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भोपाल क्राइम: सुप्रीम कोर्ट में पेशी का डर दिखाकर 97 दिन डिजिटल अरेस्ट, बुजुर्ग दंपती से 22 लाख ठगे

Wed, 26 Aug 2026 08:30 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: शबाहत हुसैन Updated Wed, 26 Aug 2026 08:30 PM IST
सार

भोपाल में साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपती को ED, दिल्ली पुलिस और सुप्रीम कोर्ट में पेशी का डर दिखाकर 97 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। संपत्ति जब्ती की धमकी देकर जेवर गिरवी रखवाए और 22 लाख रुपये ठग लिए।

 

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Bhopal Crime: Elderly couple swindled of ₹22 lakh after being kept under digital arrest for 97 days
आर्थिक अपराध। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

भोपाल के कोलार थाना क्षेत्र में साइबर ठगों ने प्रवर्तन निदेशालय और दिल्ली पुलिस का खौफ दिखाकर एक बुजुर्ग दंपती को 97 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। जालसाजों ने संपत्ति जब्त करने की धमकी देकर उनसे 22 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस इसे देश का सबसे लंबा डिजिटल अरेस्ट का मामला मानकर जांच कर रही है।

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गणपति एन्क्लेव निवासी 65 वर्षीय सुवर्णा लक्ष्मी और उनके पति नरसिम्हा राव इस साल फरवरी में अपने पैतृक गांव आंध्र प्रदेश गए थे। सुवर्णा निजी स्कूल संचालित कर चुकी हैं, जबकि नरसिम्हा राव निजी कंपनी से सेवानिवृत्त हैं। 19 मई को सुवर्णा के मोबाइल पर एक व्यक्ति ने दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी खन्ना बनकर कॉल किया। उसने दावा किया कि दिल्ली के केनरा बैंक में सुवर्णा के नाम से खुले खाते से जेट एयरवेज के नरेश गोयल मामले में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है।

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फर्जी अधिकारी और सुप्रीम कोर्ट में पेशी का डर
ठगों ने दंपती को गिरफ्तारी का डर दिखाया और सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी का झांसा दिया। इसके बाद उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया गया। ठगों ने मामले को गोपनीय बताते हुए किसी को जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी भी दी।

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दो दिन बाद खुद को सीआईडी की मुख्य जांच अधिकारी निशा पटेल बताने वाली एक महिला ने फोन किया और दंपती के बैंक खातों समेत अन्य वित्तीय जानकारी जुटाई। इसके बाद ठगों ने फर्जी न्यायाधीश से भी दंपती की बात कराई और उन्हें कार्रवाई का डर दिखाया।


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गहने गिरवी रखवाकर 22 लाख रुपये लिए
जालसाजों ने 9 जून को संपत्ति जब्ती का फर्जी आदेश भेजा। इसमें सोना-चांदी गिरवी रखने और उससे मिलने वाली रकम जमा कराने का निर्देश दिया गया था। ठगों ने दंपती से 22 लाख रुपये अपने बताए बैंक खाते में जमा कराने को कहा। डर के कारण दंपती आंध्र प्रदेश से भोपाल लौटे। 12 जून को उन्होंने कैप्री गोल्ड में जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपये का लोन लिया और पूरी रकम ठगों के खाते में जमा कर दी। रकम मिलने के बाद भी जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट खत्म नहीं किया।

बेटी की अधिवक्ता सहेली ने खोली जालसाजी की पोल
लगातार दबाव के बीच नरसिम्हा राव ने ठगों से कुछ समय की मोहलत मांगी। इस दौरान वे ग्रह दोष शांत कराने के लिए उज्जैन पहुंचे और पूजा कराई। बाद में दंपती की बेटी ने ठगों की ओर से भेजे गए फर्जी आदेश को सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अपनी सहेली को दिखाया। अधिवक्ता ने दस्तावेज की जांच की तो जालसाजी का पता चला। इसके बाद 23 अगस्त की रात दंपती ने कोलार थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला जांच में लिया है और आरोपियों की पहचान तथा ठगी की रकम के लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है।

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