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हाकी की साख बनाई ध्यानचंद ने
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Aug 2016 01:32 AM IST
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dadda
- फोटो : amar ujala
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हाकी की साख बनाई ध्यानचंद ने
सब हेड - भारत रत्न मिले मेजर को, एक स्वर में बोले खिलाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना ही चाहिए। क्योंकि आज दुनिया में जो साख भारतीय क्रिकेट की है। इससे भी कही ज्यादा साख ध्यानचंद ने हाकी की बनाई। दुनिया के अधिकांश मुल्क आज भी मेजर की जादूगरी की कायल है। इसके अलावा देश में राष्ट्रीय खेल हाकी है, तो दद्दा की बदौलत। यह कहना है पूर्व अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, वर्तमान हाकी खिलाड़ियों का।
क्षेत्रीय राजनीतिज्ञ आगे आएं
आज जंतर-मंतर पर दद्दा को भारत रत्न देने की मांग पर सभी राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी धरना दे रहे है। आवश्यकता है क ी झांसी के राजनीतिज्ञ इस मांग पर आगे आए । देश की राजनीति में झांसी के क्षेत्रीय नेता काफी सशक्त है।
अशोक सेन पाली वर्ष 1980 में भारतीय हाकी कैंप के सदस्य
पाठ्यक्रम में शामिल करें
यह तय है कि मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न से मिलने से देश क ी हाकी एक बार फिर मजबूत होगी। इसके अलावा जरूरी है कि स्कूलों के पाठ्यक्रमोें में मेजर ध्यानचंद की जीवनी शामिल की जाए। जिससे विद्यार्थी मैथलीशरण गुप्त, वृंदावन लाल वर्मा की तरह ध्यानचंद को बारीकी से जान सके।
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सुबोध खंडकर भारतीय हाकी टीम के पूर्व कप्तान
वास्तविक हकदार तो ध्यानचंद हैं
भारत रत्न के वास्तविक हकदार तो ध्यानचंद ही है। उनके खेल ने दुनिया को दिखाया कि भारतीय भी बहुत कुछ कर सकते है। जिस समय हमारे देश में संसाधनों की कमी थी। उस दौरान उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व अपने खेल से खूबसूरती से किया।
सुनीता तिवारी उत्तर प्रदेश महिला हाकी टीम क ी पूर्व सदस्या
भारत रत्न की मांग पर आगे आए प्रदेश
देश के असली सपूत है ध्यानचंद। जिन्होंने हिटलर के आफर को ठुकरा दिया कि वह जर्मनी की ओर से खेलें। ऐसे त्यागी खिलाड़ी को भारत रत्न न मिलना बेहद कष्टदायी है। जरूरत है कि उत्तर प्रदेश के सभी नागरिक भारत रत्न की मांग पर आगे आए।
मोहम्मद जावेद नेशनल अंपायर
अब देश भी दद्दा के लिए आगे आए
भले ही हमने दद्दा का खेल नहीं देखा है। लेकिन इतना जरूर जानती हूं कि उन्होंने अपने खेल से देश का नाम सदैव उच्च रखा। अब जरूरी है कि देश भी उनके लिए आगे आए।
मोहनी कुशवाहा उत्तर प्रदेश जूनियर टीम की सदस्या
गर्व है अपने ध्यानचंद पर
हाकी जादूगर ने खेल को हमेशा प्राथमिकता दी। आज जिस हीरोज मैदान में हम खेल रहे है, कभी इस मैदान में दद्दा ध्यानचंद खेलते थे। गर्व है हमें अपने ध्यानचंद पर।
मेघा सक्सेना हाकी प्लेयर
उपेक्षित ह ैध्यानचंद की प्रतिमा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा स्थल को लगता है हम सहेज नहीं पा रहे है। सीपरी में लहर गिर्द की पहाड़ियों के बीच खड़ी दद्दा की विशाल प्रतिभा की हाकी स्टिक व गेंद पर युवाओं ने अपने नाम अंकित कर दिए। सुरक्षा के लिए रेलिंग नहीं है। आसपास गंदगी फैली है। सीढ़ियां भी कई जगह से उखड़ गई हैं।
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सब हेड - भारत रत्न मिले मेजर को, एक स्वर में बोले खिलाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना ही चाहिए। क्योंकि आज दुनिया में जो साख भारतीय क्रिकेट की है। इससे भी कही ज्यादा साख ध्यानचंद ने हाकी की बनाई। दुनिया के अधिकांश मुल्क आज भी मेजर की जादूगरी की कायल है। इसके अलावा देश में राष्ट्रीय खेल हाकी है, तो दद्दा की बदौलत। यह कहना है पूर्व अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, वर्तमान हाकी खिलाड़ियों का।
क्षेत्रीय राजनीतिज्ञ आगे आएं
आज जंतर-मंतर पर दद्दा को भारत रत्न देने की मांग पर सभी राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी धरना दे रहे है। आवश्यकता है क ी झांसी के राजनीतिज्ञ इस मांग पर आगे आए । देश की राजनीति में झांसी के क्षेत्रीय नेता काफी सशक्त है।
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अशोक सेन पाली वर्ष 1980 में भारतीय हाकी कैंप के सदस्य
पाठ्यक्रम में शामिल करें
यह तय है कि मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न से मिलने से देश क ी हाकी एक बार फिर मजबूत होगी। इसके अलावा जरूरी है कि स्कूलों के पाठ्यक्रमोें में मेजर ध्यानचंद की जीवनी शामिल की जाए। जिससे विद्यार्थी मैथलीशरण गुप्त, वृंदावन लाल वर्मा की तरह ध्यानचंद को बारीकी से जान सके।
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सुबोध खंडकर भारतीय हाकी टीम के पूर्व कप्तान
वास्तविक हकदार तो ध्यानचंद हैं
भारत रत्न के वास्तविक हकदार तो ध्यानचंद ही है। उनके खेल ने दुनिया को दिखाया कि भारतीय भी बहुत कुछ कर सकते है। जिस समय हमारे देश में संसाधनों की कमी थी। उस दौरान उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व अपने खेल से खूबसूरती से किया।
सुनीता तिवारी उत्तर प्रदेश महिला हाकी टीम क ी पूर्व सदस्या
भारत रत्न की मांग पर आगे आए प्रदेश
देश के असली सपूत है ध्यानचंद। जिन्होंने हिटलर के आफर को ठुकरा दिया कि वह जर्मनी की ओर से खेलें। ऐसे त्यागी खिलाड़ी को भारत रत्न न मिलना बेहद कष्टदायी है। जरूरत है कि उत्तर प्रदेश के सभी नागरिक भारत रत्न की मांग पर आगे आए।
मोहम्मद जावेद नेशनल अंपायर
अब देश भी दद्दा के लिए आगे आए
भले ही हमने दद्दा का खेल नहीं देखा है। लेकिन इतना जरूर जानती हूं कि उन्होंने अपने खेल से देश का नाम सदैव उच्च रखा। अब जरूरी है कि देश भी उनके लिए आगे आए।
मोहनी कुशवाहा उत्तर प्रदेश जूनियर टीम की सदस्या
गर्व है अपने ध्यानचंद पर
हाकी जादूगर ने खेल को हमेशा प्राथमिकता दी। आज जिस हीरोज मैदान में हम खेल रहे है, कभी इस मैदान में दद्दा ध्यानचंद खेलते थे। गर्व है हमें अपने ध्यानचंद पर।
मेघा सक्सेना हाकी प्लेयर
उपेक्षित ह ैध्यानचंद की प्रतिमा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा स्थल को लगता है हम सहेज नहीं पा रहे है। सीपरी में लहर गिर्द की पहाड़ियों के बीच खड़ी दद्दा की विशाल प्रतिभा की हाकी स्टिक व गेंद पर युवाओं ने अपने नाम अंकित कर दिए। सुरक्षा के लिए रेलिंग नहीं है। आसपास गंदगी फैली है। सीढ़ियां भी कई जगह से उखड़ गई हैं।