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कोरोना मरीज अधिकारियों को करता रहा फोन, तब आठ घंटे बाद हुआ भर्ती
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव मरीज के साथ लापरवाही की हदें पार कर दी गईं। मरीज को घंटों वार्ड के बाहर बैठाए रखा गया। मरीज स्वास्थ्य विभाग से लेकर प्रशासन के अधिकारियों तक को फोन घनघनाता रहा। वह एक से दूसरे का नंबर देते रहे। आठ घंटे बाद उसे वार्ड में भर्ती किया जा सका।
शासन की तरफ से होम आइसोलेशन, होटलों में बिना लक्षण वाले मरीजों को भर्ती करने की सुविधा देने के बाद मेडिकल कॉलेज से मरीजों का भार कम भी हुआ है। इसके बावजूद भर्ती होने में घंटों लग रहे हैं। इसका ताजा मामला शनिवार को सामने आया। शुक्रवार को कोरोना पॉजिटिव आए सारंद्रा नगर निवासी रोडवेज कर्मचारी को एंबुलेंस शनिवार सुबह दस बजे मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल लेकर पहुंची। मरीज ने बताया कि उसकी फाइल तो बन गई थी लेकिन वार्ड के बाहर
बेंच पर उसे आठ घंटे तक बैठाए रखा गया। वह बार-बार वार्ड में भर्ती करने की गुजारिश करता रहा। इन घंटों में उसने स्वास्थ्य विभाग से लेकर प्रशासन तक के अधिकारियों को फोन किया। कभी किसी ने दूसरे का नंबर दे दिया तो किसी का फोन नहीं लगा। शाम छह बजे के आसपास उसे वार्ड में भर्ती किया गया। गनीमत रही कि मरीज की सेहत ज्यादा खराब नहीं थी, वरना इस बीच कुछ भी हो सकता था।
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इन्हीं लापरवाहियों से मरीज आने से बचते
इन्हीं लापरवाहियों की वजह से मरीज सरकारी अस्पताल में भर्ती होने से बचते हैं। कई मरीज तो वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल देते हैं। तब अधिकारी उनके आरोपों को खारिज करने में जुट जाते हैं।
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शासन की तरफ से होम आइसोलेशन, होटलों में बिना लक्षण वाले मरीजों को भर्ती करने की सुविधा देने के बाद मेडिकल कॉलेज से मरीजों का भार कम भी हुआ है। इसके बावजूद भर्ती होने में घंटों लग रहे हैं। इसका ताजा मामला शनिवार को सामने आया। शुक्रवार को कोरोना पॉजिटिव आए सारंद्रा नगर निवासी रोडवेज कर्मचारी को एंबुलेंस शनिवार सुबह दस बजे मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल लेकर पहुंची। मरीज ने बताया कि उसकी फाइल तो बन गई थी लेकिन वार्ड के बाहर
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बेंच पर उसे आठ घंटे तक बैठाए रखा गया। वह बार-बार वार्ड में भर्ती करने की गुजारिश करता रहा। इन घंटों में उसने स्वास्थ्य विभाग से लेकर प्रशासन तक के अधिकारियों को फोन किया। कभी किसी ने दूसरे का नंबर दे दिया तो किसी का फोन नहीं लगा। शाम छह बजे के आसपास उसे वार्ड में भर्ती किया गया। गनीमत रही कि मरीज की सेहत ज्यादा खराब नहीं थी, वरना इस बीच कुछ भी हो सकता था।
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इन्हीं लापरवाहियों से मरीज आने से बचते
इन्हीं लापरवाहियों की वजह से मरीज सरकारी अस्पताल में भर्ती होने से बचते हैं। कई मरीज तो वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल देते हैं। तब अधिकारी उनके आरोपों को खारिज करने में जुट जाते हैं।