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कोरोना से छोड़े गहरे जख्म, किसी ने आत्महत्या का किया प्रयास, कोई सदमे से नहीं उबरा
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झांसी। कोरोना काल में लोगों के बिगड़े मानसिक हालात अब तक सुधर नहीं पाए हैं। कई लोग अब तक कोरोना में मिले जख्मों को भूले नहीं हैं। काम धंधा चौपट होने की वजह से किसी ने आत्महत्या का प्रयास किया है। जबकि, कोई सदमे से उबर नहीं पाया है। यहां तक कि फ्रंट लाइन वर्कर तक पोस्ट क्रोमेटिक स्ट्रेस डिस्ऑर्डर का शिकार डिप्रेशन में चले गए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक झांसी समेत बुंदेलखंड मानसिक रूप से बीमार मरीजों की संख्या में कोरोना काल में 30 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। इन लोगों में अधिकतर बेचैनी, घबराहट, आत्महत्या के विचार, बात-बात पर परेशान रहना, तनाव लेना, नशा करना आदि के मरीज हैं। इसमें फ्रंट लाइन वर्कर तक शामिल हैं। कोरोना के चलते जो आर्थिक तौर पर टूट गए, उन्हें भी गहरा सदमा पहुंचा है। महामारी में अपनों को खो चुके लोग उनकी याद में डिप्रेशन में चले गए हैं। मंडलीय मनोवैज्ञानिक केंद्र झांसी के चिकित्सक मनीष मिश्रा और एलके सिंह का कहना है कि वर्तमान में पांच में से एक व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान है।
केस-1
ठेला लगाकर रोजाना कमाने वाले एक व्यक्ति का कोविड के दौरान धंधा चौपट हो गया। वह डिप्रेशन में चला गया। हालात सामान्य होने पर भी काम पर नहीं लौटा। फिर एक दिन खुद को, तीन बच्चों और पत्नी को खत्म करने के लिए सल्फास लेकर पहुंच गया। पत्नी ने देख लिया तो घटना होने से बच गई। अभी मनोचिकित्सक के पास उसका इलाज चल रहा है।
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केस-2
कोरोना काल में कई लोगों की जान भी गई। रोजाना कई-कई शवों को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचाते-पहुंचाते एक एंबुलेंस चालक इस कदर मानसिक तौर पर बीमार हो गया कि उसे रात में नींद आनी बंद हो गई। सोते समय आंख बंद होते ही लोगों के शव दिखने लगे। नींद के लिए वह आठ-दस गोलियां खाने लगा। अभी उसका भी इलाज चल रहा है।
केस-3
शहर के एक जाने माने डॉक्टर कोरोना की चपेट में आने वाले परिजन का इलाज करने के दौरान बचा नहीं पाया तो डिप्रेशन का शिकार हो गया। वह डिप्रेशन की दवाएं भी खाने लगे। मानसिक तौर पर उन्हें परेशान देखकर परिजन मनोचिकित्सक के पास लेकर पहुंचे। वहां उनकी काउंसलिंग की गई। इलाज शुरू होने के बाद भी वह पूरी तरह डिप्रेशन से उबरे नहीं हैं।
केस-4
खजूर बाग में रहने वाली बालिका कोरोनाकाल के पहले रोजाना स्कूल जाना, खेलकूद, पढ़ाई करने आदि में अपना दिन व्यतीत करती थी। कोरोना शुरू के बाद से उसकी जीवन शैली बदल गई, दिन भर घर में रहना, मोबाइल, इंटरनेट से पढ़ाई करना से उसे घबराहट शुरू हो गई। कई रात नींद नहीं आई तो वह बीमार पड़ गई। वह मनोचिकित्सक की निगरानी में है।
कौन सा मर्ज, कितना बढ़ा
बीमारी इजाफा
डिप्रेशन 30 फीसदी
ओसीडी 40 फीसदी
घबराहट 50 फीसदी
ये लक्षण दिखे तो डॉक्टर को दिखाएं
- व्यवहार में बदलाव
- नींद नहीं आना
- बेवजह शक करना
- खाना-पीना छोड़ देना
- सदमे में आ जाना
- हमेशा थका महसूस करना
ये बोले डॉक्टर
.....................
कोरोना महामारी ने लोगों की मनोदशा पर बहुत असर किया है। लगातार मरीजों की काउंसलिंग की जा रही है। कुछ ऐसे मामले भी सामने आए, जब व्यक्ति ने खुद या फिर परिवार को खत्म करने तक का प्रयास किया। समय रहते इलाज कराने पर बीमारी जल्द ठीक हो जाती है। - डॉ. शिकाफा जाफरीन, मानसिक रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल।
लोगों में मानसिक बीमारियां कोविड के बाद तेजी से बढ़ी हैं। डिप्रेशन से लेकर तमाम मानसिक समस्याओं से मरीज जूझ रहे हैं। कइयों को नींद नहीं आ रही है तो कइयों का व्यवहार बदल गया है। लोगों को अपने परिजन के व्यवहार में बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर काउंसलिंग के लिए लेकर आएं। - डॉ. अर्जित गौरव, मनोरोग विशेषज्ञ।
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विशेषज्ञों के मुताबिक झांसी समेत बुंदेलखंड मानसिक रूप से बीमार मरीजों की संख्या में कोरोना काल में 30 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। इन लोगों में अधिकतर बेचैनी, घबराहट, आत्महत्या के विचार, बात-बात पर परेशान रहना, तनाव लेना, नशा करना आदि के मरीज हैं। इसमें फ्रंट लाइन वर्कर तक शामिल हैं। कोरोना के चलते जो आर्थिक तौर पर टूट गए, उन्हें भी गहरा सदमा पहुंचा है। महामारी में अपनों को खो चुके लोग उनकी याद में डिप्रेशन में चले गए हैं। मंडलीय मनोवैज्ञानिक केंद्र झांसी के चिकित्सक मनीष मिश्रा और एलके सिंह का कहना है कि वर्तमान में पांच में से एक व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान है।
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केस-1
ठेला लगाकर रोजाना कमाने वाले एक व्यक्ति का कोविड के दौरान धंधा चौपट हो गया। वह डिप्रेशन में चला गया। हालात सामान्य होने पर भी काम पर नहीं लौटा। फिर एक दिन खुद को, तीन बच्चों और पत्नी को खत्म करने के लिए सल्फास लेकर पहुंच गया। पत्नी ने देख लिया तो घटना होने से बच गई। अभी मनोचिकित्सक के पास उसका इलाज चल रहा है।
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केस-2
कोरोना काल में कई लोगों की जान भी गई। रोजाना कई-कई शवों को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचाते-पहुंचाते एक एंबुलेंस चालक इस कदर मानसिक तौर पर बीमार हो गया कि उसे रात में नींद आनी बंद हो गई। सोते समय आंख बंद होते ही लोगों के शव दिखने लगे। नींद के लिए वह आठ-दस गोलियां खाने लगा। अभी उसका भी इलाज चल रहा है।
केस-3
शहर के एक जाने माने डॉक्टर कोरोना की चपेट में आने वाले परिजन का इलाज करने के दौरान बचा नहीं पाया तो डिप्रेशन का शिकार हो गया। वह डिप्रेशन की दवाएं भी खाने लगे। मानसिक तौर पर उन्हें परेशान देखकर परिजन मनोचिकित्सक के पास लेकर पहुंचे। वहां उनकी काउंसलिंग की गई। इलाज शुरू होने के बाद भी वह पूरी तरह डिप्रेशन से उबरे नहीं हैं।
केस-4
खजूर बाग में रहने वाली बालिका कोरोनाकाल के पहले रोजाना स्कूल जाना, खेलकूद, पढ़ाई करने आदि में अपना दिन व्यतीत करती थी। कोरोना शुरू के बाद से उसकी जीवन शैली बदल गई, दिन भर घर में रहना, मोबाइल, इंटरनेट से पढ़ाई करना से उसे घबराहट शुरू हो गई। कई रात नींद नहीं आई तो वह बीमार पड़ गई। वह मनोचिकित्सक की निगरानी में है।
कौन सा मर्ज, कितना बढ़ा
बीमारी इजाफा
डिप्रेशन 30 फीसदी
ओसीडी 40 फीसदी
घबराहट 50 फीसदी
ये लक्षण दिखे तो डॉक्टर को दिखाएं
- व्यवहार में बदलाव
- नींद नहीं आना
- बेवजह शक करना
- खाना-पीना छोड़ देना
- सदमे में आ जाना
- हमेशा थका महसूस करना
ये बोले डॉक्टर
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कोरोना महामारी ने लोगों की मनोदशा पर बहुत असर किया है। लगातार मरीजों की काउंसलिंग की जा रही है। कुछ ऐसे मामले भी सामने आए, जब व्यक्ति ने खुद या फिर परिवार को खत्म करने तक का प्रयास किया। समय रहते इलाज कराने पर बीमारी जल्द ठीक हो जाती है। - डॉ. शिकाफा जाफरीन, मानसिक रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल।
लोगों में मानसिक बीमारियां कोविड के बाद तेजी से बढ़ी हैं। डिप्रेशन से लेकर तमाम मानसिक समस्याओं से मरीज जूझ रहे हैं। कइयों को नींद नहीं आ रही है तो कइयों का व्यवहार बदल गया है। लोगों को अपने परिजन के व्यवहार में बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर काउंसलिंग के लिए लेकर आएं। - डॉ. अर्जित गौरव, मनोरोग विशेषज्ञ।