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लगातार काम, नींद न आराम, डिप्रेशन की गिरफ्त में हैं पुलिस वाले
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पुलिस कर्मचारी को डिप्रेशन खबर में... डॉ. अर्जित गौरव।
- फोटो : REPORTERS
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झांसी। बिगड़ा खानपान, अनियमित दिनचर्या से ज्यादातर पुलिस कर्मचारियों को नींद न आने की बीमारी हो रही है। इसका सीधा असर पुलिस कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कामकाज पर पड़ रहा है। पुलिस कर्मचारी चिड़चिड़े तो हो ही रहे हैं, साथ ही उनमें डिप्रेशन भी बढ़ रहा है। मनोचिकित्सकों के पास इस तरह के कई मामले सामने आ रहे हैं। कई पुलिसकर्मियों को तो यह पता ही नहीं है कि वे डिप्रेशन का शिकार हैं। डॉक्टरों के अनुसार दस में से पांच पुलिसवालों में इस तरह की समस्या है।
तनाव मन से संबंधी रोग है, जो मन की स्थिति और बाहरी परिस्थिति के बीच असंतुलन के कारण तनाव होता है। तनाव से व्यक्ति में कई मनोविकार पैदा होते हैं। इससे व्यक्ति हमेशा अशांत, अस्थिर रहता है। तनाव एक द्वंद की तरह है, जो व्यक्ति के मन एवं भावनाओं में अस्थिरता पैदा करता है। इससे कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। काम के दबाव के कारण लगभग हर पुलिस कर्मचारी तनाव में रहता है। दिन-रात ड्यूटी के कारण पुलिस कर्मचारी चिड़चिड़े हो रहे हैं।
पुलिस कर्मचारियों को बात-बात पर गुस्सा आता है। काम के बोझ के कारण ही उनके शरीर में मेलाटोनिन हार्मोंस असंतुलित हो जाता है। शरीर के बायोलॉजिकल क्लॉक गड़बड़ा जाती है। जब नींद नहीं आती है तो कई पुलिस कर्मचारी नींद की गोलियां तक खाते हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने के कारण फिर वह डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। मनोचिकित्सकों के पास लगातार इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ड्यूटी का समय ज्यादा होने, काम का दबाव, तनाव, नींद न आना, परिवार से दूरी की वजह से अवसाद का शिकार होने के मामले पुलिस कर्मचारियों में देखे जा रहे हैं।
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डिप्रेशन के लक्षण
- हमेशा उदास रहना।
- आत्मविश्वास की कमी होना।
- उलझन में व हारा महसूस करना।
- किसी कार्य में ध्यान केंद्रित करने में परेशानी।
- ज्यादातर अकेले रहना पसंद करना।
- हमेशा चिड़चिड़ा रहना, कम बोलना।
- कोई भी समस्या आने पर जल्दी हताश हो जाना।
अवसाद से ऐसे बचें
- भरपूर मात्रा में पानी पीएं।
- पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करें।
- हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल खाएं।
- जंक फूड का सेवन पूरी तरह छोड़ दें।
- सुबह की सैर, योग व प्राणायाम करें।
पुलिस कर्मचारियों का ड्यूटी का समय ज्यादा होता है। इसके अलावा काम का दबाव, तनाव के कारण कई पुलिस कर्मचारियों को नींद न आने की बीमारी हो रही है। यह मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लंबे समय तक यह समस्या होने पर पुलिस कर्मचारी डिप्रेशन का भी शिकार हो रहे हैं। - डॉ. अर्जित गौरव, मनोचिकित्सक।
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तनाव मन से संबंधी रोग है, जो मन की स्थिति और बाहरी परिस्थिति के बीच असंतुलन के कारण तनाव होता है। तनाव से व्यक्ति में कई मनोविकार पैदा होते हैं। इससे व्यक्ति हमेशा अशांत, अस्थिर रहता है। तनाव एक द्वंद की तरह है, जो व्यक्ति के मन एवं भावनाओं में अस्थिरता पैदा करता है। इससे कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। काम के दबाव के कारण लगभग हर पुलिस कर्मचारी तनाव में रहता है। दिन-रात ड्यूटी के कारण पुलिस कर्मचारी चिड़चिड़े हो रहे हैं।
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पुलिस कर्मचारियों को बात-बात पर गुस्सा आता है। काम के बोझ के कारण ही उनके शरीर में मेलाटोनिन हार्मोंस असंतुलित हो जाता है। शरीर के बायोलॉजिकल क्लॉक गड़बड़ा जाती है। जब नींद नहीं आती है तो कई पुलिस कर्मचारी नींद की गोलियां तक खाते हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने के कारण फिर वह डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। मनोचिकित्सकों के पास लगातार इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ड्यूटी का समय ज्यादा होने, काम का दबाव, तनाव, नींद न आना, परिवार से दूरी की वजह से अवसाद का शिकार होने के मामले पुलिस कर्मचारियों में देखे जा रहे हैं।
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डिप्रेशन के लक्षण
- हमेशा उदास रहना।
- आत्मविश्वास की कमी होना।
- उलझन में व हारा महसूस करना।
- किसी कार्य में ध्यान केंद्रित करने में परेशानी।
- ज्यादातर अकेले रहना पसंद करना।
- हमेशा चिड़चिड़ा रहना, कम बोलना।
- कोई भी समस्या आने पर जल्दी हताश हो जाना।
अवसाद से ऐसे बचें
- भरपूर मात्रा में पानी पीएं।
- पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करें।
- हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल खाएं।
- जंक फूड का सेवन पूरी तरह छोड़ दें।
- सुबह की सैर, योग व प्राणायाम करें।
पुलिस कर्मचारियों का ड्यूटी का समय ज्यादा होता है। इसके अलावा काम का दबाव, तनाव के कारण कई पुलिस कर्मचारियों को नींद न आने की बीमारी हो रही है। यह मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लंबे समय तक यह समस्या होने पर पुलिस कर्मचारी डिप्रेशन का भी शिकार हो रहे हैं। - डॉ. अर्जित गौरव, मनोचिकित्सक।