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‘सुराग’ के बाद भी राहुल ‘बेसुराग’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Mar 2016 12:53 AM IST
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- फोटो : demo
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झांसी। पुलिस की लापरवाही के कारण सुराग हाथ लगने के बाद भी 78 दिन पहले अगवा राहुल तिवारी बेसुराग है। राहुल का दोस्त अब तक पुलिस की पकड़ में नहीं आ सका है। दर-दर भटक रही पीड़ित मां को सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। चौकी इंचार्ज से लेकर पुलिस कप्तान तक एक ही जवाब दे रहे हैं, ‘जांच प्रगति पर है जल्द खुलासा होगा।’
प्रेमनगर के रानी लक्ष्मी नगर निवासी राहुल तिवारी 20 दिसंबर को मां ऊषा तिवारी से मिलकर घर से गया था। इसके बाद उसका पता नहीं चल सका। परेशान मां ने दोस्तों से संपर्क साधा, तो उन्होंने 20 दिसंबर की दोपहर राहुल को दो दोस्तों के साथ बस स्टैंड की तरफ जाते हुए देखने की जानकारी दी। सूचना पर पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया था।
जांच के दौरान पुलिस के हाथ कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर लगे, जिसमें एक महिला का था।
एक मार्च को पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उसने खुलासा किया कि राहुल से उसके प्रेम संबंध थे। कुछ दिन बाद राहुल का दोस्त भी उससे प्यार करने लगा था। दोस्त को राहुल का घर आना अच्छा नहीं लगता था। पांच दिसंबर को राहुल के दोस्त ने उसे चुपचाप हंसारी में किराये का मकान दिलवा दिया था, जहां वह बेटी के साथ रहने लगी थी। 20 दिसंबर की सुबह उसने राहुल को मिलने के लिए चित्रा चौराहा पर बुलाया था, जहां दोनों ने चाय पी। तभी वहां पर उसका दूसरा प्रेमी अपने साथी के साथ आ गया। दोनों लोग राहुल को अपने साथ ले गए।
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गौरतलब है कि इतनी जानकारी होने के बाद भी पुलिस ने अभी तक राहुल को साथ ले जाने वाले दोनों दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ नहीं की है। उधर, मां ऊषा पुत्र की तलाश के लिए अफसरों के दर पर चक्कर लगा रही है। इस मामले में विवेचक सुनीत का कहना कि मामले की जांच चल रही है। महिला के साथ चल रहे प्रेम प्रसंग के अलावा एक अन्य दिशा में भी जांच की जा रही है।
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प्रेमनगर के रानी लक्ष्मी नगर निवासी राहुल तिवारी 20 दिसंबर को मां ऊषा तिवारी से मिलकर घर से गया था। इसके बाद उसका पता नहीं चल सका। परेशान मां ने दोस्तों से संपर्क साधा, तो उन्होंने 20 दिसंबर की दोपहर राहुल को दो दोस्तों के साथ बस स्टैंड की तरफ जाते हुए देखने की जानकारी दी। सूचना पर पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया था।
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जांच के दौरान पुलिस के हाथ कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर लगे, जिसमें एक महिला का था।
एक मार्च को पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उसने खुलासा किया कि राहुल से उसके प्रेम संबंध थे। कुछ दिन बाद राहुल का दोस्त भी उससे प्यार करने लगा था। दोस्त को राहुल का घर आना अच्छा नहीं लगता था। पांच दिसंबर को राहुल के दोस्त ने उसे चुपचाप हंसारी में किराये का मकान दिलवा दिया था, जहां वह बेटी के साथ रहने लगी थी। 20 दिसंबर की सुबह उसने राहुल को मिलने के लिए चित्रा चौराहा पर बुलाया था, जहां दोनों ने चाय पी। तभी वहां पर उसका दूसरा प्रेमी अपने साथी के साथ आ गया। दोनों लोग राहुल को अपने साथ ले गए।
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गौरतलब है कि इतनी जानकारी होने के बाद भी पुलिस ने अभी तक राहुल को साथ ले जाने वाले दोनों दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ नहीं की है। उधर, मां ऊषा पुत्र की तलाश के लिए अफसरों के दर पर चक्कर लगा रही है। इस मामले में विवेचक सुनीत का कहना कि मामले की जांच चल रही है। महिला के साथ चल रहे प्रेम प्रसंग के अलावा एक अन्य दिशा में भी जांच की जा रही है।