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मेडिकल कॉलेज कोविड आईसीयू में मरीजों को चाय तक नसीब नहीं
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कोरोना
- फोटो : ??????
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झांसी। कोरोना से झांसी में बड़ी तादाद में मरीजों की मौत का मामला चिकित्सा सेवाओं पर सवाल खड़ा कर रहा है। मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था चरमराई हुई है। बृहस्पतिवार को सुबह 11:30 बजे तक कोविड आईसीयू में मरीजों को एक कप चाय तक नसीब नहीं हुई। वेंटीलेटर के छोटे-छोटे उपकरणों, बहुत जरूरत की दवाओं तक की कमी है। कुछ परेशान मरीजों ने परिजनों को फोन कर समस्या बताई। परिजनों ने सदर विधायक से अव्यवस्थाओं की शिकायत की। जानकारी के अनुसार वेंटीलेटर के उपयोगी उपकरणों से लेकर कुछ खास दवाओं तक की कमी है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अब तक झांसी में कोरोना से 32 लोगों की मौत हो चुकी है। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदार अधिकारियों ने कुछ भी कहने से मना कर दिया।
भूखे, प्यासे छटपटा रहे मरीज
मेडिकल कॉलेज कोविड वार्ड और आईसीयू में मरीज चाय, नाश्ते और खाने के लिए तरस रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी इंजतार करते करते जब हद हो गई तो एक महिला मरीज ने अपने परिजनों को दर्द बयां किया। तनाव में आए परिजनों ने इसकी शिकायत सदर विधायक से की। बुधवार रात भी कई मरीजों को खाना नसीब नहीं हुआ। कुछ मरीजों ने बताया कि नाश्ता, खाना लाने वाले देरी से लाकर वार्ड के बाहर रख जाते हैं। मरीजों को खुद उठाकर लाना पड़ता है। कुछ को मिलता है और कुछ को नहीं।
वेंटीलेटर के बाद भी खामियाजा भुगत रहे मरीज
मेडिकल कॉलेज कोविड वार्ड में वेंटीलेटर तो हैं लेकिन कई बार मांगने के बावजूद लैरिंगोस्कोप, सक्शन समेत कई आवश्यक उपकरणों और दवाओं की भी कमी है। इसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है।
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विशेषज्ञ डॉक्टरों को सौंप दीं प्रशासनिक जिम्मेदारी, कैसे हो इलाज
मेडिकल कॉलेज सूत्रों के अनुसार पहले से ही डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या कम है। इन हालात में एनेस्थीसिया समेत अन्य रोगों के विशेषज्ञों को किचन व अन्य का प्रभारी बना दिया है। जबकि यह काम नॉन क्लीनिकल अधिकारी भी देख सकते हैं।
छह रेजीडेंट डॉक्टर कर दिए रिलीव
पिछले करीब 20 दिनों में छह रेजीडेंट डॉक्टर नोएडा के लिए रिलीव कर दिए गए हैं। इनमें दो एनेस्थीसिया, दो मेडिसिन और दो बाल रोग विभाग के थे। जबकि मेडिकल कॉलेज में मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। कमी के बावजूद एक बार भी शासन को यह नहीं बताया गया कि झांसी में कोरोना बेकाबू हो रहा है। यहां पहले से ही स्टाफ कम है।
तीन महीने से प्रशिक्षु डॉक्टरों को नहीं मिला भुगतान
रात दिन ड्यूटी कर रहे प्रशिक्षु डॉक्टरों को तीन महीने से स्टाइपेंड नहीं मिला है। आजिज आकर उन्होंने बुधवार को प्रदर्शन और कार्यबष्किार किया।
सैंपल के लिए घंटों बैठना पड़ रहा
मेडिकल कॉलेज में मनमानी का आलम है। कोविड मरीजों का सैंपल दोपहर एक बजे और शाम सात बजे ही लिया जा रहा है। इससे पहले और बाद में आने वाले मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रशासन देर रात ही क्यों जारी करता है रिपोर्ट
कोरोना मरीजों की संख्या और मरने वालों की रिपोर्ट जारी करना भी सीएमओ और जिला प्रशासन को भारी पड़ रहा है। न तो सीएमओ कार्यालय कुछ बताता है न मेडिकल कॉलेज। जिला अधिकारी खुद देर रात सूची जारी करते हैं। इससे मरीजों के परिजनों, मोहल्लों में संक्रमण के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाती। दिन में समय से रिपोर्ट मिल जाए तो संबंधित इलाकों को जागरूक किया जा सकता है।
जिला प्रशासन, मेडिकल कॉलेज पूरी तरह फेल: रवि शर्मा
कोरोना को रोकने में जिला प्रशासन, मेडिकल कॉलेज प्रशासन पूरी तरह नाकाम है। मेरे पास इन दिनों सर्वाधिक शिकायत कोरोना संक्रमित मरीजों की ही आ रही हैं। इलाज तो दूर भर्ती मरीजों को चाय, नाश्ता तक नहीं मिल रहा है। इस संबंध में मैंने कई बार पत्र लिखा है। अब लगता है मुख्यमंत्री से शिकायत करनी पड़ेगी।
मैं रोज समीक्षा कर रहा हूं, मरीजों को नहीं होने दूंगा तकलीफ: कमिश्नर
कमिश्नर सुभाष चंद्र शर्मा ने कहा कोरोना से झांसी में मौत का बढ़ता आंकड़ा दुखद और चिंता का विषय है। मैं रोज समीक्षा कर रहा हूं। बृहस्पतिवार को भी जिला अस्पताल जायजा लेने गया था। हर बिंदु पर मेडिकल कॉलेज और प्रशासनिक कार्यशैली की भी समीक्षा करूंगा। मरीजों को कोई तकलीफ नहीं होने दी जाएगी।
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भूखे, प्यासे छटपटा रहे मरीज
मेडिकल कॉलेज कोविड वार्ड और आईसीयू में मरीज चाय, नाश्ते और खाने के लिए तरस रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी इंजतार करते करते जब हद हो गई तो एक महिला मरीज ने अपने परिजनों को दर्द बयां किया। तनाव में आए परिजनों ने इसकी शिकायत सदर विधायक से की। बुधवार रात भी कई मरीजों को खाना नसीब नहीं हुआ। कुछ मरीजों ने बताया कि नाश्ता, खाना लाने वाले देरी से लाकर वार्ड के बाहर रख जाते हैं। मरीजों को खुद उठाकर लाना पड़ता है। कुछ को मिलता है और कुछ को नहीं।
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वेंटीलेटर के बाद भी खामियाजा भुगत रहे मरीज
मेडिकल कॉलेज कोविड वार्ड में वेंटीलेटर तो हैं लेकिन कई बार मांगने के बावजूद लैरिंगोस्कोप, सक्शन समेत कई आवश्यक उपकरणों और दवाओं की भी कमी है। इसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है।
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विशेषज्ञ डॉक्टरों को सौंप दीं प्रशासनिक जिम्मेदारी, कैसे हो इलाज
मेडिकल कॉलेज सूत्रों के अनुसार पहले से ही डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या कम है। इन हालात में एनेस्थीसिया समेत अन्य रोगों के विशेषज्ञों को किचन व अन्य का प्रभारी बना दिया है। जबकि यह काम नॉन क्लीनिकल अधिकारी भी देख सकते हैं।
छह रेजीडेंट डॉक्टर कर दिए रिलीव
पिछले करीब 20 दिनों में छह रेजीडेंट डॉक्टर नोएडा के लिए रिलीव कर दिए गए हैं। इनमें दो एनेस्थीसिया, दो मेडिसिन और दो बाल रोग विभाग के थे। जबकि मेडिकल कॉलेज में मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। कमी के बावजूद एक बार भी शासन को यह नहीं बताया गया कि झांसी में कोरोना बेकाबू हो रहा है। यहां पहले से ही स्टाफ कम है।
तीन महीने से प्रशिक्षु डॉक्टरों को नहीं मिला भुगतान
रात दिन ड्यूटी कर रहे प्रशिक्षु डॉक्टरों को तीन महीने से स्टाइपेंड नहीं मिला है। आजिज आकर उन्होंने बुधवार को प्रदर्शन और कार्यबष्किार किया।
सैंपल के लिए घंटों बैठना पड़ रहा
मेडिकल कॉलेज में मनमानी का आलम है। कोविड मरीजों का सैंपल दोपहर एक बजे और शाम सात बजे ही लिया जा रहा है। इससे पहले और बाद में आने वाले मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रशासन देर रात ही क्यों जारी करता है रिपोर्ट
कोरोना मरीजों की संख्या और मरने वालों की रिपोर्ट जारी करना भी सीएमओ और जिला प्रशासन को भारी पड़ रहा है। न तो सीएमओ कार्यालय कुछ बताता है न मेडिकल कॉलेज। जिला अधिकारी खुद देर रात सूची जारी करते हैं। इससे मरीजों के परिजनों, मोहल्लों में संक्रमण के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाती। दिन में समय से रिपोर्ट मिल जाए तो संबंधित इलाकों को जागरूक किया जा सकता है।
जिला प्रशासन, मेडिकल कॉलेज पूरी तरह फेल: रवि शर्मा
कोरोना को रोकने में जिला प्रशासन, मेडिकल कॉलेज प्रशासन पूरी तरह नाकाम है। मेरे पास इन दिनों सर्वाधिक शिकायत कोरोना संक्रमित मरीजों की ही आ रही हैं। इलाज तो दूर भर्ती मरीजों को चाय, नाश्ता तक नहीं मिल रहा है। इस संबंध में मैंने कई बार पत्र लिखा है। अब लगता है मुख्यमंत्री से शिकायत करनी पड़ेगी।
मैं रोज समीक्षा कर रहा हूं, मरीजों को नहीं होने दूंगा तकलीफ: कमिश्नर
कमिश्नर सुभाष चंद्र शर्मा ने कहा कोरोना से झांसी में मौत का बढ़ता आंकड़ा दुखद और चिंता का विषय है। मैं रोज समीक्षा कर रहा हूं। बृहस्पतिवार को भी जिला अस्पताल जायजा लेने गया था। हर बिंदु पर मेडिकल कॉलेज और प्रशासनिक कार्यशैली की भी समीक्षा करूंगा। मरीजों को कोई तकलीफ नहीं होने दी जाएगी।