फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Daughters ' manly ' making Mewalal

बेटियों को ‘मर्दानी’ बना रहे मेवालाल

Mon, 06 Jun 2016 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 06 Jun 2016 12:26 AM IST
विज्ञापन
Daughters ' manly ' making Mewalal
ummed k masal, jhansi news - फोटो : demo
झांसी। किसी लड़की के साथ कोई अपमानजनक घटना होने पर उसकी याद में मोमबत्ती जलाने से बेहतर है कि बेटियों को आत्मरक्षा में आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि वह विपरीत परिस्थितियों में मदद के लिए किसी की मोहताज न रहेें। वह खुद डटकर मुकाबला कर सकें।
विज्ञापन


यह कहना है जाने माने कराटे एक्सपर्ट मेवालाल राजपूत का, जो पिछले तीन दशकों से बेटियों को आत्मरक्षा में आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम छेड़े हुए हैं। अब तक पचास हजार से अधिक लड़कियों को वह कराटे का प्रशिक्षण दे चुके हैं।
विज्ञापन


एक समय नाना साहब ने रानी लक्ष्मीबाई को आत्मरक्षा और युद्ध कौशल में इस कदर पारंगत किया था कि उन्होंने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। आज आजाद भारत में नगरा के खैरा निवासी मेवालाल लड़कियों को आत्मरक्षा के गुर सिखा कर उनमें आत्मविश्वास पैदा कर रहे हैं। चौथा दान ब्लैक बेल्ट मेवालाल वैसे तो उम्र के 59 वसंत पार कर चुके हैं, लेकिन चुस्ती-फुर्ती नौजवानों को भी मात देती है। सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट में वह सुबह चार बजे पहुंच जाते हैं और शुरू हो जाती हैप्रैक्टिस व प्रशिक्षण।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले चालीस साल से उनका यह क्रम अनवरत रूप से जारी है। मेवालाल ने बताया कि शुरुआती दौर में कराटे केवल लड़कों का खेल माना जाता था, परंतु अब यह लड़कियों का रक्षा सूत्र बन गया है। इसे बालिकाओं तक पहुंचाने में उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी। सफलता उन्हें पिछले एक दशक के दौरान मिली।

वह अब तक पचास हजार से अधिक बालिकाओं को कराटे का प्रशिक्षण दे चुके हैं। झांसी ही नहीं, बल्कि आसपास के जनपदों के शिक्षण संस्थानों में भी वह प्रशिक्षण देते आ रहे हैं। जीवन की आखिरी सांस तक उन्होंने यह मुहिम जारी रखने का संकल्प ले रखा है।

शाहीन को बनाया पहली महिला इंस्ट्रक्टर
मेवालाल राजपूत से कराटे का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली लड़कियों में पहला नाम शाहीन परवीन का आता है। शाहीन बुंदेलखंड की पहली महिला कराटे इंस्ट्रक्टर हैं। इसके अलावा अखिल भारतीय स्तर पर वह कराटे की ‘सी’ ग्रेड रेफ्री हैं। वह कहती हैं कि कराटे केवल आत्मरक्षा के लिए ही जरूरी नहीं हैं, बल्कि इससे आत्मविश्वास व एकाग्रता भी बढ़ती है। आज के दौर में महिलाओं को आत्मरक्षा की इस विधा का ज्ञान होना जरूरी है।  

पिंकी भी बनी हैं मुहिम का हिस्सा
पिंकी रायकवार का नाम भी मेवालाल राजपूत से प्रशिक्षण लेने वाली लड़कियों में ऊपर है। फर्स्ट दान ब्लैक बेल्ट पिंकी बुंदेलखंड की दूसरी महिला कराटे इंस्ट्रक्टर हैं। वह कई बालिका शिक्षण संस्थानों से बतौर कराटे प्रशिक्षक जुड़ी हुई हैं और मलिन बस्तियों में अलग से कैंप लगाकर बालिकाओं को कराटे सिखाती हैं। पिंकी कहती हैं कि कराटे का प्रशिक्षण बालिका विद्यालयों में अनिवार्य किया जाना चाहिए। यह एक विषय होना चाहिए।

बालिकाओं को देते हैं नि:शुल्क प्रशिक्षण
कराटे एक्सपर्ट मेवालाल राजपूत की आजीविका का साधन कराटे ही है। वह तमाम शिक्षण संस्थाओं में बच्चों को कराटे का प्रशिक्षण देते हैं। लेकिन, उनके व्यक्तित्व का दूसरा पहलू यह भी है कि वह नगर में विभिन्न स्थानों पर बड़े पैमाने पर कैंप आयोजित कर बालिकाओं को नि:शुल्क कराटे सिखाते हैं।


किसी भी संस्था द्वारा उनके सामने यह प्रस्ताव लाने पर वह सहर्ष तैयार हो जाते हैं। इसके अलावा सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट में भी वह बच्चों को नि:शुल्क कराटे सिखाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed