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पंचायतों की जेब खाली, ठप पड़ा विकास का पहिया
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devlopment work stopped in gram panchayat
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झांसी। लॉकडॉउन की वजह से पंचायत स्तर पर भी कार्य ठप पड़े हैं। उनको नया बजट अभी तक आवंटित नहीं हुआ जबकि पिछले वित्तीय वर्ष का पैसा भी वापस लिया जा चुका। ऐसे में पंचायतों के पास पैसा न होने से गांवों में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ चुके हैं। गर्मियों के शुरू होने के साथ पेयजल की अस्थाई व्यवस्था समेत नालियों की सफाई जैसे जरूरी कार्य भी नहीं हो रहे हैं।
वित्तीय वर्ष खत्म होने के साथ मार्च में शेष धनराशि वापस करनी होती है। अमूमन इस रकम के वापस होने के कुछ समय बाद ही नए वित्तीय वर्ष के लिए बजट आवंटित हो जाता है। यह रकम पंचायतों के आकार पर निर्भर करती है लेकिन, इस दफे नए वित्तीय वर्ष के पहले तिमाही तक पंचायतों तक पैसा ही नहीं पहुंचा। इसका सीधा असर 496 ग्राम सभाओं के कार्यों पर पड़ रहा है। यहां बामौर, गुरसराय, बबीना जैसे इलाकों में गर्मियों में पीने के पानी की व्यवस्था टैंकरों के जरिए करानी पड़ती है। पंचायत स्तर पर इन टैंकरों की व्यवस्था होती है लेकिन, इस दफे इनकी व्यवस्था में पंचायतों के पसीने छूट रहे। इन इलाकों में कुछ ही जगह टैंकर की व्यवस्था हुई। उसकी भी व्यवस्था राज्य वित्त आयोग की मदद से की गई। कई इलाकों में मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के बावजूद भी बजट के अभाव में उनका निर्माण नहीं हो पा रहा। जुलाई माह से बारिश आरंभ हो जाने से भी यह कार्य आगे ठप रहेगा।
इसी तरह मानसून से पहले नाले- नालियों की सफाई जैसे जरूरी काम भी बजट न होने से ठप पड़ा है। वहीं, चुनावी रणनीति के चलते पंचायत इस काम में राज्य वित्त आयोग एवं 14वें वित्त आयोग से मिली धनराशि को खर्च नहीं करना चाहते। ग्राम प्रधान आने वाले चुनाव को देखते हुए इन पैसों को सिर्फ बड़े निर्माण में खर्च करना चाहते हैं। उधर, ग्राम पंचायत अधिकारियों का दावा है बजट के अभाव में कोई कार्य प्रभावित नहीं हो रहा। डीपीआरओ जगदीश राम का कहना है आवश्यक कार्यों को तत्काल कराने के निर्देश दिए जाते हैं। बजट की जल्द स्वीकृति की शासन से मांग की गई है।
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वित्तीय वर्ष खत्म होने के साथ मार्च में शेष धनराशि वापस करनी होती है। अमूमन इस रकम के वापस होने के कुछ समय बाद ही नए वित्तीय वर्ष के लिए बजट आवंटित हो जाता है। यह रकम पंचायतों के आकार पर निर्भर करती है लेकिन, इस दफे नए वित्तीय वर्ष के पहले तिमाही तक पंचायतों तक पैसा ही नहीं पहुंचा। इसका सीधा असर 496 ग्राम सभाओं के कार्यों पर पड़ रहा है। यहां बामौर, गुरसराय, बबीना जैसे इलाकों में गर्मियों में पीने के पानी की व्यवस्था टैंकरों के जरिए करानी पड़ती है। पंचायत स्तर पर इन टैंकरों की व्यवस्था होती है लेकिन, इस दफे इनकी व्यवस्था में पंचायतों के पसीने छूट रहे। इन इलाकों में कुछ ही जगह टैंकर की व्यवस्था हुई। उसकी भी व्यवस्था राज्य वित्त आयोग की मदद से की गई। कई इलाकों में मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के बावजूद भी बजट के अभाव में उनका निर्माण नहीं हो पा रहा। जुलाई माह से बारिश आरंभ हो जाने से भी यह कार्य आगे ठप रहेगा।
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इसी तरह मानसून से पहले नाले- नालियों की सफाई जैसे जरूरी काम भी बजट न होने से ठप पड़ा है। वहीं, चुनावी रणनीति के चलते पंचायत इस काम में राज्य वित्त आयोग एवं 14वें वित्त आयोग से मिली धनराशि को खर्च नहीं करना चाहते। ग्राम प्रधान आने वाले चुनाव को देखते हुए इन पैसों को सिर्फ बड़े निर्माण में खर्च करना चाहते हैं। उधर, ग्राम पंचायत अधिकारियों का दावा है बजट के अभाव में कोई कार्य प्रभावित नहीं हो रहा। डीपीआरओ जगदीश राम का कहना है आवश्यक कार्यों को तत्काल कराने के निर्देश दिए जाते हैं। बजट की जल्द स्वीकृति की शासन से मांग की गई है।
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