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फर्जी दस्तावेज लगाकर बंदूक लेने पर सात साल की सजा
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झांसी। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संख्या 1 हितेश अग्रवाल की अदालत ने फर्जी दस्तावेज लगाकर बंदूक लेने के मामले में दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त को सात साल की सजा सुनाई। पचास हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
सहायक अभियोजन अधिकारी राजविजय सिंह के अनुसार अशोक कुमार सिंह ने पुलिस से गुरसराय के अस्ता गांव निवासी शिवराम के खिलाफ शिकायत की थी कि उसने भारतीय सेना में कार्यरत रहने के दौरान वर्ष 1994 में बीएन शर्मा के नाम से निर्गत शस्त्र अनुज्ञा पत्र में कूटरचना करते अपना नाम लिख लिया। कूटरचित दस्तावेज भी तैयार किए। इन दस्तावेजों का उपयोग असली के रूप में करते हुए अवैध रूप से डीबीबीएल गन का उपयोग किया। शिकायत पर पूरे प्रकरण की जांच की गई। पता चला कि शिवराम डीबीबीएल नंबर 131366 को 1994 से खरीद कर उपयोग करता रहा है। इस मामले में अदालत ने दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त को धारा 420 में 5 साल की सजा व दस हजार रुपये जुर्माना लगाया। धारा 467 में 7 साल की सजा व 15000 रुपये जुर्माना व धारा 468 में 5 साल की सजा और 10000 जुर्माना लगाया। धारा 471 में सात साल की सजा व 15000 रुपये अर्थदंड लगाया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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सहायक अभियोजन अधिकारी राजविजय सिंह के अनुसार अशोक कुमार सिंह ने पुलिस से गुरसराय के अस्ता गांव निवासी शिवराम के खिलाफ शिकायत की थी कि उसने भारतीय सेना में कार्यरत रहने के दौरान वर्ष 1994 में बीएन शर्मा के नाम से निर्गत शस्त्र अनुज्ञा पत्र में कूटरचना करते अपना नाम लिख लिया। कूटरचित दस्तावेज भी तैयार किए। इन दस्तावेजों का उपयोग असली के रूप में करते हुए अवैध रूप से डीबीबीएल गन का उपयोग किया। शिकायत पर पूरे प्रकरण की जांच की गई। पता चला कि शिवराम डीबीबीएल नंबर 131366 को 1994 से खरीद कर उपयोग करता रहा है। इस मामले में अदालत ने दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त को धारा 420 में 5 साल की सजा व दस हजार रुपये जुर्माना लगाया। धारा 467 में 7 साल की सजा व 15000 रुपये जुर्माना व धारा 468 में 5 साल की सजा और 10000 जुर्माना लगाया। धारा 471 में सात साल की सजा व 15000 रुपये अर्थदंड लगाया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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