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झांसी : भारत और रूस का संयुक्त युद्धाभ्यास देखने आ सकते हैं रक्षा मंत्री
Tue, 17 Dec 2019 09:03 PM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 17 Dec 2019 09:03 PM IST
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Rajnath Singh
- फोटो : अमर उजाला
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह 19 दिसंबर को झांसी की बबीना छावनी आ सकते हैं। यहां चल रहे भारत-रूस संयुक्त सैन्याभ्यास इंद्र-2019 के समापन समारोह में दोनों सेनाएं बबीना छावनी फायरिंग रेंज में बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास करेंगी। दोनों ही सेनाओं की क्षमताओं को देखने और उनका उत्साहवर्धन करने रक्षामंत्री के आने की अनौपचारिक सूचना है। उनके आगमन को लेकर बबीना छावनी में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
बबीना छावनी में 11 दिसंबर को युद्धाभ्यास शुरू हुआ। भारत-रूस की थल सेना, वायु सेना और नौसेना पहली बार संयुक्त रूप से भारत में सैन्याभ्यास कर रही हैं। दोनों थल सेनाओं के बीच इसकी शुरुआत 2003 में हुई थी। इससे पहले पांच बार रूस में और पांच बार भारत में थल सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास हो चुका है।
रक्षामंत्री संयुक्त राष्ट्र की पहल पर वैश्विक आतंक के खिलाफ इस महत्वपूर्ण मुहिम और दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने वाली कार्रवाई का साक्षी बन सकते हैं। 19 दिसंबर को बड़े पैमाने पर टैंक, तोप, रॉकेट लांचर, एलएमजी समेत अन्य हथियारों से हमले के बीच वायु सेना की भी सक्रिय सहभागिता रहेगी।
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इंद्र-2019 के तहत बबीना के साथ ही गोवा और पुणे में भी दोनों देशों की नौसेना और वायुसेना का संयुक्त अभ्यास चल रहा है। इस सैन्याभ्यास का मुख्यालय बबीना छावनी में ही बनाया गया है।
वहीं भारत रूस संयुक्त सैन्य अभ्यास इंद्र 2019 के तहत बबीना छावनी की फायरिंग रेंज में भारत और रूस की सेनाओं ने रिहायशी इलाके में गढ़ बनाए आतंकी संगठन पर हमले का युद्धाभ्यास किया। इस दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने वायु सेना के सहयोग से अपने अपने रण कौशल का प्रदर्शन कर आतंकियों के ठिकाने और आतंकियों का खात्मा किया।
भारत की सेना ने खास रणनीति के तहत दुश्मन की छाती पर कमांडोज को उतारकर t90 टैंक और बीएमपी के कवर फायर के बीच कार्रवाई की। वहीं रूस की सेना ने आक्रमक गोलाबारी के बीच आतंकियों के पांव उखाड़े।
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बबीना छावनी में 11 दिसंबर को युद्धाभ्यास शुरू हुआ। भारत-रूस की थल सेना, वायु सेना और नौसेना पहली बार संयुक्त रूप से भारत में सैन्याभ्यास कर रही हैं। दोनों थल सेनाओं के बीच इसकी शुरुआत 2003 में हुई थी। इससे पहले पांच बार रूस में और पांच बार भारत में थल सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास हो चुका है।
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रक्षामंत्री संयुक्त राष्ट्र की पहल पर वैश्विक आतंक के खिलाफ इस महत्वपूर्ण मुहिम और दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने वाली कार्रवाई का साक्षी बन सकते हैं। 19 दिसंबर को बड़े पैमाने पर टैंक, तोप, रॉकेट लांचर, एलएमजी समेत अन्य हथियारों से हमले के बीच वायु सेना की भी सक्रिय सहभागिता रहेगी।
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इंद्र-2019 के तहत बबीना के साथ ही गोवा और पुणे में भी दोनों देशों की नौसेना और वायुसेना का संयुक्त अभ्यास चल रहा है। इस सैन्याभ्यास का मुख्यालय बबीना छावनी में ही बनाया गया है।
वहीं भारत रूस संयुक्त सैन्य अभ्यास इंद्र 2019 के तहत बबीना छावनी की फायरिंग रेंज में भारत और रूस की सेनाओं ने रिहायशी इलाके में गढ़ बनाए आतंकी संगठन पर हमले का युद्धाभ्यास किया। इस दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने वायु सेना के सहयोग से अपने अपने रण कौशल का प्रदर्शन कर आतंकियों के ठिकाने और आतंकियों का खात्मा किया।
भारत की सेना ने खास रणनीति के तहत दुश्मन की छाती पर कमांडोज को उतारकर t90 टैंक और बीएमपी के कवर फायर के बीच कार्रवाई की। वहीं रूस की सेना ने आक्रमक गोलाबारी के बीच आतंकियों के पांव उखाड़े।