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बस चलता तो रास्ते में भाभी का गला रेत देता
झांसी / ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2015 01:06 AM IST
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आबकारी विभाग के सिपाही की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर उसके सगे भाई को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी भाई ने बैंक में जमा धन के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद की वजह से भाई-भाभी की मौत का सौदा किया था। छह लाख की सुपारी में से 1.10 लाख रुपये भुगतान कर दिया था। सुपारी किलर तीन-चार बार आए, मगर मौका नहीं लगने पर लौट गए। भाभी की सांसें चलती देख वह परेशान हो गया। उसका कहना था कि यदि उसका बस चलता तो वह मेडिकल कॉलेज के रास्ते में भी भाभी का गला रेतकर सांस बंद कर देता।
18 जून की रात झांसी की आवास-विकास कॉलोनी में आबकारी विभाग उरई में तैनात सिपाही दंपति सनी कपूर व पत्नी दीपा कपूर पर घर में छुपे नकाबपोश बदमाशों ने हथौड़ा, कैंची से हमला किया था। जिससे सनी कपूर की 19 जून को मौत हो गई और दीपा कपूर को बचा लिया गया। पुलिस ने सोमवार की शाम मृतक सिपाही सनी कपूर के छोटे भाई सचिन कपूर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सचिन ने पुलिस को बताया कि मां नीलम कपूर व उसके नाम से खुले खातों में 36 लाख रुपये जमा थे। भाई और भाभी जमा रुपये में से आठ लाख रुपये मांग रहे थे, जिसको लेकर आएदिन क्लेश होता था। जिससे तंग आकर उसने कॉलोनी में रहने वाले महोबा के खरेला निवासी भोला उर्फ ठाकुर साहब से भाई-भाभी को ठिकाने लगाने का छह लाख रुपये में सौदा तय किया। शर्त रखी कि साढ़े तीन वर्ष की भतीजी माही पूरी तरह से सुरक्षित रहनी चाहिए। उसने घर के ताले की चाबी बनवाकर भी सौंप दी थी। भोला ने तीन-चार बार सुपारी किलर भेजे, मगर मौका नहीं मिला। जब उसे दोनों को ठिकाने लगा देने की सूचना मिली तो वह मौके पर पहुंचा और चीख-पुकार करने लगा मगर भाभी की हालत देखकर अंदर ही अंदर परेशान हो गया। जिसके चलते उसने मामा राकेश कपूर के साथ भाई को मेडिकल कॉलेज भेजा और वह स्वयं भाभी को लेकर आपे से चला। उसने रास्ते में भाभी को मारने का प्रयास किया, मगर कामयाब नहीं हो सका। वारदात का खुलासा करने वाली पुलिस टीम में थानाध्यक्ष कामता प्रसाद, एसआई राजेंद्र सिंह, सुनीत कुमार, सुरेंद्र कुमार आदि हैं।
हर बार नए गुर्गों को भेजता था भोला
पुलिस हिरासत में सचिन ने कहा कि उसे कतई गम नहीं कि भाई इस दुनिया में नहीं है। उसे अफसोस भाभी के बचने का है। उसे संपत्ति का भी लालच नहीं है। यदि ऐसा होता तो भतीजी को जरा भी खरोंच नहीं लगने की शर्त नहीं रखता। उसने बताया कि वह हमला करने वालों को नहीं जानता, क्योंकि सुपारी लेने वाला भोला हर बार अपने नए गुर्गों को भेजता था।
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दीपा के लिखित बयान में फंसे सास व मामा
दीपा ने पुलिस को लिखित बयान में बताया है कि जब वह शादी करके घर में आई थी, तब नशे की हालत में देवर सचिन ने सरकारी बंदूक से फायरिंग की थी। वारदात के दिन यानी 18 जून को वह ड्यूटी पर नहीं गई थी। पति को आबकारी निरीक्षक पीके गिरी ने बुलाया था। जब वह पति व बेटी के साथ घर का ताला खोलकर कमरे में घुसी तो उसे इन्वर्टर के पास एक नकाबपोश खड़ा दिखा। उसने उसके सिर पर टूटी कैंची से प्रहार किया, जो उसने अपनी सास के पास देखी थी। दूसरे बदमाश ने बेटी को उठाकर बाथरूम में बंद कर दिया। पति ने पहले बदमाश का नकाब उतारा तो पहचाना कि वह सचिन से मिलने के लिए कभी-कभार आने वाला भोला ठाकुर साहब है। उसने बताया कि पति के मामा ने आठ लाख रुपये लिए थे, जो वह वापस नहीं कर रहे थे। आएदिन सचिन दोनों को रास्ते से हटाने की धमकी देता था। देवर की नीयत उसपर सही नहीं थी।
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18 जून की रात झांसी की आवास-विकास कॉलोनी में आबकारी विभाग उरई में तैनात सिपाही दंपति सनी कपूर व पत्नी दीपा कपूर पर घर में छुपे नकाबपोश बदमाशों ने हथौड़ा, कैंची से हमला किया था। जिससे सनी कपूर की 19 जून को मौत हो गई और दीपा कपूर को बचा लिया गया। पुलिस ने सोमवार की शाम मृतक सिपाही सनी कपूर के छोटे भाई सचिन कपूर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सचिन ने पुलिस को बताया कि मां नीलम कपूर व उसके नाम से खुले खातों में 36 लाख रुपये जमा थे। भाई और भाभी जमा रुपये में से आठ लाख रुपये मांग रहे थे, जिसको लेकर आएदिन क्लेश होता था। जिससे तंग आकर उसने कॉलोनी में रहने वाले महोबा के खरेला निवासी भोला उर्फ ठाकुर साहब से भाई-भाभी को ठिकाने लगाने का छह लाख रुपये में सौदा तय किया। शर्त रखी कि साढ़े तीन वर्ष की भतीजी माही पूरी तरह से सुरक्षित रहनी चाहिए। उसने घर के ताले की चाबी बनवाकर भी सौंप दी थी। भोला ने तीन-चार बार सुपारी किलर भेजे, मगर मौका नहीं मिला। जब उसे दोनों को ठिकाने लगा देने की सूचना मिली तो वह मौके पर पहुंचा और चीख-पुकार करने लगा मगर भाभी की हालत देखकर अंदर ही अंदर परेशान हो गया। जिसके चलते उसने मामा राकेश कपूर के साथ भाई को मेडिकल कॉलेज भेजा और वह स्वयं भाभी को लेकर आपे से चला। उसने रास्ते में भाभी को मारने का प्रयास किया, मगर कामयाब नहीं हो सका। वारदात का खुलासा करने वाली पुलिस टीम में थानाध्यक्ष कामता प्रसाद, एसआई राजेंद्र सिंह, सुनीत कुमार, सुरेंद्र कुमार आदि हैं।
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हर बार नए गुर्गों को भेजता था भोला
पुलिस हिरासत में सचिन ने कहा कि उसे कतई गम नहीं कि भाई इस दुनिया में नहीं है। उसे अफसोस भाभी के बचने का है। उसे संपत्ति का भी लालच नहीं है। यदि ऐसा होता तो भतीजी को जरा भी खरोंच नहीं लगने की शर्त नहीं रखता। उसने बताया कि वह हमला करने वालों को नहीं जानता, क्योंकि सुपारी लेने वाला भोला हर बार अपने नए गुर्गों को भेजता था।
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दीपा के लिखित बयान में फंसे सास व मामा
दीपा ने पुलिस को लिखित बयान में बताया है कि जब वह शादी करके घर में आई थी, तब नशे की हालत में देवर सचिन ने सरकारी बंदूक से फायरिंग की थी। वारदात के दिन यानी 18 जून को वह ड्यूटी पर नहीं गई थी। पति को आबकारी निरीक्षक पीके गिरी ने बुलाया था। जब वह पति व बेटी के साथ घर का ताला खोलकर कमरे में घुसी तो उसे इन्वर्टर के पास एक नकाबपोश खड़ा दिखा। उसने उसके सिर पर टूटी कैंची से प्रहार किया, जो उसने अपनी सास के पास देखी थी। दूसरे बदमाश ने बेटी को उठाकर बाथरूम में बंद कर दिया। पति ने पहले बदमाश का नकाब उतारा तो पहचाना कि वह सचिन से मिलने के लिए कभी-कभार आने वाला भोला ठाकुर साहब है। उसने बताया कि पति के मामा ने आठ लाख रुपये लिए थे, जो वह वापस नहीं कर रहे थे। आएदिन सचिन दोनों को रास्ते से हटाने की धमकी देता था। देवर की नीयत उसपर सही नहीं थी।