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चैत्र नवरात्र: भक्तों ने मां शैलपुत्री की पूजा कर मांगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर-बानपुर। चैत्र नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरों व घरों में श्रद्धालुओं ने कलश स्थापना कर माता के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही घर व मंदिरों में छंद भी गाए। घरों में श्री दुर्गा सप्तसती का पाठ किया।
देवी मंदिरों में प्रातः चार बजे से ही भक्त पहुंचने प्रारंभ हो गए। श्रद्धालुओं ने माता रानी को जलार्पित कर घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के बीच पूजा-अर्चना की। माता के समक्ष घी का दीपक व कपूर की बाती प्रज्ज्वलित कर लौंग, मिष्ठान, मेवा, फल, पुष्प अर्पित किए। माता को लाल चुनरी ओढ़ाई और शृंगार का सामान अर्पित कर मां दुर्गा की आरती व चालीसा का पाठ किया। घरों पर भी श्रद्धालुओं ने विधिवत कलश स्थापना व जवारे बोकर मां का आह्वान किया और लाल चुनरी चढ़ाकर सिंदूर से तिलक किया। पुष्प अर्पित कर माला पहनाई व फल, मेवे और शृंगार सामग्री माता के समक्ष रख पूजा-अर्चना की।
प्रथम दिन मां शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की गई। हिमालय राज के घर जन्म लेने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। मां शैलपुत्री श्रद्धालुओं को रोगमुक्त कर दरिद्रता को दूर करती हैं। मंदिरों पर सुबह-शाम श्रद्धालुओं की भीड़ रही। श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ उपवास भी रख रहे हैं।
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नवसंवत्सर के अवसर पर श्री सिद्धपीठ पर हुआ ध्वजारोहण
ललितपुर। श्री सिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम पर धर्म ध्वजारोहण एवं श्री शतचंडी महायज्ञ की पीठ स्थापना का कार्यक्रम राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ व चंडी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वरगिरि महाराज के पावन सानिध्य में हुआ। पूजा पाठ कर धर्म ध्वजा की स्थापना की गई। स्वामी चंद्रेश्वरगिरि महाराज ने कहा कि संवत्सर का अर्थ पूर्ण वर्ष होता है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्माजी ने संपूर्ण सृष्टि व लोकों का सृजन किया था। इस दिन सभी देवी देवताओं का पूजन किया जाता है। साथ ही घर पर ध्वज की स्थापना की जाती है। इस दिन से मां दुर्गा के चैत्र नवरात्र का पर्व भी शुरू होता है। व्यक्ति नौ दिवस मां की आराधना करता है। इसलिए हिंदू नवसंवत्सर पर विभिन्न धार्मिक आयोजन होते हैं। ध्वजारोहण के पश्चात पीठपूजन किया गया। इस दौरान अवध बिहारी उपाध्याय, शत्रुधन यादव, अनूप मोदी, गोलू पुराहित, राहुल शुक्ला, पं. कमलेश गोस्वामी, सोनू चौबे, जितेंद्र जैन, रामशंकर लिटौरिया, दीपक यादव आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
-- -- -- -- -कलश यात्रा निकाल शुरू हुई मां काली की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा
बार। नवरात्र के प्रथम दिन कस्बा में नवनिर्मित मंदिर में काली माता की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए कलशयात्रा निकाली गई। आचार्य पंडित अनुज कुमार पांडेय व आचार्य पंडित सोनू दुबे आदि मौजूद रहे। आचार्य ने बताया कि प्रथम दिवस में कलश यात्रा एवं पंचांग पूजन आदि एवं द्वितीय दिवस में जलाधिवास, तृतीय दिवस में अन्नाधिवास, चतुर्थ दिवस में पुष्पाधिवास, फलाधिवास, मिष्ठानाधिवास, शर्कराधिवास, घृताधिवास एवं जलाभिषेक प्राण प्रतिष्ठा और प्रसाद वितरण किया जाएगा। माता काली का मंदिर इस क्षेत्र में अभी तक नहीं था।
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ललितपुर-बानपुर। चैत्र नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरों व घरों में श्रद्धालुओं ने कलश स्थापना कर माता के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही घर व मंदिरों में छंद भी गाए। घरों में श्री दुर्गा सप्तसती का पाठ किया।
देवी मंदिरों में प्रातः चार बजे से ही भक्त पहुंचने प्रारंभ हो गए। श्रद्धालुओं ने माता रानी को जलार्पित कर घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के बीच पूजा-अर्चना की। माता के समक्ष घी का दीपक व कपूर की बाती प्रज्ज्वलित कर लौंग, मिष्ठान, मेवा, फल, पुष्प अर्पित किए। माता को लाल चुनरी ओढ़ाई और शृंगार का सामान अर्पित कर मां दुर्गा की आरती व चालीसा का पाठ किया। घरों पर भी श्रद्धालुओं ने विधिवत कलश स्थापना व जवारे बोकर मां का आह्वान किया और लाल चुनरी चढ़ाकर सिंदूर से तिलक किया। पुष्प अर्पित कर माला पहनाई व फल, मेवे और शृंगार सामग्री माता के समक्ष रख पूजा-अर्चना की।
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प्रथम दिन मां शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की गई। हिमालय राज के घर जन्म लेने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। मां शैलपुत्री श्रद्धालुओं को रोगमुक्त कर दरिद्रता को दूर करती हैं। मंदिरों पर सुबह-शाम श्रद्धालुओं की भीड़ रही। श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ उपवास भी रख रहे हैं।
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नवसंवत्सर के अवसर पर श्री सिद्धपीठ पर हुआ ध्वजारोहण
ललितपुर। श्री सिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम पर धर्म ध्वजारोहण एवं श्री शतचंडी महायज्ञ की पीठ स्थापना का कार्यक्रम राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ व चंडी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वरगिरि महाराज के पावन सानिध्य में हुआ। पूजा पाठ कर धर्म ध्वजा की स्थापना की गई। स्वामी चंद्रेश्वरगिरि महाराज ने कहा कि संवत्सर का अर्थ पूर्ण वर्ष होता है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्माजी ने संपूर्ण सृष्टि व लोकों का सृजन किया था। इस दिन सभी देवी देवताओं का पूजन किया जाता है। साथ ही घर पर ध्वज की स्थापना की जाती है। इस दिन से मां दुर्गा के चैत्र नवरात्र का पर्व भी शुरू होता है। व्यक्ति नौ दिवस मां की आराधना करता है। इसलिए हिंदू नवसंवत्सर पर विभिन्न धार्मिक आयोजन होते हैं। ध्वजारोहण के पश्चात पीठपूजन किया गया। इस दौरान अवध बिहारी उपाध्याय, शत्रुधन यादव, अनूप मोदी, गोलू पुराहित, राहुल शुक्ला, पं. कमलेश गोस्वामी, सोनू चौबे, जितेंद्र जैन, रामशंकर लिटौरिया, दीपक यादव आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
बार। नवरात्र के प्रथम दिन कस्बा में नवनिर्मित मंदिर में काली माता की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए कलशयात्रा निकाली गई। आचार्य पंडित अनुज कुमार पांडेय व आचार्य पंडित सोनू दुबे आदि मौजूद रहे। आचार्य ने बताया कि प्रथम दिवस में कलश यात्रा एवं पंचांग पूजन आदि एवं द्वितीय दिवस में जलाधिवास, तृतीय दिवस में अन्नाधिवास, चतुर्थ दिवस में पुष्पाधिवास, फलाधिवास, मिष्ठानाधिवास, शर्कराधिवास, घृताधिवास एवं जलाभिषेक प्राण प्रतिष्ठा और प्रसाद वितरण किया जाएगा। माता काली का मंदिर इस क्षेत्र में अभी तक नहीं था।