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कोरोना कहर के चलते छोड़े जाएंगे 92 कैदी
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झांसी। कोरोना संक्रमण के चलते जेल प्रशासन 92 कैदियों की रिहाई करेगा। इनमें सात कैदी स्थाई तौर पर छोड़े जाएंगे। यह सात कैदी मामूली जुर्माने की रकम न भर पाने से अतिरिक्त कारावास भुगतने को मजबूर हैं। वहीं, पैरोल पर छोड़े जाने वाले 85 कैदियों की सूची जेल प्रशासन ने तैयार करके इसे शासन को भेज दी है। शासन से मुहर लगने के बाद इन कैदियों को पैरोल पर छोड़ दिया जाएगा।
कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता को देखते हुए जेल के भीतर कैदियों के घनत्व को कम करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत कैदियों को पैरोल पर छोड़ने का निर्णय लिया गया। पिछले साल भी कोरोना के चलते कैदियों को पैरोल पर छोड़ा गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पिछले दिनों उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई थी। इनके जरिए न्यायिक अधिकारी तय किए गए। इनको जेल में जाकर साठ दिन की पैरोल अथवा अंतरिम जमानत पर रिहा होने योग्य कैदियों की पहचान करनी थी। शासन के निर्देश के बाद जेल प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कराई। ऐसे कैदियों की सूची तैयार कराई जा रही थी जिनकी सजा सात वर्ष से कम हो। जांच पड़ताल के दौरान कुल ऐसे 85 कैदी मिले जिनको साठ दिन की विशेष पैरोल अथवा अंतरिम जमानत का लाभ दिया जाएगा। इन कैदियों की सूची शासन को भेजी गई है। सूची की मंजूरी के साथ ही इन कैदियों को भी पैरोल पर छोड़ा जाना शुरू किया जाएगा। इसके लिए उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने 15 मई तक कार्रवाई पूरी करने को कहा है।
इसके पहले योजना के तहत 30 मई तक कैदियों को कोर्ट में पेश होने पर रोक लगाई जा चुकी है। जो कैदी पहले से पैरोल पर हैं, उनकी पैरोल भी साठ दिन बढ़ाने की बात कही गई है। उधर, कारागार अधीक्षक का कहना है कैदियों की सूची तैयार करके इसे मंजूरी के लिए भेज दी गई है।
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सात में तीन कैदियों को मिल गई रिहाई
आर्थिक वजहों से जुर्माना अदा न कर पाने की वजह से अतिरिक्त दंड भुगत रहे कुल सात कैदियों में तीन कैदियों को आज रिहाई दे दी गई। वरिष्ठ जेल अधीक्षक रंग बहादुर के मुताबिक इन तीन कैदियोें पर कुल 10,500 रुपये का जुर्माना था। यह जुर्माना राशि ऋषभ सरावगी मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से जमा की गई। रिहा होने वालों में दीपचंद्र उर्फ तागा पर 2016 रुपये का जुर्माना था। इस वजह से वह तीन माह की अतिरिक्त सजा काट रहा था। इसके अलावा जुबैर एवं शिवम का भी संस्था ने जुर्माना भरकर उनको छुड़ाया। इनके अतिरिक्त तीन कैदियों को कुछ दिनों के भीतर रिहाई होेगी। इस दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता प्रदीप सरावगी, चंद्रभान राय समेत अन्य मौजूद रहे।
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कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता को देखते हुए जेल के भीतर कैदियों के घनत्व को कम करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत कैदियों को पैरोल पर छोड़ने का निर्णय लिया गया। पिछले साल भी कोरोना के चलते कैदियों को पैरोल पर छोड़ा गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पिछले दिनों उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई थी। इनके जरिए न्यायिक अधिकारी तय किए गए। इनको जेल में जाकर साठ दिन की पैरोल अथवा अंतरिम जमानत पर रिहा होने योग्य कैदियों की पहचान करनी थी। शासन के निर्देश के बाद जेल प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कराई। ऐसे कैदियों की सूची तैयार कराई जा रही थी जिनकी सजा सात वर्ष से कम हो। जांच पड़ताल के दौरान कुल ऐसे 85 कैदी मिले जिनको साठ दिन की विशेष पैरोल अथवा अंतरिम जमानत का लाभ दिया जाएगा। इन कैदियों की सूची शासन को भेजी गई है। सूची की मंजूरी के साथ ही इन कैदियों को भी पैरोल पर छोड़ा जाना शुरू किया जाएगा। इसके लिए उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने 15 मई तक कार्रवाई पूरी करने को कहा है।
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इसके पहले योजना के तहत 30 मई तक कैदियों को कोर्ट में पेश होने पर रोक लगाई जा चुकी है। जो कैदी पहले से पैरोल पर हैं, उनकी पैरोल भी साठ दिन बढ़ाने की बात कही गई है। उधर, कारागार अधीक्षक का कहना है कैदियों की सूची तैयार करके इसे मंजूरी के लिए भेज दी गई है।
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सात में तीन कैदियों को मिल गई रिहाई
आर्थिक वजहों से जुर्माना अदा न कर पाने की वजह से अतिरिक्त दंड भुगत रहे कुल सात कैदियों में तीन कैदियों को आज रिहाई दे दी गई। वरिष्ठ जेल अधीक्षक रंग बहादुर के मुताबिक इन तीन कैदियोें पर कुल 10,500 रुपये का जुर्माना था। यह जुर्माना राशि ऋषभ सरावगी मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से जमा की गई। रिहा होने वालों में दीपचंद्र उर्फ तागा पर 2016 रुपये का जुर्माना था। इस वजह से वह तीन माह की अतिरिक्त सजा काट रहा था। इसके अलावा जुबैर एवं शिवम का भी संस्था ने जुर्माना भरकर उनको छुड़ाया। इनके अतिरिक्त तीन कैदियों को कुछ दिनों के भीतर रिहाई होेगी। इस दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता प्रदीप सरावगी, चंद्रभान राय समेत अन्य मौजूद रहे।