फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   corona afraid : increase hypertension and bp patient

‘कोरोना’ ने बढ़ाया हार्ट अटैक, ‘वायरस’ के खौफ ने बीपी, हाइपरटेंशन

Sat, 15 Aug 2020 02:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 15 Aug 2020 02:15 AM IST
विज्ञापन
corona afraid : increase hypertension and bp patient
corona afraid : increase hypertension and bp patient
झांसी। कोरोना वारयस के कई तरह के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। वायरस की वजह से नसों में थक्का जमने के कारण हार्ट अटैक के मामले बढ़ गए हैं। मेडिकल कॉलेज में भर्ती कई पॉजिटिव मरीजों की हार्ट अटैक से मौत भी हो चुकी है। वहीं, पलमोनरी एंबॉलिज्म के चलते भी जान जा रही है। वायरस का खौफ इतना है कि तनाव में लोगों बीपी और हाइपरटेंशन का शिकार हो रहे हैं। कोरोना काल में इन बीमारियों के मरीजों में 20 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।
विज्ञापन

कोरोना बीमारी से ज्यादा इसका खौफ लोगों पर ज्यादा हावी है। इस कारण पहले से हाइपरटेंशन और ब्लड प्रेशर के मरीज अस्पतालों में डॉक्टरों को दिखाने के लिए नहीं जा रहे हैं। कइयों ने दवाओं का कोर्स बीच में ही छोड़ दिया है। इससे मर्ज बढ़ जा रहा है, जो कि ठीक नहीं है। बीपी को वैसे भी साइलेंट किलर कहा जाता है, ऐसे में कई मरीजों को अचानक बीपी बढ़ने के कारण हार्ट अटैक और लकवा पड़ जा रहा है। वहीं, कोरोना संक्रमित मरीज की नसों में थक्का जमने के मामले भी सामने आ रहे हैं। फेफड़ों में थक्का जमने से कोरोना मरीज पलमोनरी एंबॉलिज्म का शिकार हो रहे हैं। यह भी कोरोना मरीजों की मौत का एक बड़ा कारण है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने वाले ऐसे मरीजों को खून पतला करने का इंजेक्शन भी दिया जा रहा है। डॉक्टर मरीजों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन इस वायरस के कई रंग देखने को मिल रहे हैं।
विज्ञापन

40 की उम्र के बाद बीपी, ब्लड शुगर, ईसीजी जांच जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि बीपी, डायबिटीज और हृदय की बीमारियां सामान्यत: ज्यादा देखने को मिलती हैं। ऐसे में 40 की उम्र के बाद लोगों को समय-समय पर अपना बीपी, ब्लड शुगर और ईसीजी की जांच कराते रहना चाहिए, क्योंकि यदि कोई बीमारी होगी तो उसका समय से उपचार शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

- कई कोरोना पॉजिटिव मरीजों के नसों में क्लाट होने के मामले सामने आ रहे हैं। इसके अलावा पलमोनरी एंबॉलिज्म यानी फेफड़ों में थक्का जमने के भी केस सामने आ रहे हैं। ऐसे में जांच में क्लॉट का मामला सामने आने पर मरीजों को खून पतला करने का इंजेक्शन दिया जाता है। मरीजों का हरसंभव इलाज किया जा रहा है। - डॉ. निर्देश जैन, हार्ट स्पेशिलिस्ट।

कोरोना के दौर में मानसिक तनाव, बीपी, हाइपरटेंशन, हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या में 20 फीसदी तक इजाफा हुआ है। जो लोग इन बीमारियों से पहले से ग्रसित हैं, वह नियमित दवाएं खाते रहें। बीच में दवाओं का कोर्स बंद न करें। यदि अस्पताल नहीं जाना चाहते तो टेलीमेडिसिन के जरिए डॉक्टर से दवाएं पूछते रहें। - डॉ. अनु निगम, फिजीशियन।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed