{"_id":"5979fd4d4f1c1bd9588b4a6b","slug":"181501166925-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्राइम: अपहरण 2-City","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
क्राइम: अपहरण 2-City
Updated Thu, 27 Jul 2017 08:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रेणी- क्राइम
------------
फोटो
-----
बहुत पीटा, जख्म दिए, हम रहे मुंह सिए
सब हेड: कारोबारी राजू ने सुनाई अपनी 12 दिन की दास्तां, कहा 12 दिन नर्क जैसे बीते
क्रासर
मन में अब भी दहशत, हट्टे-कट्टे थे 14 में 11 अपहरणकर्ता
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
12 दिन हमने नर्क सा जीवन जिया है। बदमाश हमें बुरी तरह पीटते थे। उनकी पिटाई से मिले जख्म अभी भी दर्द दे रहे हैं। लेकिन, हम अपनी जान बचाने के लिए चुपचाप अत्याचार सहते रहे। यह दास्तां अपहरण मुक्त होकर आए सराफा कारोबारी राजेंद्र कुमार अग्रवाल (राजू कमरया) ने सुनाई। उन्होंने बताया कि 14 में से 11 अपहरणकर्ता हट्टे-कट्टे थे। उनसे मिली यातनाओं से अभी भी मन में दहशत है। इस हादसे से उबरने में कुछ समय लग सकता है।
बारह जुलाई की रात साढ़े ग्यारह बजे दोनों कारोबारियों का अपहरण हुआ था। राजू ने बताया कि आंतिया तालाब लोहा मंडी मोड़ पर जब उनको वर्दीधारी ने रोका तो उनको लगा कि चेकिंग के लिए रोका गया है। रुकते ही उनके पास गाड़ी से तीन लोग और उतरकर आ गए। चारों ने मिलकर डंडे बरसाना शुरू कर दिया। दो मिनट तक वे उनको पीटते रहे। एक बदमाश ने उनके एक पैर में ठीक घुटने के नीचे नुकीली वस्तु से प्रहार किया। नुकीली वस्तु के पैर में घुसते ही खून का फव्वारा फूट पड़ा। इसके बाद अपहरणकर्ताओं ने उन्हें और राहुल को गाड़ी में डाला और ग्वालियर की तरफ चल पड़े। डंडे लगने से शरीर भी फूल गया था। मगर, दहशत इतनी भर गई थी वे जख्म भूल गए। बदमाशों ने बेहोश करने के लिए इंजेक्शन भी लगाया, लेकिन असर नहीं हुआ। 13 जुलाई की सुबह अलीगढ़ के पास एक मेडिकल स्टोर से बदमाशों ने उन्हें पट्टी, दर्द की दवा, ट्यूब खरीद कर दिया। इसके बाद वे जख्म की खुद ही मलहम पट्टी करते रहे। आज भी उनके पैर का जख्म नहीं भरा है।
राजू ने बताया कि 13 जुलाई की सुबह उनको अलीगढ़ के पास एक गांव में ठहराया गया था। वहां, अपहरणकर्ता बात कर रहे थे कि गांव में पुलिस कैसे आ गई? इस बात पर अपहरणकर्ताओं ने उनको दोबारा मारा था। हालांकि, उस समय पुलिस उन तक नहीं पहुंच सकी। दोनों बार राहुल को कम और उनको ज्यादा पीटा गया। उन्होंने 12 दिन में 14 अपहरणकर्ताओं को देखा, जिसमें 11 कमांडों की तरह हट्टे- कट्टे थे। उनके 12 दिन नरक से बदतर बीते।
विज्ञापन
एसटीएफ ने छुड़ाया
कारोबारी राजू कमरया ने कहा कि अपहरणकर्ता उनको एक जगह से दूसरी जगह बार-बार घूमाते रहे, लेकिन पुलिस ने कहीं भी उनकी गाड़ी को चेक नहीं किया। ज्यादातर रात में ही उनको एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता था। पुलिस की सक्रियता उनको कही नजर नहीं आई। एसटीएफ की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई से ही वे अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूट सके।
एसएसपी और डीआईजी ने अलग से की पूछताछ
डीआईजी जवाहर और एसएसपी जेके शुक्ला बृहस्पतिवार की दोपहर 12 बजे राजू कमरया से मिलने उनके घर पहुंचे। दोनों पुलिस अफसरों ने राजू से घटना की विस्तृत जानकारी ली। राजू ने कई महत्वपूर्ण बिंदु उनको बताए, जिस पर पुलिस ने काम शुरू कर दिया है।
घर के भेदी का पता लगा
कारोबारी राजू कमरया ने डीआईजी और एसएसपी को एक ऐसे शख्स का नाम बताया जो उनके बीच में ही रहता है। उन्हें शक है कि उस शख्स ने ही अपहरणकर्ताओं को सूचना दी। पुलिस जल्द ही अब उस व्यक्ति से पूछताछ करेगी।
विज्ञापन
------------
फोटो
-----
बहुत पीटा, जख्म दिए, हम रहे मुंह सिए
सब हेड: कारोबारी राजू ने सुनाई अपनी 12 दिन की दास्तां, कहा 12 दिन नर्क जैसे बीते
क्रासर
मन में अब भी दहशत, हट्टे-कट्टे थे 14 में 11 अपहरणकर्ता
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
12 दिन हमने नर्क सा जीवन जिया है। बदमाश हमें बुरी तरह पीटते थे। उनकी पिटाई से मिले जख्म अभी भी दर्द दे रहे हैं। लेकिन, हम अपनी जान बचाने के लिए चुपचाप अत्याचार सहते रहे। यह दास्तां अपहरण मुक्त होकर आए सराफा कारोबारी राजेंद्र कुमार अग्रवाल (राजू कमरया) ने सुनाई। उन्होंने बताया कि 14 में से 11 अपहरणकर्ता हट्टे-कट्टे थे। उनसे मिली यातनाओं से अभी भी मन में दहशत है। इस हादसे से उबरने में कुछ समय लग सकता है।
बारह जुलाई की रात साढ़े ग्यारह बजे दोनों कारोबारियों का अपहरण हुआ था। राजू ने बताया कि आंतिया तालाब लोहा मंडी मोड़ पर जब उनको वर्दीधारी ने रोका तो उनको लगा कि चेकिंग के लिए रोका गया है। रुकते ही उनके पास गाड़ी से तीन लोग और उतरकर आ गए। चारों ने मिलकर डंडे बरसाना शुरू कर दिया। दो मिनट तक वे उनको पीटते रहे। एक बदमाश ने उनके एक पैर में ठीक घुटने के नीचे नुकीली वस्तु से प्रहार किया। नुकीली वस्तु के पैर में घुसते ही खून का फव्वारा फूट पड़ा। इसके बाद अपहरणकर्ताओं ने उन्हें और राहुल को गाड़ी में डाला और ग्वालियर की तरफ चल पड़े। डंडे लगने से शरीर भी फूल गया था। मगर, दहशत इतनी भर गई थी वे जख्म भूल गए। बदमाशों ने बेहोश करने के लिए इंजेक्शन भी लगाया, लेकिन असर नहीं हुआ। 13 जुलाई की सुबह अलीगढ़ के पास एक मेडिकल स्टोर से बदमाशों ने उन्हें पट्टी, दर्द की दवा, ट्यूब खरीद कर दिया। इसके बाद वे जख्म की खुद ही मलहम पट्टी करते रहे। आज भी उनके पैर का जख्म नहीं भरा है।
विज्ञापन
राजू ने बताया कि 13 जुलाई की सुबह उनको अलीगढ़ के पास एक गांव में ठहराया गया था। वहां, अपहरणकर्ता बात कर रहे थे कि गांव में पुलिस कैसे आ गई? इस बात पर अपहरणकर्ताओं ने उनको दोबारा मारा था। हालांकि, उस समय पुलिस उन तक नहीं पहुंच सकी। दोनों बार राहुल को कम और उनको ज्यादा पीटा गया। उन्होंने 12 दिन में 14 अपहरणकर्ताओं को देखा, जिसमें 11 कमांडों की तरह हट्टे- कट्टे थे। उनके 12 दिन नरक से बदतर बीते।
विज्ञापन
एसटीएफ ने छुड़ाया
कारोबारी राजू कमरया ने कहा कि अपहरणकर्ता उनको एक जगह से दूसरी जगह बार-बार घूमाते रहे, लेकिन पुलिस ने कहीं भी उनकी गाड़ी को चेक नहीं किया। ज्यादातर रात में ही उनको एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता था। पुलिस की सक्रियता उनको कही नजर नहीं आई। एसटीएफ की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई से ही वे अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूट सके।
एसएसपी और डीआईजी ने अलग से की पूछताछ
डीआईजी जवाहर और एसएसपी जेके शुक्ला बृहस्पतिवार की दोपहर 12 बजे राजू कमरया से मिलने उनके घर पहुंचे। दोनों पुलिस अफसरों ने राजू से घटना की विस्तृत जानकारी ली। राजू ने कई महत्वपूर्ण बिंदु उनको बताए, जिस पर पुलिस ने काम शुरू कर दिया है।
घर के भेदी का पता लगा
कारोबारी राजू कमरया ने डीआईजी और एसएसपी को एक ऐसे शख्स का नाम बताया जो उनके बीच में ही रहता है। उन्हें शक है कि उस शख्स ने ही अपहरणकर्ताओं को सूचना दी। पुलिस जल्द ही अब उस व्यक्ति से पूछताछ करेगी।