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क्राइम - असलहे की फैक्ट्री तक नहीं पहुंच पा रही पुलिस-City
Updated Tue, 09 Oct 2018 01:37 AM IST
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असलहे की फैक्ट्री तक नहीं पहुंच पा रही पुलिस
- अवैध हथियारों से अंजाम दी जा रही हैं वारदात
- कारतूस, खोखा बरामद कर खामोश बैठ जाते
जावेद असलम
झांसी। जिले में होने वाली अधिकतर घटनाओं में अवैध तमंचे का प्रयोग हो रहा है, लेकिन पुलिस आज तक किसी बड़े गिरोह को नहीं पकड़ सकी। साथ ही, लंबे समय से असलहे बनाने की फैैक्ट्री का भी खुलासा नहीं हो सका। जबकि, आए दिन तमंचे से मारने व बरामद होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। पिछले दो दिन पहले एक युवक ने तमंचे से आत्महत्या की तो वहीं चित्रा चौराहा पर युवक ने सरेआम तमंचा लहराया था।
जिले में अवैध असलहों से वारदात अंजाम दिए जाने के बाद भी उनकी फैक्ट्री या सप्लायर्स तक नहीं पहुंचने के पीछे पुलिस की अजीबोगरीब कार्यशैली है। जब भी कोई वारदात होती है तो पुलिस बदमाश को जल्द गिरफ्तार कर लिए जाने के दावे करती है। फिर तलाशी अभियान चलाया जाता है। इस दौरान यदि कोई बदमाश हाथ आ गया तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर जेल भेज देती है। वहीं यदि उसके पास से कोई अवैध हथियार, कारतूस बरामद हो गया तो इसी से खुश हो जाती है। उसके जरिए पुलिस असलहे के सप्लायर तक पहुंचने की कोशिश नहीं करती। ऐसे कई मामले अब भी लंबित पड़े हैं, जहां पुलिस ऐेसे मामले का कोई खुलासा नहीं कर सकी।
ढाई- तीन हजार में मिल जाते हैं तमंचे
पुलिस द्वारा अवैध हथियारों के संबंध में गहन जांच नहीं किए जाने के कारण सप्लायर्स की चांदी है। सूत्र बताते हैं कि जिले में ही ढाई से तीन हजार तक में अवैध तमंचे मिल जाते हैं। 10 से 20 हजार रुपये खर्च करने पर तो पिस्टल और रिवाल्वर की खरीद हो जाती है। यही नहीं, इसके लिए कहीं जाने की भी जरूरत नहीं होती। बाहरी जिलों से असलहा तस्कर तमंचों की सप्लाई कर रहे हैं। वहीं, यदि जांच की जाए तो जिले में भी अवैध हथियारों की खेप मिल सकती है। यदि यह मान लिया जाए कि यहां असलहों की कोई अवैध फैक्ट्री या गोदाम नहीं तो सवाल उठता है कि इतनी आसानी से बाहर से तमंचे कैसे आ जाते हैं और इसके सप्लायर क्यों नहीं पकड़े जाते।
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किसने दिए असलहे, नहीं खोजती पुलिस
फायरिंग के मामले में पुलिस असलहे तो बरामद करती है। लेकिन अभियुक्त के पास असलहे कहां से आए। इसकी पड़ताल करने की कोशिश नहीं होती। आखिर शहर से लेकर देहात तक असलहों की खेप कौन सप्लाई कर रहा। कौन है जो सबको असलहे बेच रहा है। उनका सुराग लगाने की कोशिश नहीं होती। असलहे देने के साथ- साथ गोलियां कहां से आ रही है। इन सब बातों की जांच पड़ताल के बजाय पुलिस फाइल बांधकर आलमारी में रख देती है।
यह रहे मामले
- 4 अक्टूबर की रात चित्रा चौराहा पर युवकों में हुए विवाद के बाद एक युवक ने बीच सड़क तमंचा लहरा दिया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा।
- 5 अक्टूबर को थाना नवाबाद के सुकुवां-ढुकुवां कॉलोनी में रहने वाले एक युवक ने तमंचे से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उसके पास तमंचा कहां से आया, पता नहीं चला।
- सितंबर माह में थाना प्रेमनगर में कबाड़ी जितेंद्र अहिरवार की भी तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने आरोपी को मय तमंचे के गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
- 27 सितंबर को सीपरी पुलिस ने चिरगांव के बैंक में लॉकर चोरी के मामले में फरार चल रहे किशन कुमार को ग्वालियर रोड स्थित एक ढाबे से तमंचा समेत पकड़ा था।
- 3 सितंबर को कोतवाली के पंचकुईयां के पास रहने वाले रेलकर्मी अनिल सिंह के मकान में कुछ लोग तमंचे से फायरिंग कर भाग गए थे। मौके से पुलिस ने कारतूस बरामद किए थे।
अवैध हथियारों की कीमत
4000- 12 बोर, लंबी नाल
1500- 2000- 12 बोर, छोटी नाल
2000- 5000- 15 बोर
8000- 10000- देशी रिवाल्वर
कारतूस के रेट
110 रुपये- 315 बोर
90 रुपये- 12 बोर
80 रुपये- 32 बोर
110 रुपये- पिस्टल का कारतूस
पुलिस अपनी-अपनी पड़ताल करती है, इसमें कोई लापरवाही नहीं बरती जाती। जल्द ही पुलिस बड़े मामले का खुलासा करेगी। इसको लेकर थानेदारों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
विनोद कुमार सिंह, एसएसपी
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- अवैध हथियारों से अंजाम दी जा रही हैं वारदात
- कारतूस, खोखा बरामद कर खामोश बैठ जाते
जावेद असलम
झांसी। जिले में होने वाली अधिकतर घटनाओं में अवैध तमंचे का प्रयोग हो रहा है, लेकिन पुलिस आज तक किसी बड़े गिरोह को नहीं पकड़ सकी। साथ ही, लंबे समय से असलहे बनाने की फैैक्ट्री का भी खुलासा नहीं हो सका। जबकि, आए दिन तमंचे से मारने व बरामद होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। पिछले दो दिन पहले एक युवक ने तमंचे से आत्महत्या की तो वहीं चित्रा चौराहा पर युवक ने सरेआम तमंचा लहराया था।
जिले में अवैध असलहों से वारदात अंजाम दिए जाने के बाद भी उनकी फैक्ट्री या सप्लायर्स तक नहीं पहुंचने के पीछे पुलिस की अजीबोगरीब कार्यशैली है। जब भी कोई वारदात होती है तो पुलिस बदमाश को जल्द गिरफ्तार कर लिए जाने के दावे करती है। फिर तलाशी अभियान चलाया जाता है। इस दौरान यदि कोई बदमाश हाथ आ गया तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर जेल भेज देती है। वहीं यदि उसके पास से कोई अवैध हथियार, कारतूस बरामद हो गया तो इसी से खुश हो जाती है। उसके जरिए पुलिस असलहे के सप्लायर तक पहुंचने की कोशिश नहीं करती। ऐसे कई मामले अब भी लंबित पड़े हैं, जहां पुलिस ऐेसे मामले का कोई खुलासा नहीं कर सकी।
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ढाई- तीन हजार में मिल जाते हैं तमंचे
पुलिस द्वारा अवैध हथियारों के संबंध में गहन जांच नहीं किए जाने के कारण सप्लायर्स की चांदी है। सूत्र बताते हैं कि जिले में ही ढाई से तीन हजार तक में अवैध तमंचे मिल जाते हैं। 10 से 20 हजार रुपये खर्च करने पर तो पिस्टल और रिवाल्वर की खरीद हो जाती है। यही नहीं, इसके लिए कहीं जाने की भी जरूरत नहीं होती। बाहरी जिलों से असलहा तस्कर तमंचों की सप्लाई कर रहे हैं। वहीं, यदि जांच की जाए तो जिले में भी अवैध हथियारों की खेप मिल सकती है। यदि यह मान लिया जाए कि यहां असलहों की कोई अवैध फैक्ट्री या गोदाम नहीं तो सवाल उठता है कि इतनी आसानी से बाहर से तमंचे कैसे आ जाते हैं और इसके सप्लायर क्यों नहीं पकड़े जाते।
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किसने दिए असलहे, नहीं खोजती पुलिस
फायरिंग के मामले में पुलिस असलहे तो बरामद करती है। लेकिन अभियुक्त के पास असलहे कहां से आए। इसकी पड़ताल करने की कोशिश नहीं होती। आखिर शहर से लेकर देहात तक असलहों की खेप कौन सप्लाई कर रहा। कौन है जो सबको असलहे बेच रहा है। उनका सुराग लगाने की कोशिश नहीं होती। असलहे देने के साथ- साथ गोलियां कहां से आ रही है। इन सब बातों की जांच पड़ताल के बजाय पुलिस फाइल बांधकर आलमारी में रख देती है।
यह रहे मामले
- 4 अक्टूबर की रात चित्रा चौराहा पर युवकों में हुए विवाद के बाद एक युवक ने बीच सड़क तमंचा लहरा दिया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा।
- 5 अक्टूबर को थाना नवाबाद के सुकुवां-ढुकुवां कॉलोनी में रहने वाले एक युवक ने तमंचे से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उसके पास तमंचा कहां से आया, पता नहीं चला।
- सितंबर माह में थाना प्रेमनगर में कबाड़ी जितेंद्र अहिरवार की भी तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने आरोपी को मय तमंचे के गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
- 27 सितंबर को सीपरी पुलिस ने चिरगांव के बैंक में लॉकर चोरी के मामले में फरार चल रहे किशन कुमार को ग्वालियर रोड स्थित एक ढाबे से तमंचा समेत पकड़ा था।
- 3 सितंबर को कोतवाली के पंचकुईयां के पास रहने वाले रेलकर्मी अनिल सिंह के मकान में कुछ लोग तमंचे से फायरिंग कर भाग गए थे। मौके से पुलिस ने कारतूस बरामद किए थे।
अवैध हथियारों की कीमत
4000- 12 बोर, लंबी नाल
1500- 2000- 12 बोर, छोटी नाल
2000- 5000- 15 बोर
8000- 10000- देशी रिवाल्वर
कारतूस के रेट
110 रुपये- 315 बोर
90 रुपये- 12 बोर
80 रुपये- 32 बोर
110 रुपये- पिस्टल का कारतूस
पुलिस अपनी-अपनी पड़ताल करती है, इसमें कोई लापरवाही नहीं बरती जाती। जल्द ही पुलिस बड़े मामले का खुलासा करेगी। इसको लेकर थानेदारों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
विनोद कुमार सिंह, एसएसपी