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सरकारी दफ्तरों में बैठे हैं घूसखोर घाघ

Thu, 28 Nov 2019 01:09 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 28 Nov 2019 01:09 AM IST
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corrupt officers sit  in offices
झांसी। भ्रष्टाचार का दीमक सरकारी तंत्र को बुरी तरह से अपनी चपेट में लिए हुए है। थाना हो या तहसील या फिर अन्य कोई भी सरकारी दफ्तर, आम आदमी को अपने हर काम के लिए दाम देने पड़ते हैं। सरकारी कार्यशैली में पारदर्शिता लाने की सरकार तमाम कोशिशों को घूसखोर अधिकारी और कर्मचारी पलीता लगा रहे हैं। बुधवार को लेखपाल के रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने से एक बार फिर सरकारी तंत्र की कार्यशैली उजागर हुई है।
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ज्यादातर सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है। इसके आधार पर सरकार के नुमाइंदों द्वारा भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन, धरातल पर हकीकत इससे इतर है। जिले में एक - दो नहीं, बल्कि रिश्वतखोरी के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसी साल चार फरवरी को तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी अनूप तिवारी और पूर्ति लिपिक अमित कुमार श्रीवास्तव को जिलाधिकारी के कैंप कार्यालय से गिरफ्तार किया गया था। दोनों पर जिलाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर एक बंद पेट्रोल पंप को खुलवाने का आरोप था। उन पर लाखों के खेल का आरोप था। इससे पहले भी आपूर्ति विभाग के दो लिपिक रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जा चुके हैं। जबकि, इसी साल जुलाई में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के लिपिक मनीष पांडेय को एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। वे विद्यालय की मान्यता के एवज में घूस मांग रहे थे।
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ये तो सिर्फ बानगी भर है और वे लोग हैं जो रिश्वत लेते पकड़े गए। घूस का खेल हर सरकारी दफ्तर में बड़ी ही सफाई के साथ धड़ल्ले से जारी है। जमीन का दाखिल - खारिज कराना हो या आय-जाति प्रमाण पत्र बनवाना, मृत्यु प्रमाण पत्र तक बगैर खर्च के नहीं बन पाता है। आरटीओ ऑफिस में तो खुलेआम दलालों की मंडी सजी रहती है। सड़कों पर गाड़ियों की चेकिंग के दौरान भी लेनदेन का खेल बदस्तूर जारी रहता है। आम आदमी को ‘शुल्क’ देने के बाद ही ‘सुविधा’ मिल पाती है। ये रवायत पूरी न करने वाले अपने काम के लिए चक्कर काटते रह जाते हैं। बुधवार को रिश्वतखोर लेखपाल के पकड़े जाने की घटना ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की असलियत को उजागर करने का काम किया है।
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सहें नहीं, बल्कि लड़ें, करें शिकायत
भ्रष्टाचार को सहना भी इसे बढ़ावा देना है। कोई आपसे यदि रिश्वत मांग रहा है तो इसकी शिकायत करें। किसी भी रिश्वतखोर को उसके अंजाम तक पहुंचाना बेहद आसान है। शिवपुरी रोड पर पहूज के पास भ्रष्टाचार निवारण संगठन का कार्यालय है। यहां शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। विभाग के लखनऊ में बैठे पुलिस अधीक्षक टीम गठित कर देते हैं। सूचना जिलाधिकारी को दी जाती है। जिलाधिकारी दो सरकारी गवाह उपलब्ध कराते हैं। रिश्वत में दी जाने वाली रकम शिकायतकर्ता को लानी होती है। भ्रष्टाचार निवारण टीम नोटों पर एक विशेष केमिकल लगा देती है। टीम के सदस्य घूसखोर के इर्दगिर्द सादा वर्दी में डेरा डाल लेते हैं, जैसे ही लेनदेन होता है, टीम के सदस्य घूसखोर को दबोच लेते हैं।
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