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मुठभेड़ या सरेंडर!
झांसी / ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2015 12:40 AM IST
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आखिरकार सरदार सिंह पुलिस की गिरफ्त में आ ही गया। लेकिन कैसे आया, इस को लेकर चरचाएं हैं। उनाव बालाजी थाना पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ में सरदार को गिरफ्तार किया गया, लेकिन हैरत की बात है कि दोनों तरफ से चली गोलियों की तड़तड़ाहट न आसपास के गांवों के लोगों ने सुनी और न क्षेत्र में डेरा डाले पड़ी एसटीएफ व झांसी पुलिस ने। लोगों में मध्य प्रदेश के एक बड़े नेता की मध्यस्थता के बाद सरदार के समर्पण की चर्चा जोरों पर है।
झांसी पुलिस के अलावा लखनऊ की एसटीएफ टीमें करीब छह माह से सीमावर्ती क्षेत्र के जंगलों में इनामी सरदार सिंह की तलाश में डेरा डाले हुए हैं। पिछले दिनों प्रदेश सरकार ने सरदार पर 50 हजार से बढ़ाकर दो लाख रुपये इनाम किया तो पुलिस ने तलाश में पूरी ताकत झोंक दी। सरदार की कुंडली तैयार करके करीब एक दर्जन रिश्तेदारों, शरणदाता व सहयोगी अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। सोमवार की रात में भी झांसी पुलिस की टीमों ने इंदरगढ़ के गांव धनौली में सरदार सिंह की तलाश में छापामारी की। पुलिस की चूक रही या फिर मुखबिरी सटीक नहीं थी, जिसकी वजह से पुलिस ने दूसरे घर में छापा मारा, जबकि बताया जाता है कि पास के दूसरे मकान में सरदार सिंह गुर्जर और उसका पुत्र मौजूद थे, जो भागने में सफल रहे।
इतनी सतर्कता के बावजूद दतिया पुलिस से सरदार की मुठभेड़ होना और इसकी भनक तक उत्तर प्रदेश पुलिस को नहीं लगना, किसी के गले नहीं उतर रहा है। यही नहीं, गिरफ्तार सरदार के हाव भाव भी मुठभेड़ के हालात बयां नहीं कर रहे थे।
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चर्चा है कि दतिया के एक नेता से सरदार सिंह गुर्जर के नजदीकी संबंध हैं। उन्होंने सरदार का समर्पण कराने की भूमिका तैयार की। सेटिंग होने पर सरदार ने इत्मीनान से आत्मसमर्पण किया। उसने बुधवार की सुबह उन्नाव बालाजी स्थित एक मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन किए और कंधे पर थैला टांगकर थाना बालाजी पहुंचा, जहां उसने सरेंडर किया। सरदार के थाने पर समर्पण करने की चर्चा बुधवार की दोपहर से व्हाट एप पर शुरू हो गई थी।
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झांसी पुलिस के अलावा लखनऊ की एसटीएफ टीमें करीब छह माह से सीमावर्ती क्षेत्र के जंगलों में इनामी सरदार सिंह की तलाश में डेरा डाले हुए हैं। पिछले दिनों प्रदेश सरकार ने सरदार पर 50 हजार से बढ़ाकर दो लाख रुपये इनाम किया तो पुलिस ने तलाश में पूरी ताकत झोंक दी। सरदार की कुंडली तैयार करके करीब एक दर्जन रिश्तेदारों, शरणदाता व सहयोगी अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। सोमवार की रात में भी झांसी पुलिस की टीमों ने इंदरगढ़ के गांव धनौली में सरदार सिंह की तलाश में छापामारी की। पुलिस की चूक रही या फिर मुखबिरी सटीक नहीं थी, जिसकी वजह से पुलिस ने दूसरे घर में छापा मारा, जबकि बताया जाता है कि पास के दूसरे मकान में सरदार सिंह गुर्जर और उसका पुत्र मौजूद थे, जो भागने में सफल रहे।
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इतनी सतर्कता के बावजूद दतिया पुलिस से सरदार की मुठभेड़ होना और इसकी भनक तक उत्तर प्रदेश पुलिस को नहीं लगना, किसी के गले नहीं उतर रहा है। यही नहीं, गिरफ्तार सरदार के हाव भाव भी मुठभेड़ के हालात बयां नहीं कर रहे थे।
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चर्चा है कि दतिया के एक नेता से सरदार सिंह गुर्जर के नजदीकी संबंध हैं। उन्होंने सरदार का समर्पण कराने की भूमिका तैयार की। सेटिंग होने पर सरदार ने इत्मीनान से आत्मसमर्पण किया। उसने बुधवार की सुबह उन्नाव बालाजी स्थित एक मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन किए और कंधे पर थैला टांगकर थाना बालाजी पहुंचा, जहां उसने सरेंडर किया। सरदार के थाने पर समर्पण करने की चर्चा बुधवार की दोपहर से व्हाट एप पर शुरू हो गई थी।