन्हें पुरस्कार दिए। मेयर के कार्यकाल में उन्होंने व्यायामशाला के शिशु मंदिर, जिला तैराक संघ समेत शिक्षण और खेल संगठनों को बढ़ावा दिया।
अपने समाज से पांच जिलों में पहले एमबीबीएस थे
डॉ.बी लाल के बेटे उमेश कुमार के अनुसार उनके पिता शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजसेवा को एक दूसरे का पूरक मानते थे। भाषणों में ही नहीं, उन्होंने इसे व्यवहार में अपनाया। दूसरों से भी ऐसा ही करने की अपील की। वे खुद भी अपने समाज से पांच जिलों में एमबीबीएस करने वाले पहले युवा थे।

पांच पीढ़ियां रहीं बंगला घाट में
डॉ.लाल के परिवार का झांसी से पुराना नाता है। उनकी पांच पीढ़ियां बंगला घाट मोहल्ले में रहीं। 2004 से परिवार शक्ति नगर में रह रहा है।
आज निकाली जाएगी अंतिम संस्कार यात्रा
बेटे उमेश कुमार के अनुसार डॉ. बी लाल की अंतिम संस्कार यात्रा शक्ति नगर स्थित निज निवास से शनिवार (सात नवंबर) सुबह 9:30 बजे बड़ा गांव गेट मुक्तिधाम के लिए रवाना होगी।
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