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कोरोना ने बना दिया भुलक्कड़, न काम याद रहता, न पढ़ा हुआ
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झांसी। कोरोना से ठीक होने के बाद कई लोग दूसरी बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। इन्हीं में से एक बार-बार भूलने की बीमारी डिमेंशिया है। ऐसे रोगी काम करते-करते कोई भी सुनी हुई बात कुछ घंटों बाद याद नहीं रख पाते। चिड़चिड़ापन के साथ-साथ काम में मन भी नहीं लगता है। डॉक्टरों के पास इस तरह के कई केस सामने आए हैं।
मेडिकल कॉलेज के क्रिटिकल केयर इंचार्ज डॉ. रामबाबू सिंह ने 2500 मरीजों पर स्टडी की तो चार प्रतिशत डिमेंशिया की चपेट में मिले हैं। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों को कोरोना का गंभीर संक्रमण हुआ था, उनमें बार-बार भूलने की बीमारी ज्यादा सामने आई है। इसके पीछे का मुख्य कारण मस्तिष्क का सिकुड़ना और ग्रे मैटर का कम होना है, जो मरीज के छह साल उम्र बढ़ने के बराबर है। ग्रे मैटर हमारे दिमाग के सेंट्रल नर्वस सिस्टम का अहम हिस्सा होता है और मांसपेशियों के नियंत्रण, महसूस करना जैसे देखना, सुनना, याददाश्त आदि के लिए जिम्मेदार होता है। डिमेंशिया की चपेट में आने वाले नौकरीपेशा लोगों को कामकाज में काफी दिक्कत होती है। वह काम पर फोकस नहीं कर पाते हैं। वहीं, डिमेंसिया पीड़ित युवाओं की पढ़ाई पर काफी बुरा असर पड़ रहा है।
ये हैं मामले
केस-1
कुछ घंटों बाद पढ़ा हुआ याद नहीं रहता
22 साल का युवक कोरोना की चपेट में आकर तीन सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहा। ठीक हुआ तो भूलने की बीमारी हो गई। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर को उसने बताया कि वह जो भी पढ़ता है, कुछ घंटों बाद याद नहीं रहता है। इससे वह मानसिक तनाव में भी आ जाता है। अभी उसका इलाज जारी है।
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केस-2
नौकरी जाने तक की आ गई नौबत
प्राइवेट नौकरी करने वाला 38 वर्षीय व्यक्ति भी कोरोना से ठीक होने के बाद डिमेंशिया का शिकार हो गया। बार-बार अधिकारियों द्वारा कही बात भूल जाने से उसकी नौकरी जाने तक की नौबत आ गई। बाद में इलाज कराया तो कुछ सुधार हुआ है। डॉक्टर के मुताबिक अभी कुछ महीने और दवाएं जारी रहेंगी।
ऐसे करें बचाव
- नियमित व्यायाम
- पूरी नींद जरूर लें
- ड्राई फ्रूट्स का सेवन करें
- सामाजिक रूप से जुड़े रहें
- डॉक्टर से चिकित्सीय परामर्श लें
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मेडिकल कॉलेज के क्रिटिकल केयर इंचार्ज डॉ. रामबाबू सिंह ने 2500 मरीजों पर स्टडी की तो चार प्रतिशत डिमेंशिया की चपेट में मिले हैं। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों को कोरोना का गंभीर संक्रमण हुआ था, उनमें बार-बार भूलने की बीमारी ज्यादा सामने आई है। इसके पीछे का मुख्य कारण मस्तिष्क का सिकुड़ना और ग्रे मैटर का कम होना है, जो मरीज के छह साल उम्र बढ़ने के बराबर है। ग्रे मैटर हमारे दिमाग के सेंट्रल नर्वस सिस्टम का अहम हिस्सा होता है और मांसपेशियों के नियंत्रण, महसूस करना जैसे देखना, सुनना, याददाश्त आदि के लिए जिम्मेदार होता है। डिमेंशिया की चपेट में आने वाले नौकरीपेशा लोगों को कामकाज में काफी दिक्कत होती है। वह काम पर फोकस नहीं कर पाते हैं। वहीं, डिमेंसिया पीड़ित युवाओं की पढ़ाई पर काफी बुरा असर पड़ रहा है।
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ये हैं मामले
केस-1
कुछ घंटों बाद पढ़ा हुआ याद नहीं रहता
22 साल का युवक कोरोना की चपेट में आकर तीन सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहा। ठीक हुआ तो भूलने की बीमारी हो गई। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर को उसने बताया कि वह जो भी पढ़ता है, कुछ घंटों बाद याद नहीं रहता है। इससे वह मानसिक तनाव में भी आ जाता है। अभी उसका इलाज जारी है।
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केस-2
नौकरी जाने तक की आ गई नौबत
प्राइवेट नौकरी करने वाला 38 वर्षीय व्यक्ति भी कोरोना से ठीक होने के बाद डिमेंशिया का शिकार हो गया। बार-बार अधिकारियों द्वारा कही बात भूल जाने से उसकी नौकरी जाने तक की नौबत आ गई। बाद में इलाज कराया तो कुछ सुधार हुआ है। डॉक्टर के मुताबिक अभी कुछ महीने और दवाएं जारी रहेंगी।
ऐसे करें बचाव
- नियमित व्यायाम
- पूरी नींद जरूर लें
- ड्राई फ्रूट्स का सेवन करें
- सामाजिक रूप से जुड़े रहें
- डॉक्टर से चिकित्सीय परामर्श लें