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घबराए नहीं, चौथी लहर में सामान्य फ्लू बनकर रह जाएगा कोरोना
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झांसी। चौथी लहर आने की संभावना बहुत कम है। यदि आती भी है तो जुलाई में आएगी और ये सामान्य फ्लू बनकर रह जाएगी। इसका सबसे बड़ा कारण झांसी समेत देश भर में बड़ी आबादी का टीकाकरण हो जाना है। यही कोरोना की चौथी लहर को बेअसर साबित कर देगा। ये कहना है मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी कोविड और उप प्राचार्य डॉ. अंशुल जैन का।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में किए गए सीरो सर्वे में 85 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी पाई गई है। एंटीबॉडी का लेवल बरकरार रहे, ऐसे में लोग समय आने पर टीकाकरण जरूर करवा लें। अभी बुजुर्गों के लिए बूस्टर डोज का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 12 साल के बच्चों का भी टीकाकरण शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि दो से 15 साल तक के बच्चों में कोरोना के गंभीर लक्षण बेहद कम मिले हैं। इसके पीछे की वजह कम उम्र होने से बच्चों की ज्यादा बीमारियां जैसे बीपी, शुगर आदि नहीं होती हैं। इसके अलावा खुले वातावरण में उनके ज्यादा रहने से इम्यूनिटी भी मजबूत होती है।
इसलिए बढ़े विदेशों में मामले
उप प्राचार्य के मुताबिक अभी चीन, कोरिया, हांगकांग में मामले बढ़ने लगे हैं। विदेशों में जहां पर चौथी लहर आ रही है, वहां पर अधिकतर देशों में वैक्सीनेशन ज्यादा प्रभावी रूप से नहीं हो पाया है। इसके अलावा लॉकडाउन भी काफी रहा, ऐसे में लोगों की हार्ड इम्यूनिटी भी नहीं बन पाई। वहां पर चौथी लहर में रिपीट इंफेक्शन की दर बहुत कम है।
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उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में किए गए सीरो सर्वे में 85 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी पाई गई है। एंटीबॉडी का लेवल बरकरार रहे, ऐसे में लोग समय आने पर टीकाकरण जरूर करवा लें। अभी बुजुर्गों के लिए बूस्टर डोज का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 12 साल के बच्चों का भी टीकाकरण शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि दो से 15 साल तक के बच्चों में कोरोना के गंभीर लक्षण बेहद कम मिले हैं। इसके पीछे की वजह कम उम्र होने से बच्चों की ज्यादा बीमारियां जैसे बीपी, शुगर आदि नहीं होती हैं। इसके अलावा खुले वातावरण में उनके ज्यादा रहने से इम्यूनिटी भी मजबूत होती है।
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इसलिए बढ़े विदेशों में मामले
उप प्राचार्य के मुताबिक अभी चीन, कोरिया, हांगकांग में मामले बढ़ने लगे हैं। विदेशों में जहां पर चौथी लहर आ रही है, वहां पर अधिकतर देशों में वैक्सीनेशन ज्यादा प्रभावी रूप से नहीं हो पाया है। इसके अलावा लॉकडाउन भी काफी रहा, ऐसे में लोगों की हार्ड इम्यूनिटी भी नहीं बन पाई। वहां पर चौथी लहर में रिपीट इंफेक्शन की दर बहुत कम है।
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