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बेतवा किनारे बसे गांवों तक पहुंच रहे मगरमच्छ, अब तक 20 पकड़े गए
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झांसी। लगातार होने वाली बरसात से बेतवा का जल स्तर बढ़ रहा है। जलीय जीवों की संख्या में भी तेजी के साथ इजाफा हुआ है। मगरमच्छों का कुनबा भी तेजी से बढ़ा है। वन विभाग का अनुमान है कि नदी में 1000 से अधिक मगरमच्छ हैं। जुलाई और अगस्त माह में ही 20 गांवों तक मगरमच्छ पहुंचे जिन्हें वन विभाग की टीम ने काबू कर नदी में छोड़ा। कई जगह तो सड़कों तक पर नजर आने लगे हैं।
बुंदेलखंड की गंगा कही जाने वाली बेतवा नदी की मंडल में शुरूआत ललितपुर स्थित राजघाट बांध से होती है जो लगभग साढ़े तीन सौ किलोमीटर का सफर तय करते हुए गरौठा स्थित ग्राम देवरी होते हुए हमीरपुर तक जाती है।
वर्तमान में मध्य प्रदेश के शहरों में बारिश का आंकड़ा औसत से अधिक होने के कारण बेतवा नदी का जल स्तर काफी बढ़ गया है। जिसके चलते पानी के बहाव भी तेज हो गया है। बहाव के कारण नदी में अचानक ही मगरमच्छों की संख्या में इजाफा हो गया है।
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इन गांवों में पकड़े गए मगरमच्छ
झांसी के उजयान, धमना खुर्द, खडेश्वर, पारीछा गांव और ललितपुर के जखौरा, अमोरा, लागौन, गुलेंदा, खुरा, नोहरकला, जमौरा माठी, सीरोन कला, थनवारा सहित कई गांवों में मगरमच्छ पकड़े जा चुके हैं।
झुंड में रहना करते है पसंद
विभागीय अधिकारियों के अनुसार मगरमच्छ झुंड में रहना पसंद करते हैं। एक साथ रहकर यह प्रजनन की प्रक्रिया करते हैं और नदी के किनारे रेत पर ही अंडों को छुपा देते हैं। मादा मगरमच्छ औसतन 30 से 40 अंडे देती है। जिसमें से जून व जुलाई के माह में ही बच्चे निकलते हैं।
बेतवा नदी में जलीय जीव तेजी के साथ बढ़े हैं। मगरमच्छ की संख्या में भी इजाफा हुआ है। नदी के जल स्तर में तेजी होने के कारण मगरमच्छ को शिकार नहीं मिल रहा है। जिसके चलते नदी से सटे गांवों में पहुंच रहे हैं। सूचना मिलने पर विभागीय टीम द्वारा मगरमच्छ को पकड़कर वापस नदी में छोड़ा जा रहा है।
पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक बुंदेलखंड जोन
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बुंदेलखंड की गंगा कही जाने वाली बेतवा नदी की मंडल में शुरूआत ललितपुर स्थित राजघाट बांध से होती है जो लगभग साढ़े तीन सौ किलोमीटर का सफर तय करते हुए गरौठा स्थित ग्राम देवरी होते हुए हमीरपुर तक जाती है।
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वर्तमान में मध्य प्रदेश के शहरों में बारिश का आंकड़ा औसत से अधिक होने के कारण बेतवा नदी का जल स्तर काफी बढ़ गया है। जिसके चलते पानी के बहाव भी तेज हो गया है। बहाव के कारण नदी में अचानक ही मगरमच्छों की संख्या में इजाफा हो गया है।
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इन गांवों में पकड़े गए मगरमच्छ
झांसी के उजयान, धमना खुर्द, खडेश्वर, पारीछा गांव और ललितपुर के जखौरा, अमोरा, लागौन, गुलेंदा, खुरा, नोहरकला, जमौरा माठी, सीरोन कला, थनवारा सहित कई गांवों में मगरमच्छ पकड़े जा चुके हैं।
झुंड में रहना करते है पसंद
विभागीय अधिकारियों के अनुसार मगरमच्छ झुंड में रहना पसंद करते हैं। एक साथ रहकर यह प्रजनन की प्रक्रिया करते हैं और नदी के किनारे रेत पर ही अंडों को छुपा देते हैं। मादा मगरमच्छ औसतन 30 से 40 अंडे देती है। जिसमें से जून व जुलाई के माह में ही बच्चे निकलते हैं।
बेतवा नदी में जलीय जीव तेजी के साथ बढ़े हैं। मगरमच्छ की संख्या में भी इजाफा हुआ है। नदी के जल स्तर में तेजी होने के कारण मगरमच्छ को शिकार नहीं मिल रहा है। जिसके चलते नदी से सटे गांवों में पहुंच रहे हैं। सूचना मिलने पर विभागीय टीम द्वारा मगरमच्छ को पकड़कर वापस नदी में छोड़ा जा रहा है।
पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक बुंदेलखंड जोन